आईएएस अधिकारी के महिला जेकेएएस अधिकारी से दुर्व्यवहार पर बरसे फारूक अब्दुल्ला, कहा- हटाया जाना चाहिए
श्रीनगर, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर में एक आईएएस अधिकारी द्वारा महिला जेकेएएस अधिकारी के साथ दुर्व्यवहार का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
फारूक अब्दुल्ला ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "वे लोगों की सेवा करने और उनकी मुश्किलें कम करने के लिए आए हैं, न कि लोगों के साथ बुरा बर्ताव करने के लिए। उनका व्यवहार बहुत गलत था। मुझे बहुत अफसोस है कि जब मैंने आज सोशल मीडिया पर यह देखा, तो मुझे शर्मिंदगी महसूस हुई। उन्होंने सभी अधिकारियों को एक बेहद शर्मनाक स्थिति में ला खड़ा किया है।"
उन्होंने आईएएस अधिकारी के व्यवहार को पूरी तरह से अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि ऐसे अधिकारी को जम्मू-कश्मीर से हटा दिया जाना चाहिए।
फारूक अब्दुल्ला ने कहा, "उन्हें फटकार मिलनी चाहिए। उनका बर्ताव उस पेशेवर स्तर का नहीं है जिसकी एक अधिकारी से उम्मीद की जाती है। उनका काम लोगों की बात सुनना है और वे लोग जो अपनी शिकायतें लेकर आते हैं, उनकी मदद करना है। इसके बजाय, उन्होंने बस चिल्लाकर कहा, 'बाहर निकलो, बाहर निकलो!' यह बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है। उन्हें जम्मू-कश्मीर से हटा दिया जाना चाहिए। वे ऐसे अधिकारी नहीं हैं जिन्हें इस राज्य में सेवा करनी चाहिए।"
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि चाहे कोई अधिकारी हो या मंत्री, सभी का काम जनता की सेवा करना है। "चाहे कोई अधिकारी हो या मंत्री, वे यहां जनता की सेवा करने के लिए हैं, लोगों की मुश्किलें कम करने के लिए हैं न कि उनके साथ बुरा बर्ताव करने के लिए। उनका व्यवहार बेहद गलत था। सोशल मीडिया पर यह देखकर मुझे बहुत निराशा हुई। यह शर्मनाक था। अगर ऐसी घटना के समय मैं इंचार्ज होता तो वे इस राज्य में कुछ मिनट भी नहीं टिक पाते।"
बताया जा रहा है कि सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद से ही अधिकारी वर्ग और राजनीतिक गलियारों में नाराजगी देखी जा रही है।
वहीं, दिल्ली में हो रहे विरोध प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए फारूक अब्दुल्ला ने कहा, "मुझे लगता है कि वे बहुत अच्छे हैं। तानाशाही के खिलाफ हिटलर जैसी कार्यशैली के खिलाफ एक नई लहर शुरू हो रही है।"
विपक्षी दलों द्वारा प्रस्तावित तिरंगा प्रदर्शन को लेकर सियासी माहौल गरमाया हुआ है, जिस पर फारूक अब्दुल्ला ने इसे तानाशाही के खिलाफ जन आंदोलन करार दिया।
--आईएएनएस
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