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हैदराबाद के स्कूल में 'कलमा' होमवर्क विवाद पर मानवाधिकार आयोग सख्त, तेलंगाना सरकार को भेजा नोटिस

नई दिल्ली, 17 जुलाई (आईएएनएस)। हैदराबाद के एक स्कूल में कथित तौर पर हिंदू बच्चों को इस्लामिक धार्मिक पाठ यानी 'कलमा' याद करने का होमवर्क दिए जाने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने संज्ञान लिया है। आयोग ने इस मामले में तेलंगाना सरकार को नोटिस जारी कर रिपोर्ट मांगी है। एनएचआरसी सदस्य प्रियांक कानूनगो ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि शिकायत के आधार पर आयोग ने राज्य सरकार से आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
 

नई दिल्ली, 17 जुलाई (आईएएनएस)। हैदराबाद के एक स्कूल में कथित तौर पर हिंदू बच्चों को इस्लामिक धार्मिक पाठ यानी 'कलमा' याद करने का होमवर्क दिए जाने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने संज्ञान लिया है। आयोग ने इस मामले में तेलंगाना सरकार को नोटिस जारी कर रिपोर्ट मांगी है। एनएचआरसी सदस्य प्रियांक कानूनगो ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि शिकायत के आधार पर आयोग ने राज्य सरकार से आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

प्रियांक कानूनगो ने आईएएनएस को बताया कि आयोग को 'सेवान्या उत्थान फाउंडेशन' नामक संस्था की ओर से शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि हैदराबाद स्थित एक स्कूल में हिंदू बच्चों को कलमा याद करने का होमवर्क दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह गंभीर विषय है और संविधान के अनुच्छेद 28(3) के प्रावधानों का उल्लंघन हो सकता है।

उन्होंने कहा कि इस मामले में तेलंगाना सरकार को नोटिस जारी कर पूरे प्रकरण की जांच करने और कार्रवाई के संबंध में रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है। एनएचआरसी ने यह कदम बच्चों के अधिकारों और शिक्षा व्यवस्था में धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए उठाया है।

प्रियांक कानूनगो ने बच्चों से जुड़े एक अन्य मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, भारत में बच्चों की नाबालिग की आयु 18 वर्ष तक निर्धारित है। शारीरिक संबंध बनाने के लिए बच्चों को एक्सपेरिमेंट की वस्तु मानना, भारत के सामाजिक परिवेश के अनुरूप उचित प्रतीत नहीं होता है। यदि बच्चे 15 साल की आयु में इस तरह का एक्सपेरिमेंट करेंगे तो फिर उनका यौन शोषण भी होगा, उनकी ट्रैफिकिंग भी होगी, स्कूलों के बाहर अबॉर्शन सेंटर्स भी खुलेंगे। हमको भारतीय समाज को इन सब से बचाने की तरफ जाना चाहिए। मुझे विश्वास है कि आज जब माननीय सर्वोच्च न्यायालय इस मामले को सुनेंगे तो इन सब तथ्यों को संज्ञान में लेते हुए बच्चों के हित में फैसला करेंगे।

इसके अलावा, एनएचआरसी सदस्य ने राजस्थान में सी-सेक्शन डिलीवरी के बाद कथित रूप से कई महिला मरीजों की किडनी फेल होने से हुई मौतों के मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में आयोग ने नेशनल मेडिकल काउंसिल और राजस्थान सरकार को नोटिस जारी कर रिपोर्ट मांगी है।

--आईएएनएस

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