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हमें न ऑपरेशन लोट्स से लेना देना है और ना ऑपरेशन टाइगर से : आनंद दुबे

मुंबई, 22 जून (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने अपनी राजनीतिक स्थिति साफ करते हुए कहा कि हमें न लोटस ऑपरेशन से कोई लेना देना है और न ही ऑपरेशन टाइगर से। हमारा मुख्य मकसद लोगों के हितों के लिए काम करना है। वो हम करते रहेंगे।
 
हमें न ऑपरेशन लोट्स से लेना देना है और ना ऑपरेशन टाइगर से : आनंद दुबे

मुंबई, 22 जून (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने अपनी राजनीतिक स्थिति साफ करते हुए कहा कि हमें न लोटस ऑपरेशन से कोई लेना देना है और न ही ऑपरेशन टाइगर से। हमारा मुख्य मकसद लोगों के हितों के लिए काम करना है। वो हम करते रहेंगे।

उन्होंने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि 2022 में हमारी पार्टी को साजिशन तोड़ा गया। इसके बावजूद भी हम 2024 के लोकसभा चुनाव में 9 सांसद जीतकर आए, वो भी इतनी विकट स्थिति में। उधर, एकनाथ शिंदे सात ही सांसद जीतने में सफल रहे। देवेंद्र फडणवीस को पता है कि लोगों को यह पसंद नहीं आता है। इसके बावजूद भी वो जोर आजमाइश के दम पर जनता के बीच में पहुंचे।

इसके अलावा उन्होंने राम मंदिर के दानपात्र में हुए घपलेबाजी को लेकर भी अपनी बात रखी। उनके मुताबिक, महाकुंभ से लेकर आज तक श्रद्धलुओं ने अपनी मेहनत की कमाई से भगवान राम को अर्पण किए। यह सोचकर कि भगवान राम को अर्पण किया गया धन समाज को काम आएगा। इस पैसे से अस्पताल, स्कूल बनेंगे और जरूरतमंदों की मदद की जाएगी। इस पैसे गरीब से गरीब व्यक्ति को राहत दी जाएगी, लेकिन पैसों की बंदरबाट चालू है। नृपेंद्र मिश्रा और चंपत राय खामोश हैं। कोई कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं है। कोई कुछ कहने के लिए तैयार नहीं है। चोरी करने वाला भी सरकार से जुड़ा हुआ है और उसकी रखवाली यानी की एसआईटी में शामिल लोग भी सरकार से जुड़े हुए हैं। ऐसी स्थिति में आपको क्या लगता है कि इसकी जांच हो पाएगी? क्या इस मामले में न्याय का मार्ग प्रशस्त हो पाएगा ? इसलिए इस मामले को धीरे से चलाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि अगर यही मामला गैर बीजेपी के शासनकाल में आया होता, तो अब तक व्यक्ति जेल के पहुंच चुका होता। ये सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। यह अफसोस की बात है कि ये लोग भगवान श्री राम के नाम पर राजनीति करने पर आमादा हो चुके हैं। उनके चढ़ावे के साथ लूटपाट की गई। यह एक तरह से देशद्रोह का मामला है। हम मांग करते हैं कि देशद्रोह के तहत इस मामले में कार्रवाई होनी चाहिए, तभी जाकर सभी राम भक्तों के सीने को ठंडक मिलेगी।

उन्होंने आनंद दुबे ने शिवसेना (यूबीटी) में चल रही उठापटक पर भी अपनी बात रखी। उनके मुताबिक 16 जून को जब खबर आई कि हमारे छह सांसद नॉट रिचेबल हैं, तभी से हम समझ गए थे कि ये हमारे यहां रुकेंगे नहीं। इनको हमने टिकट दिया, साधन और संसाधन दिए। इन लोगों को हमने शिंदे खेमे के खिलाफ चुनावी मैदान में उतारा। इन्हें इतना बड़ा बनाया और आज स्थिति ऐसी हो चुकी है कि ये लोग आज जा रहे हैं। अब आप जा रहे हैं, तो जा सकते हैं। जाने वाले को कौन रोक पाया है, लेकिन एक बार ये तो बता दीजिए कि आप लोग क्यों जा रहे हैं। हमें तो इस बात की टेंशन है कि इन लोगों को हम इतना बड़ा करते है, इन्हें शक्तियां देते हैं, इसके बाद जब ये लोग बड़े हो जाते हैं, तो बाजार में जाकर बिक जाते हैं। आखिर ये क्या चल रहा है। संगत का असर पड़ता है। अब भाजपा के साथ रहोगे, तो भाजपा जैसा काम करोगे। हमारे साथ रहोगे तो हमारे जैसा काम करोगे। इन लोगों को यह समझना होगा कि तोड़फोड़ की राजनीति लोगों को ज्यादा दिनों तक समझ में नहीं आती है। आज नहीं तो एक दिन इसका अंत जरूर होगा।

उन्होंने उद्धव ठाकरे के बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। उनके मुताबिक, उन्होंने बिल्कुल सही कहा है कि शिवसेना का जन्म 19 जून 1986 को हुआ था, तभी से शिवसेना हमारे पास है, क्योंकि हम लोग शिवसैनिक हैं। जो शिवसैनिक चाहता है, वही उनका नेता होता है। सभी शिवसैनिकों के प्रमुख उद्धव ठाकरे हैं। अब आप कहेंगे कि कोई मच्छर पार्टी आ गई, तो कॉकरोच पार्टी आ गई, तो छिपकली पार्टी आ गई, तो ये कोई पार्टी नहीं, बल्कि गुट हैं। उसी तरह से एकनाथ शिंदे की शिवसेना एक गुट है। अब इन लोगों की वक्रदृष्टि समाजवादी पार्टी की ओर है। मेरा सुझाव रहेगा कि समाजवादी पार्टी को भी सावधान होना चाहिए।

--आईएएनएस

एसएचके/वीसी