हमारे लेखक ने युद्ध के साथ पायलट की निजी जीवन पर भी जोर दिया: मिहिर आहूजा
मुंबई, 31 जुलाई (आईएएनएस)। अभिनेता मिहिर आहूजा अपकमिंग वेब सीरीज 'ऑपरेशन सफेद सागर' में भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान पायलट का किरदार निभा रहे हैं। अभिनेता ने अपने लेखक की तारीफ करते हुए बताया कि उन्होंने फाइट पर फोकस करने के साथ-साथ पायलट की निजी जिंदगी के बारे में भी बताया।
अभिनेता मिहिर आहूजा ने बताया कि उनके किरदार में काफी ज्यादा गहराई थी, क्योंकि वे अपने जीवन में पर्सनल और प्रोफेशनल दोनों तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा, "हमारे लेखक बहुत अच्छे हैं क्योंकि उन्होंने सिर्फ युद्ध पर ही नहीं लिखा, बल्कि सभी सैनिकों की पर्सनल लाइफ पर भी जोर दिया है। उन्होंने पायलट के परिवार की स्थिति और पत्नियों के इमोशनंस को भी ऐड किया, क्योंकि जो हिम्मत वे दिखाते हैं, उसी की वजह से पायलट बन पाते हैं और फिर वे अपने फ्लाइंग पर ध्यान दे पाते हैं।
उन्होंने अपने किरदार के हालातों का जिक्र करते हुए कहा, "मैं ये तो नहीं कहूंगा कि मेरा किरदार जटिल है, बल्कि उसके हालात जटिल हैं, जिनमें वह फंसा हुआ है। उसके जीवन की अपनी कुछ समस्याएं हैं और जैसा कि आप जानते हैं कि मैं अभी भी शो के बारे में ज्यादा कुछ बताना नहीं चाहता, लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि जब हम वहां असली जिंदगी के पायलटों और अफसरों से मिले तो पता चला कि वो भी इंसान ही हैं। जिंदगी में चाहे कितनी भी परेशानियां हों, लेकिन जब वो फ्लाइंग करते हैं तो सिर्फ उस पर ही ध्यान देते हैं।"
अभिनेता ने पायलट के साथ अपने अनुभव शेयर करते हुए बताया, "एक बात मैं आपको बताना चाहूंगा, जो मुझे उनसे सीखने को मिला कि जब वे उड़ रहे होते हैं, वह उस पल को खुलकर जीते हैं, क्योंकि उन्हें पता होता है कि वे देश के लिए काम कर रहे हैं। ये सब कुछ इस तरह है, जो मुझे उनमें पसंद आया और मैं अपने किरदार के लिए अपनाया भी था और मैं इससे बेहद खुश हूं कि मेरी ज्यादातर तैयारी एयरपोर्ट पर हुई, क्योंकि शूटिंग शुरू होने से 2 दिन पहले मैं लॉक हो गया था, इसलिए मुझे ज्यादा यूट्यूब वीडियो देखने को नहीं मिले और मैं ज्यादा तैयारी नहीं कर पाया और शूटिंग के पहले दो या तीन दिन बहुत हल्के थे।"
उन्होंने आगे कहा, "उसके बाद मेरे पास 5-6 दिन का बफर डे था। मुझे कभी अच्छे से गैप नहीं मिला, लेकिन मैं बहुत खुश हूं कि वे बफर डे एयरपोर्ट स्टेशन पर थे। मुझे सच में उन फाइटर प्लेन को छूने का मौका मिला, मिग को महसूस करना और एयरपोर्ट बेस पर अपने आसपास के ऑफिसर्स के साथ अपना होमवर्क तक करने का मौका मिला था, जिससे मुझे सच में मदद मिली। मैं मानता हूं कि मुझे प्रोजेक्ट से पहले नहीं, बल्कि प्रोजेक्ट्स के बीच में अच्छी तैयारी का समय मिला।"
--आईएएनएस
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