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हिंदुत्व त्यागने का पछतावा, इसलिए बार-बार भगवा-भगवा कर रहे उद्धव ठाकरे : राम कदम

मुंबई, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। दशहरे के अवसर पर शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे द्वारा दिए गए बयान ने महाराष्ट्र में एक बार फिर सियासी पारा बढ़ा दिया है। उद्धव ठाकरे ने अपने संबोधन में कहा था कि सब जगह भगवा माहौल है और यह भगवा हमें सिर्फ महाराष्ट्र के विधान भवन में नहीं बल्कि दिल्ली के तख्त पर भी लहराना है। उनके इस बयान पर भाजपा नेता राम कदम ने पलटवार किया है।
 

मुंबई, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। दशहरे के अवसर पर शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे द्वारा दिए गए बयान ने महाराष्ट्र में एक बार फिर सियासी पारा बढ़ा दिया है। उद्धव ठाकरे ने अपने संबोधन में कहा था कि सब जगह भगवा माहौल है और यह भगवा हमें सिर्फ महाराष्ट्र के विधान भवन में नहीं बल्कि दिल्ली के तख्त पर भी लहराना है। उनके इस बयान पर भाजपा नेता राम कदम ने पलटवार किया है।

राम कदम ने कहा कि उद्धव ठाकरे के कल के भाषण में ऑपरेशन टाइगर थ्री का डर साफ नजर आ रहा था। उद्धव ठाकरे ने हिंदुत्व को त्याग दिया है और अब उन्हें उसका पछतावा हो रहा है। इसी पछतावे के कारण वह बार-बार अपने भाषण में भगवा शब्द का उच्चारण कर रहे हैं और बार-बार छत्रपति शिवाजी महाराज का नाम ले रहे हैं।

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि देश ने देखा है कि किस तरह उद्धव ठाकरे ने उमर खालिद जैसे लोगों का समर्थन किया। जो राहुल गांधी लगातार सनातन धर्म पर हमला करते हैं और भगवा को आतंकवाद से जोड़ते हैं, उन्हीं राहुल गांधी का हाथ थामकर उद्धव ठाकरे चल रहे हैं। यह दोहरा मापदंड है।

राम कदम ने कहा कि टाइगर ऑपरेशन थ्री के डर और हिंदुत्व छोड़ने की वजह से अब उद्धव ठाकरे के पास लोग नहीं बचे हैं। कल दशहरा रैली में वह भीड़ तक नहीं जुटा पाए। जो थोड़ी-बहुत भीड़ आई थी, वह भी पैसे देकर बुलाई गई थी। उनके भाषण को सुनने में लोगों में कोई जोश नहीं दिखा। उनका यह डिप्रेशन कल के भाषण में साफ तौर पर दिखाई दे रहा था। उन्होंने कहा कि अगर उद्धव ठाकरे ने अपने पिता बाला साहब ठाकरे की विचारधारा को नहीं त्यागा होता तो आज उनके भाषण में यह पछतावा नहीं दिखता।

उद्धव ठाकरे द्वारा मुंबई पुलिस को लेकर दिए गए बयान पर भी राम कदम ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं और वह मुंबई की साहसी पुलिस को लोमड़ी कह रहे हैं। क्या मुंबई की साहसी पुलिस की तुलना लोमड़ी से करना उचित है?

उन्होंने कहा कि यह उद्धव ठाकरे की हताशा और निराशा को दर्शाता है कि वह अब किसी को भी कुछ भी बोल रहे हैं। यदि उन्हें मुंबई पुलिस लोमड़ी लगती है तो वह और उनका परिवार इसी पुलिस की सुरक्षा लेकर क्यों घूम रहा है? उन्हें नैतिकता के आधार पर यह सुरक्षा वापस कर देनी चाहिए, उन्हें किसने रोका है।

राम कदम ने कहा कि उद्धव ठाकरे को हाथ जोड़कर मुंबई पुलिस से माफी मांगनी चाहिए। मुंबई पुलिस अपने घर-परिवार को छोड़कर दिन-रात लोगों की सेवा करती है। यदि वह माफी नहीं मांगते तो उन्हें स्वेच्छा से पुलिस सुरक्षा वापस कर देनी चाहिए।

शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत द्वारा गृह मंत्री अमित शाह को लेकर दिए गए बयान, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमित शाह ही असली लॉरेंस बिश्नोई हैं, पर भी राम कदम ने हमला बोला। उन्होंने कहा कि संजय राउत और उनके दल के इतने बड़े-बड़े कांड हैं कि वह दिन-रात प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नाम का जाप करते हैं। वह इतने भयभीत हैं कि सुबह, दोपहर, शाम उनका नाम लेते हैं। उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस तब तक पूरी नहीं होती जब तक वह उनका नाम न ले लें। नेशनल न्यूज में बने रहने के लिए उनका नाम लेना जरूरी हो गया है।

राम कदम ने कहा कि संजय राउत के बड़बोलेपन के कारण ही उनका दल समाप्त हो गया है और अब जो बचे-खुचे लोग हैं, वे भी ऑपरेशन टाइगर थ्री में चले जाएंगे। इसलिए न तो भाजपा उन्हें गंभीरता से लेती है और न ही उनके दल के लोग उन्हें गंभीरता से लेते हैं।

उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से देश की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत 11वें नंबर की आर्थिक महाशक्ति से चौथे नंबर पर पहुंच गया है और बहुत जल्द तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनने वाला है। ऐसे समय में दुश्मन देशों की फंडिंग पर हमारे ही देश के कुछ लोग अराजकता और खून-खराबा फैलाना चाहते हैं। वे भारत को उन देशों के साथ जोड़ना चाहते हैं जहां खून-खराबा हो रहा है। ऐसी विचारधारा से देश को बचना होगा। अगर देश एकजुट रहा तो बहुत जल्द दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बन जाएगा।

सीजेपी नेता सौरभ दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत को लेकर उन्होंने कहा कि कानून अपने प्रावधानों के आधार पर काम करता है, पद देखकर नहीं। अगर कोई जमानत की शर्तें तोड़ेगा और फिर न्याय व्यवस्था पर उंगली उठाएगा तो कानून के अनुसार ही कार्रवाई होगी। आंदोलन के लिए दूसरी जगह दी गई थी, फिर भी जानबूझकर उसी जगह पर आंदोलन करने की क्या जरूरत थी जहां मना किया गया था? क्या सिर्फ सुर्खियां बटोरनी थीं?

उन्होंने कहा कि जो लोग संविधान की बात करते हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि उसी संविधान के तहत न्याय व्यवस्था और पुलिस व्यवस्था है। उसकी बातों को तोड़ना क्या संविधान का अपमान नहीं है? अब क्या जेल की गर्मी चुभ रही है और पछतावा हो रहा है।

राम कदम ने आरोप लगाया कि जबरन आंदोलन करके लोगों को परेशान किया गया, यातायात प्रभावित हुआ। कनॉट प्लेस पर हुए आंदोलन से वहां के व्यापारियों का नुकसान हुआ। मुंबई में शिवाजी पार्क में आंदोलन के दौरान एक बुजुर्ग की मौत हो गई। देश में संविधान और कानून से ऊपर कोई नहीं है।

--आईएएनएस

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