लोकसभा: अमरावती बिल को लेकर वाईएसआरसीपी का वॉकआउट, बताया ‘निराशाजनक’
नई दिल्ली, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। लोकसभा में आंध्र प्रदेश की राजधानी के रूप में अमरावती को वैधानिक दर्जा देने वाले बिल पर चर्चा के दौरान वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने इसे “निराशाजनक” बताते हुए वॉकआउट किया।
वाईएसआरसीपी के नेता पी.वी. मिधुन रेड्डी ने स्पष्ट किया कि पार्टी अमरावती के खिलाफ नहीं है, लेकिन बिल के मौजूदा स्वरूप का विरोध कर रही है। उन्होंने कहा कि केवल राजधानी का नाम तय करने से कोई लाभ नहीं होगा, बल्कि सरकार को उन किसानों के हितों की रक्षा करनी चाहिए जिन्होंने राजधानी निर्माण के लिए अपनी जमीन दी है।
उन्होंने मांग की कि सरकार यह स्पष्ट करे कि राजधानी निर्माण पर कितना खर्च होगा, कितनी जमीन पर विकास होगा और इसकी समयसीमा क्या होगी। मिधुन रेड्डी ने आरोप लगाया कि 29,000 किसानों द्वारा दी गई 34,000 एकड़ जमीन के बदले अब तक उन्हें विकसित प्लॉट और अन्य वादे पूरे नहीं किए गए।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब सरकार के पास पहले से 54,000 एकड़ जमीन है तो और जमीन अधिग्रहण की क्या जरूरत है। उन्होंने अमरावती परियोजना में इनसाइडर ट्रेडिंग के आरोप भी दोहराए।
इससे पहले केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2026 पेश किया। इस विधेयक के जरिए आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2014 में संशोधन कर अमरावती को राज्य की एकमात्र और स्थायी राजधानी के रूप में मान्यता देने का प्रावधान है।
बहस की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सांसद बी. मणिकम टैगोर ने बिल का समर्थन करते हुए कहा कि किसी भी राज्य के विकास के लिए स्पष्टता जरूरी है और बिना स्पष्टता के निवेश नहीं आ सकता। उन्होंने अमरावती को विश्वस्तरीय राजधानी के रूप में विकसित करने की बात कही और केंद्र से आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग दोहराई।
ग्रामीण विकास राज्य मंत्री पी. चंद्रशेखर ने इसे राज्य के लिए ऐतिहासिक और भावनात्मक क्षण बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के दौरान तीन राजधानियों की नीति से राज्य के लोगों के बीच मतभेद पैदा किए गए। उन्होंने कहा कि अमरावती के किसानों और महिलाओं ने 1500 दिनों तक आंदोलन किया, जिसे इतिहास याद रखेगा।
भाजपा सांसद सी.एम. रमेश ने कहा कि संसद के इतिहास में पहली बार किसी क्षेत्र को राज्य की राजधानी के रूप में मान्यता देने के लिए बिल लाया गया है। उन्होंने इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण को दिया।
उन्होंने वाईएसआरसीपी पर आरोप लगाया कि उसने अपने शासनकाल में अमरावती को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया और कहा कि इस बिल के पारित होने के बाद भविष्य में कोई भी सरकार मनमाने ढंग से राजधानी नहीं बदल सकेगी।
--आईएएनएस
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