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दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है : विदेश मंत्री एस. जयशंकर

न्यूयॉर्क, 29 सितंबर (आईएएनएस)। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि दुनिया एक बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है। अमेरिका की बदलती नीतियों, चीन के साथ उसके संबंधों और व्यापार से जुड़ी पुरानी मान्यताओं के कमजोर होने के कारण सभी देश अपनी रणनीति में बदलाव कर रहे हैं।
 

न्यूयॉर्क, 29 सितंबर (आईएएनएस)। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि दुनिया एक बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है। अमेरिका की बदलती नीतियों, चीन के साथ उसके संबंधों और व्यापार से जुड़ी पुरानी मान्यताओं के कमजोर होने के कारण सभी देश अपनी रणनीति में बदलाव कर रहे हैं।

न्यूयॉर्क के एक कार्यक्रम में बोलते हुए एस जयशंकर ने कहा कि आज सभी सरकारें अपने जोखिम को कम करने, अपनी साझेदारियों में विविधता लाने और मौजूदा संबंधों से ज्यादा फायदा लेने के तरीके खोज रही हैं। उन्होंने इसे एक ज्यादा प्रतिस्पर्धी अंतरराष्ट्रीय माहौल के हिसाब से खुद को ढालने की प्रक्रिया बताया।

अमेरिका और चीन के रिश्तों पर चर्चा के बाद उन्होंने कहा, "बाकी की दुनिया अपने इंतजाम करने में व्यस्त है।"

विदेश मंत्री ने कहा कि पुराने अलायंस कमजोर हो रहे हैं और सबसे शक्तिशाली देश अकेले फैसले लेने की ओर ज्यादा बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया की दो सबसे बड़ी ताकतों के बीच नजदीकी बढ़ सकती है, लेकिन उनके बीच की प्रतिस्पर्धा की वजह से वे बाकी दुनिया के लिए ज्यादा कुछ तय नहीं कर पाएंगी।

उन्होंने कहा कि इस होड़ से बाहर के देश अपने समाधान खुद खोज रहे हैं। वे नए साझेदारों पर विचार कर रहे हैं, पुराने संबंधों को परख रहे हैं और खुद को किसी भी तरह की रुकावट से बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

एस जयशंकर ने आज की कूटनीति के केंद्र में मौजूद एक विरोधाभास का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक तरफ देशों के बीच प्रतिस्पर्धा है और दूसरी तरफ गहरी आर्थिक निर्भरता भी है। जब एक देश इस निर्भरता के जरिए बढ़त हासिल कर लेता है, तो उसे दूसरे के खिलाफ इस्तेमाल करने का लालच भी बढ़ जाता है।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, "कूटनीति अब एक बहुत जोखिम भरा खेल बन गई है।" उन्होंने कहा कि सरकारों को एक तरफ तो हाई-रिस्क फैसलों पर तुरंत प्रतिक्रिया देनी होती है और दूसरी तरफ लंबी बातचीत के लिए धैर्य भी रखना पड़ता है।

विदेश मंत्री ने भौगोलिक, वित्तीय, यात्रा और बाजार तक पहुंच से जुड़े 'चोक पॉइंट्स' को उदाहरण के तौर पर बताया, जिनके जरिए देश एक-दूसरे पर दबाव बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि व्यापार व्यवस्था की बुनियाद वाली मान्यताएं समय के साथ कमजोर हुई हैं, क्योंकि कई तरह की प्रथाएं बाजार के सिद्धांतों से अलग रही हैं।

एस जयशंकर ने कहा कि अमेरिका अब व्यापार को लेकर एक अलग रास्ता अपना रहा है, जिसमें अलग-अलग साझेदारों के साथ व्यक्तिगत डील की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इस बदलाव से नए समझौते और नए रिश्ते बन सकते हैं, हालांकि एक नया पैटर्न बनने में समय लगेगा।

भारत के बारे में उन्होंने कहा कि वह अमेरिका, यूरोप, जापान, चीन, रूस, खाड़ी देशों, आसियान और ग्लोबल साउथ के देशों के साथ अपने संबंधों में संतुलन बनाकर चलेगा। उन्होंने इस रणनीति को 'पोर्टफोलियो मैनेजमेंट' जैसा बताया।

उन्होंने कहा कि बड़े व्यापारिक देशों के पास भरोसेमंद साझेदार और स्थिर माहौल खोजने के मजबूत कारण हैं, भले ही किसी खास समझौते में तुरंत फायदा थोड़ा कम ही क्यों न मिले।

एस जयशंकर ने कहा, "मैं दुनिया को लेकर निराशावादी नहीं हूं।" उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रतिस्पर्धा और अनिश्चितता के इस दौर से गुजरते हुए देश नए समझौते करेंगे।

उन्होंने इस धारणा को भी खारिज किया कि अंतरराष्ट्रीय आर्थिक नियमों के कमजोर होने के पीछे अकेले अमेरिका है। भारत के विदेश मंत्री ने कहा कि बाजार से जुड़ी मान्यताएं पहले ही कमजोर हो चुकी थीं, जबकि मौजूदा अमेरिकी नीतियां देशों के आपस में बातचीत करने के तरीके को बदल रही हैं।

--आईएएनएस

वीकेयू/एएस