100 दिन पूरे होने पर उपलब्धियां गिनाएगी पश्चिम बंगाल सरकार, सीमा सुरक्षा और बुनियादी ढांचे पर रहेगा जोर
कोलकाता, 17 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार मंगलवार को सत्ता में अपने पहले 100 दिन पूरे करने जा रही है। इस दौरान नई राज्य सरकार द्वारा किए गए कामों को विस्तार से बताने के लिए राज्य प्रशासन में जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं।
नबन्ना स्थित राज्य सचिवालय के सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार जिस पहली उपलब्धि को उजागर करेगी, वह है राज्य के विभिन्न जिलों में पड़ोसी देश बांग्लादेश के साथ बिना बाड़ वाली सीमाओं पर कंटीले तारों की बाड़ लगाने के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को जमीन सौंपने की प्रक्रिया का लगभग पूरा हो जाना।
राज्य के भूमि और भूमि राजस्व विभाग (जो मुख्यमंत्री के नियंत्रण में है) के आंकड़ों के अनुसार, सीमावर्ती नौ जिलों में 767 एकड़ से ज्यादा जमीन पहले ही बीएसएफ को सौंपी जा चुकी है।
इसके अलावा, राज्य कैबिनेट ने लगभग 362 एकड़ जमीन के ट्रांसफर को मंजूरी दे दी है। नतीजतन, बीएसएफ को दी गई जमीन का कुल रकबा 1,100 एकड़ से ज्यादा हो गया है।
इसके अलावा, सीमा सुरक्षा के लिए दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार जिलों में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) को 44 एकड़ से ज़्यादा जमीन दी गई है और दार्जिलिंग में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) बटालियन मुख्यालय को 110 एकड़ जमीन दी गई है।
राज्य सचिवालय के सूत्रों ने बताया कि दूसरी मुख्य बात अलग-अलग इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स जैसे कि सेवक-रंगपो ब्रॉड गेज रेल प्रोजेक्ट, पश्चिम मेदिनीपुर जिले में 100 बिस्तरों वाला ईएसआई अस्पताल और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, सरकारी गोदामों और बिजली सब-स्टेशनों के लिए तेजी से जमीन उपलब्ध करानी होगी।
तीसरी मुख्य बात राज्य में बंद पड़ी 16 जूट मिलों को पहले 100 दिनों के दौरान फिर से खोलना होगा।
इसके बाद राज्य में अलग-अलग प्रोजेक्ट्स के लिए रखी गई आधारशिलाओं की जानकारी दी जाएगी। साथ ही उनमें किए गए निवेश और उनसे मिलने वाले संभावित रोजगार के बारे में भी बताया जाएगा।
राज्य सरकार सरकारी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा की सुविधा को बड़े पैमाने पर प्रचारित करने और हर रूट पर सार्वजनिक बसों की संख्या बढ़ाने की भी योजना बना रही है।
चुनाव में किए गए वादे के मुताबिक, नई राज्य सरकार ने 'अन्नपूर्णा योजना' भी शुरू की है। वादे के अनुसार, अब महिलाओं को इस योजना के तहत 3,000 रुपए मिल रहे हैं, जो पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के समय 'लक्ष्मी भंडार' योजना के तहत मिलने वाले 1,500 रुपए से दोगुनी रकम है।
हालांकि, इस बात की आलोचना हो रही है कि अयोग्य लोगों को हटाने के लिए अपनाई गई गहन जांच प्रक्रिया के कारण कई वास्तविक लाभार्थी इस योजना से छूट गए हैं।
राज्य सरकार और सत्ताधारी पार्टी ने भरोसा दिलाया है कि सरकार ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि जो लोग सही हकदार हैं। जिन्हें अभी तक अन्नपूर्णा योजना का लाभ नहीं मिला है, उन्हें जल्द से जल्द मिल सके।
अगली अहम बात राज्य को 'आयुष्मान भारत' जैसी अलग-अलग केंद्र-प्रायोजित योजनाओं से जोड़ना होगी। पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के समय इसकी इजाजत नहीं थी, क्योंकि ममता बनर्जी सरकार की अपनी स्वास्थ्य योजना चल रही थी।
जो लोग आयुष्मान भारत के लिए पात्र नहीं हैं, उन्हें अब मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत कवर किया जाएगा।
आखिर में सरकार राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए अपनी अलग-अलग पहलों को उजागर करेगी। इसमें हाल ही में लाए गए 'पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा और असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण विधेयक, 2026' को पारित करना भी शामिल है, जिसका मकसद राज्य में उपद्रवी गतिविधियों और भ्रष्टाचार को रोकना है।
--आईएएनएस
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