एआई और रोबोटिक्स से बदलेगी खेती की तस्वीर, एसकेयूएएसटी सम्मेलन में बोले एलजी मनोज सिन्हा
श्रीनगर, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार को कहा कि देश को खाद्य सुरक्षा से आगे बढ़कर कृषि के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ना होगा।
उप राज्यपाल सिन्हा ने शालीमार स्थित एसकेयूएएसटी-कश्मीर में इंडियन सोसायटी ऑफ एग्रीकल्चरल इंजीनियर्स (आईएसएई) के 60वें सालाना डायमंड जुबली सम्मेलन को संबोधित किया।
5 से 7 अक्टूबर तक आयोजित हो रहे इस सम्मेलन का विषय 'स्मार्ट खेती में महिलाओं के नेतृत्व वाले इंजीनियरिंग इनोवेशन' और 'जेन-जी खेती के लिए एआई और रोबोटिक्स' है। इसके साथ ही स्मार्ट खेती पर एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी भी आयोजित की जा रही है।
उपराज्यपाल ने कहा कि ये विषय खाद्य सुरक्षा से आगे बढ़कर कृषि में वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ने के संकल्प को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों की रीढ़ हैं और इनोवेशन में उनका नेतृत्व एक टिकाऊ भविष्य का निर्माण करेगा।
उन्होंने छोटे और सीमांत किसानों को सुलभ तकनीक, एआई और रोबोटिक्स से सशक्त बनाने के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया, ताकि जेन-जी किसानों के लिए खेती को स्मार्ट, टिकाऊ और मुनाफे वाला बनाया जा सके।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, जम्मू-कश्मीर ने खेती के समग्र विकास में बड़ी प्रगति की है और एसकेयूएएसटी-कश्मीर खेती से जुड़े इनोवेशन के क्षेत्र में एक प्रमुख संस्थान के रूप में उभरा है।
इस कार्यक्रम में एसकेयूएएसटी-कश्मीर के वाइस चांसलर, आईएसएई के पदाधिकारी, वैज्ञानिक, छात्र और देशभर से आए किसान शामिल हुए। भारत टेक्नोलॉजी पर आधारित खेती को बढ़ावा देकर, खेती से जुड़े एक्सपोर्ट का विस्तार करके और अंतरराष्ट्रीय पॉलिसी गठबंधनों का नेतृत्व करके खेती के क्षेत्र में खुद को एक ग्लोबल लीडर के तौर पर स्थापित कर रहा है।
'इंदौर घोषणा' को अपनाने के बाद भारत ने बीज अधिकारों और डिजिटल खेती से जुड़ी अहम ब्रिक्स पहलों का नेतृत्व किया। साथ ही, मिट्टी की गुणवत्ता खराब होने और मरुस्थलीकरण की समस्या से निपटने के लिए 'ब्रिक्स लैंड रेस्टोरेशन पार्टनरशिप' की शुरुआत की।
2 ,500 से ज्यादा एग-टेक स्टार्टअप्स के सहयोग से भारत छोटे किसानों की खेती को आधुनिक बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्पेस एप्लिकेशन, प्रिसिजन फार्मिंग और ड्रोन टेक्नोलॉजी (जैसे 'नमो ड्रोन दीदी') को अपना रहा है।
भारत दालों, मोटे अनाजों, सूखे प्याज, नारियल और मसालों के उत्पादन में दुनिया में पहले स्थान पर है और चावल, गेहूं, फलों, सब्ज़ियों, गन्ने, कपास और चाय के उत्पादन में दूसरे स्थान पर है।
खेती और प्रोसेस्ड फूड के एक्सपोर्ट में काफी बढ़ोतरी हुई है और वित्त वर्ष-25 में यह 51.1 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जिसमें प्रोसेस्ड फूड की हिस्सेदारी 20.4 प्रतिशत है।
नेचुरल फार्मिंग पर नेशनल मिशन, सॉइल हेल्थ कार्ड, पीएम-कुसुम (सोलर-पावर्ड फॉर्म पंप) और नैनो फर्टिलाइजर (नैनो-यूरिया और नैनो-डीएपी) जैसी पहलें टिकाऊ और कम-एमिशन वाले विकास पर जोर देती हैं।
2026-27 के यूनियन बजट में कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के लिए 1.45 लाख करोड़ रुपए (1,45,429 करोड़ डॉलर) आवंटित किए गए हैं। इसे ई-नॉम (जो 1,656 मंडियों में 1.8 करोड़ किसानों को जोड़ता है) और एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड जैसे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का भी सहयोग मिला है।
--आईएएनएस
एएसएच/वीसी
