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लोकसभा में 'एंटी-पेपर लीक' बिल पर चर्चा शुरू, किरेन रिजिजू बोले-हम 10 घंटे चर्चा करने के लिए तैयार

नई दिल्ली, 28 जुलाई (आईएएनएस)। संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को दो बजे के बाद लोकसभा की कार्यवाही फिर से शुरू हुई। 'एंटी-पेपर लीक' बिल पर चर्चा के लिए पहले छह घंटे का समय तय किया गया था। विपक्ष ने समय को बढ़ाने की मांग की, जिस पर किरेन रिजिजू ने कहा, "हम 10 घंटे चर्चा करने के लिए तैयार हैं।" लोकसभा अध्यक्ष ने सदन की सहमति लेकर 10 घंटे चर्चा करने का ऐलान कर दिया है।
 

नई दिल्ली, 28 जुलाई (आईएएनएस)। संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को दो बजे के बाद लोकसभा की कार्यवाही फिर से शुरू हुई। 'एंटी-पेपर लीक' बिल पर चर्चा के लिए पहले छह घंटे का समय तय किया गया था। विपक्ष ने समय को बढ़ाने की मांग की, जिस पर किरेन रिजिजू ने कहा, "हम 10 घंटे चर्चा करने के लिए तैयार हैं।" लोकसभा अध्यक्ष ने सदन की सहमति लेकर 10 घंटे चर्चा करने का ऐलान कर दिया है।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि हम सभी के लिए यह महत्वपूर्ण है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों बिल पर चर्चा करने के लिए सहमत हो गए हैं। उन्होंने कहा कि इस बिल का उद्देश्य लोक परीक्षाओं को और अधिक शुचितापूर्ण बनाना है। परीक्षा प्रणाली की विशिष्टता और पारदर्शिता राष्ट्रहित का महत्वपूर्ण विषय है। पूरा देश चाहता है कि सभी सदस्य अपने विचार रखें, जिससे एक बेहतर कानून बनाया जा सके। जितना बेहतर कानून बनाया जाएगा, हम परीक्षा प्रणाली को उतना ही शुचितापूर्ण बना सकते हैं।

जैसे ही बिल पर चर्चा के लिए कार्यवाही शुरू हुई, कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के "एक बहुत जरूरी" बिल पर चर्चा के दौरान सदन में मौजूद नहीं होने पर ऐतराज जताया। विपक्ष ने भी चर्चा का समय बढ़ाने की मांग की।

केंद्रीय संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने साफ किया कि सरकार को बहस का समय 10 घंटे तक बढ़ाने पर कोई ऐतराज नहीं है।

रिजिजू ने कहा, "सभी पॉलिटिकल पार्टियां पहले 'एंटी-पेपर लीक बिल' पर छह घंटे की चर्चा के लिए सहमत हुई थीं, फिर इसे बढ़ाकर आठ घंटे कर दिया गया। अब, अगर विपक्ष और समय चाहता है, तो हम इसे 10 घंटे तक करने को तैयार हैं।"

'एंटी-पेपर लीक' बिल को सोमवार को कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में पेश किया था। प्रस्तावित अमेंडमेंट का मकसद सख्त कानूनी नियमों के जरिए एग्जामिनेशन सिस्टम में ट्रांसपेरेंसी और ईमानदारी बढ़ाना है, साथ ही यह पक्का करना है कि छात्रों का भविष्य पूरी तरह सुरक्षित रहे। इसकी खास बातों में कड़ी सजाएं शामिल हैं, जिनमें 10 साल तक की जेल, 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना, दोषी पाए जाने वालों की संपत्ति जब्त करना और तीन माह के अंदर फैसला सुनाने के लिए एक सिस्टम बनाना शामिल है।

--आईएएनएस

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