आपदा प्रभावित नेपाल में राहत सामग्री भेजने पर आईएएफ अधिकारी ने बताया, 'हम ऐसे कामों के लिए हमेशा तैयार हैं'
गाजियाबाद, 27 अगस्त (आईएएनएस)। भारत ने गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस से बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित नेपाल में लगभग 40 टन मानवीय सहायता सामग्री, दवाएं और खाने के पैकेट भेजे। इस काम की देखरेख कर रहे भारतीय वायु सेना के अधिकारियों ने कहा कि वायु सेना और एयरबेस ऐसे राहत कार्यों को करने के लिए 'हमेशा तैयार' रहते हैं।
इससे एक दिन पहले, हिमालयी देश में अचानक आई भयानक बाढ़ के बाद भारत ने 10 टन मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) सामग्री और जरूरी दवाएं नेपाल भेजी थीं।
हिंडन एयरफोर्स स्टेशन के एओसी एयर कमोडोर राजीव डोभाल ने आईएएनएस बात करते हुए कहा, "हम ऐसे कामों के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। हमें इसके लिए पहले ही जिम्मेदारी दी जा चुकी है। हम सभी के पास इसका अनुभव भी है। हमने पहले भी कई बार ऐसा किया है। न सिर्फ नेपाल, म्यांमार, श्रीलंका में, बल्कि वेनेजुएला में भी। इसलिए, हम ऐसे कामों के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। जैसे ही हमें जानकारी मिली, हमने अपना काम शुरू कर दिया।"
चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर ग्रुप कैप्टन जय गणेश ने कहा, "जब एचएडीआर ऑपरेशन की बात आती है, तो मैं हिंडन को सबसे आगे रहने वाला मानता हूं। जब नेपाल में बाढ़ आई, तो हमें जानकारी मिली कि बाढ़ राहत सामग्री हमारे बेस से एयरलिफ्ट करनी होगी। हम आम तौर पर ऐसी आपात स्थितियों के लिए तैयार रहते हैं और हमारी तैयारी अच्छी होती है। हिंडन का सिस्टम इस तरह से विकसित किया गया है कि हम ऐसी आपात स्थितियों को बहुत प्रभावी ढंग से संभाल सकें। इसलिए, जब हमें दोपहर में जानकारी मिली, तो हमने सी-130 और सी-17 विमानों को स्टैंडबाय पर रखा।"
उन्होंने कहा, "सबसे पहले मदद पहुंचाने के लिए, सी-130 विमान ने बुधवार की रात करीब 8:30 बजे उड़ान भरी।"
इस बीच, विमान के कमांडर विंग कमांडर लग्नजीत नायक ने दूसरी खेप के बारे में कहा, "बुधवार यानी 26 अगस्त को हमें नेपाल एचएडीआर (मानवीय सहायता और आपदा राहत) मिशन के लिए जानकारी मिली। रात में हमें एनडीआरएफ का सामान और मेडिकल सप्लाई मिली। नेपाल पहुंचने में लगभग 1 घंटा 15 मिनट लगेंगे। हम लगभग 35 से 40 टन सामान ले जा रहे हैं, जिसमें मेडिकल राहत का सामान, डिग्निटी किट और नेपाल के लिए अन्य जरूरी चीजें शामिल हैं।"
उन्होंने बताया कि नेपाल में कम ऊंचाई पर बादल छाए हुए हैं और वहां के सिविल ट्रैफिक व अन्य हालात को देखते हुए विमान में पर्याप्त ईंधन भरा गया है, ताकि अगर हम पहली बार में लैंड न कर पाएं, तो हवा में ही लगभग एक से डेढ़ घंटे तक इंतजार कर सकें।
उन्होंने कहा, "अगर देरी अनिश्चित हो या ज्यादा समय लग जाए, तो हमारे पास भारत में डायवर्जन (दूसरे एयरपोर्ट पर जाने) के लिए पर्याप्त विकल्प हैं। हमने दो बेस तय किए हैं जहां हम जा सकते हैं, दोबारा ईंधन भर सकते हैं और जब भी वहां से मंजूरी मिले, नेपाल के लिए आगे बढ़ सकते हैं।"
विंग कमांडर नायक ने बताया कि विमान में उतना ही सामान ले जाया जा रहा है, जिसे काठमांडू एयरपोर्ट संभाल सके। विमान की क्षमता 70 टन है, लेकिन हम 40 टन सामान ले जा रहे हैं ताकि हम तीन से चार घंटे के भीतर वापसी की उड़ान भर सकें और काठमांडू एयरफील्ड को खाली कर सकें।
--आईएएनएस
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