तमिलनाडु: तंजावुर में पानी की कमी से सांबा धान की फसल बर्बाद, किसानों ने मांगा मुआवजा
तंजावुर, 11 अक्टूबर (आईएएनएस)। तमिलनाडु के तंजावुर जिले में किसानों ने अपनी सूख चुकी सांबा धान की फसलों को वापस मिट्टी में जोतना शुरू कर दिया है। मेलात्तूर के आसपास सिंचाई की भारी कमी से खेती पर संकट मंडरा रहा है, जिससे विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं और मुआवजे की मांग की जा रही है।
मेलट्टूर के पास रंगनाथपुरम और आसपास के इलाकों में लगभग 1,000 एकड़ जमीन पर सांबा धान की खेती होती है। किसानों का कहना है कि पानी की कमी के कारण खड़ी फसलें सूख गईं हैं, इसलिए फसलों को ट्रैक्टर से नष्ट करने और खेतों की दोबारा जुताई करने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है।
प्रभावित किसानों ने विरोध प्रदर्शन करने के लिए अपने खेतों में इकट्ठा होकर अधिकारियों से नुकसान का आकलन करने और उचित मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो उनका किसान संगठन जिला कलेक्टर के कार्यालय का घेराव करेगा।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, मेट्टूर जलाशय में पानी का पर्याप्त भंडारण न होने से सिंचाई के लिए पानी की आपूर्ति बाधित हुई। उन्होंने कहा कि बांध से 81 दिनों के अंतराल के बाद ही पानी छोड़ा गया जबकि कावेरी डेल्टा के कई हिस्सों में सांबा धान की फसल पानी की कमी से जूझती रही।
किसानों ने बताया कि भूजल से भी उन्हें कोई खास राहत नहीं मिली। पंप सेट से निकाला गया पानी खारा था और फसलों की सिंचाई के लिए उपयुक्त नहीं था, इसलिए वे नहर के पानी की जगह इसका इस्तेमाल नहीं कर सके। उन्होंने आरोप लगाया कि पानी की कमी के कारण मेलट्टूर, रंगनाथपुरम, विलिथियूर, अन्नाप्पनपेट्टई और आसपास के इलाकों में हजारों एकड़ सांबा धान की फसल बर्बाद हो गई।
फसलों के पूरी तरह सूख जाने के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है और अब वे प्रभावित खेतों को साफ करने और दोबारा जुताई करने पर और अधिक खर्च कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी शिकायत की कि न तो कृषि मंत्री और न ही अधिकारियों ने नुकसान का जायजा लेने के लिए उनके खेतों का दौरा किया। उन्होंने मांग की कि संबंधित विभाग प्रभावित धान की जांच करने, फसल के नुकसान का आकलन करने और उचित मुआवजे की व्यवस्था करने के लिए टीमें भेजें।
इस विरोध-प्रदर्शन ने तंजावुर जिले के इस हिस्से में सांबा धान उगाने वाले किसानों की परेशानी की ओर ध्यान आकर्षित किया है। किसानों ने कहा कि नुकसान के स्तर का पता लगाने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि प्रभावित किसानों को समय पर आर्थिक मदद मिले, आधिकारिक आकलन की तत्काल आवश्यकता है।
उन्होंने दोहराया कि यदि अधिकारी क्षतिग्रस्त फसलों का निरीक्षण करने और मुआवजे की उनकी मांग पर कोई कार्रवाई करने में विफल रहते हैं, तो वे कलेक्टर कार्यालय का घेराव करेंगे।
--आईएएनएस
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