एनसीपी के विलय की बातचीत की जानकारी थी, लेकिन अजित पवार के निधन के बाद संदर्भ बदल गया: सुनील तटकरे
मुंबई, 31 मार्च (आईएएनएस)। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के अध्यक्ष और सांसद सुनील तटकरे ने मंगलवार को पार्टी के शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी में संभावित विलय को लेकर चल रही अफवाहों पर बात की। उन्होंने यह साफ किया कि उन्हें इन चर्चाओं की जानकारी तो थी, लेकिन अजित पवार के निधन के बाद अब पूरा संदर्भ ही बदल गया है।
एक मराठी चैनल को दिए इंटरव्यू में तटकरे ने कहा कि अजित पवार की मौत से पहले एनसीपी के दोनों गुटों का विलय अपने आखिरी दौर में था। उन्होंने कुछ नेताओं के समय को लेकर आलोचना की, जिन्होंने विलय के बारे में इंटरव्यू तब दिए, जब अजित पवार का पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए रखा था।
उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि मैं विलय के खिलाफ था। मुझे उस समय चल रही सभी गतिविधियों की पूरी जानकारी थी। अजित पवार के जीवित रहते हुए विलय होना और उनके निधन के बाद विलय होना, इन दोनों बातों में बहुत बड़ा अंतर है। उन्होंने आगे कहा कि पूरा माहौल ही बदल गया। जहां कुछ लोग दावा कर रहे थे कि विलय अपने आखिरी दौर में है। वहीं, उन बातचीत के दौरान किसी ने भी सुनेत्रा पवार को नेता बनाने का सुझाव नहीं दिया था।
पार्टी के मौजूदा रुख को दोहराते हुए तटकरे ने इस तरह के कदम की व्यावहारिकता पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कौन सी पार्टी किस पार्टी में विलय कर रही है? हम इस समय राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ हैं और भारतीय जनता पार्टी के साथ खड़े हैं।
तटकरे ने आगे कहा कि शोक के शुरुआती दिनों में उन्होंने खुद को शांत रखने के लिए चुप रहना ही बेहतर समझा, भले ही उस समय तथाकथित वीडियो और इंटरव्यू के जरिए राजनीतिक बातें गढ़ी जा रही थीं। इंटरव्यू के दौरान, तटकरे ने कांग्रेस से एनसीपी तक के अपने सफर, दिवंगत अजित पवार के साथ अपनी गहरी दोस्ती, और उनकी गैर-मौजूदगी में पार्टी का नेतृत्व करने के मुश्किल काम के बारे में विस्तार से बताया।
उन्होंने कहा कि अजित पवार को खोना सिर्फ एक राजनीतिक नुकसान नहीं था, बल्कि यह उनके लिए एक बहुत ही निजी और गहरा सदमा था। उन्होंने बताया कि 1999 से लेकर अब तक उन्होंने 22 जुलाई को पवार का जन्मदिन मनाना कभी नहीं छोड़ा था।
अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाला 22 जुलाई, 2026, मेरे लिए बेहद तकलीफदेह होगा। यह सोचकर ही दिल बैठ जाता है कि अजित दादा अब हमारे बीच नहीं हैं, जिन्हें हम जन्मदिन की बधाई दे सकें। उनकी गैर-मौजूदगी को स्वीकार करना ही मेरे दिल के लिए सबसे पहली और सबसे बड़ी चुनौती थी।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अभी सबसे पहली प्राथमिकता अजित पवार के विजन को पूरी दृढ़ता के साथ आगे बढ़ाना है। नेतृत्व के सवाल पर बात करते हुए तटकरे ने बताया कि पार्टी ने उत्तराधिकार के मामले में एक सामूहिक फैसला लिया है।
उन्होंने कहा कि सवाल यह था कि अजित दादा के बाद पार्टी का क्या होगा? हालांकि, उनका गुजर जाना एक ऐसी दुखद घटना है जिसे भुलाया नहीं जा सकता, लेकिन उनकी जगह किसी और को लेनी ही थी। अजित दादा के साथ उनके लंबे समय के सहयोग और साझेदारी को देखते हुए हम सभी ने मिलकर यह महसूस किया कि सुनेत्रा पवार (वहिनी) ही उनकी उत्तराधिकारी होनी चाहिए।
उन्होंने साफ किया कि यह एक सामूहिक फैसला था जिसमें प्रफुल्ल पटेल, हसन मुशरिफ, धनंजय मुंडे और छगन भुजबल जैसे वरिष्ठ नेता शामिल थे और इसमें मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेतृत्व से जरूरी मंजूरी लेना भी शामिल था।
--आईएएनएस
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