वाईएसआरसीपी को हिंसा के जरिए निकाय चुनावों से बाहर नहीं किया जा सकता : सज्जाला रेड्डी
ताडेपल्ली, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के राज्य समन्वयक सज्जाला रामकृष्ण रेड्डी ने मंगलवार को कहा कि हमलों, डराने-धमकाने और आपराधिक मामलों के जरिए पार्टी को स्थानीय निकाय चुनावों से बाहर नहीं किया जा सकता।
उन्होंने पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में मीडिया से बात करते हुए पुलिवेंदुला में पुलिस फायरिंग की जांच हाई कोर्ट के किसी मौजूदा जज से कराने की मांग की। उन्होंने बताया कि जब विपक्षी उम्मीदवार नगर निकाय चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने की कोशिश कर रहे थे, तब पुलिस अधिकारियों ने बिना किसी उकसावे के फायरिंग कर दी।
सज्जाला ने कहा कि टीडीपी सरकार नामांकन दाखिल करने से रोक रही है, उम्मीदवारों को नाम वापस लेने के लिए मजबूर कर रही है और नामांकन रद्द करवा रही है, ताकि बाद में 'निर्विरोध जीत' का जश्न मना सके।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और उनका मीडिया इस तरह बाहर किए जाने को 'जनसमर्थन' के रूप में पेश कर रहे हैं, जबकि सत्ताधारी दल के समूहों द्वारा की गई हिंसा का दोष वाईएसआरसीपी पर मढ़ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस टीडीपी कार्यकर्ताओं से भी आगे बढ़कर सीधे उम्मीदवारों पर हमला कर रही है और उनके काम में बाधा डाल रही है।
सज्जाला ने बताया कि मंत्री लोकेश के मंगलगिरी निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत दुग्गीराला में, वरिष्ठ दलित नेता राजायाह के खिलाफ 'प्रिवेंटिव डिटेंशन एक्ट' का इस्तेमाल किया गया, ताकि वे आगामी एमपीपी चुनाव में हिस्सा न ले सकें। जाति प्रमाण पत्र और 'नो-ड्यूज' सर्टिफिकेट जारी करने में देरी की जा रही थी, और नामांकन दाखिल करने के बाद भी उम्मीदवारों को धमकियां दी जा रही थीं। तिरुपति में, उम्मीदवार जेबी श्रीनिवास को उनके घर पर जन सेना के एक उम्मीदवार के पति ने धमकी दी।
उन्होंने दावा किया कि कडप्पा में पुलिस ने लगभग 40-50 संभावित उम्मीदवारों को रोक दिया, जबकि 10-12 नामांकन खारिज कर दिए गए। सोमवार रात मेयर पद के उम्मीदवार के घर पर हमला किया गया ताकि वे अपना नामांकन वापस ले लें, वहीं डिप्टी मेयर नित्यानंद रेड्डी के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया।
सज्जाला ने बताया कि पुलिवेंदुला में हत्या के प्रयास के दो मामलों में उम्मीदवार राघवा रेड्डी और अन्य लोगों को नामजद किया गया है। इसके अलावा, जमीनी स्तर के 921 नेताओं पर ऐसे मामले दर्ज किए गए हैं, जिनका मकसद उन्हें नगर निकाय, एमपीटीसी और जेडपीटीसी चुनावों से दूर रखना है।
उन्होंने इन घटनाओं को महज सामान्य झड़पें मानने से इनकार कर दिया, जिनमें पुलिस के दखल की जरूरत पड़ी हो। उन्होंने कहा कि पुलिवेंदुला में पुलिस ने खुद नामांकन प्रक्रिया में बाधा डाली, उम्मीदवारों पर हमले किए और हवा में गोलियां चलाईं, जबकि वे टीडीपी समूहों को बचा रहे थे। इस तरह की सुनियोजित डराने-धमकाने की कार्रवाई की न्यायिक जांच होनी चाहिए और राज्य चुनाव आयोग को तुरंत दखल देना चाहिए।
--आईएएनएस
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