टीवीके नेता विजय ने प्रस्तावित परिसीमन बिल का विरोध किया, दक्षिणी राज्यों पर इसके असर की चेतावनी दी
चेन्नई, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) के नेता विजय ने बुधवार को केंद्र सरकार के प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन पर चिंता जताई।
विजय ने चेतावनी दी कि इससे दक्षिणी राज्यों, खासकर तमिलनाडु को भारी नुकसान हो सकता है। इस संशोधन का मकसद संसदीय प्रतिनिधित्व का पुनर्गठन करना है।
विजय ने एक बयान में प्रस्तावित संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 का जिक्र किया। इस विधेयक का मकसद लोकसभा में सदस्यों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 करना है। उम्मीद है कि गुरुवार से शुरू हो रहे संसद के विशेष सत्र में इस पर चर्चा होगी।
उन्होंने संसद में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले लंबे समय से लंबित कानून का स्वागत करते हुए चेतावनी दी कि महिलाओं के लिए आरक्षण वाले बिल के मुकाबले परिसीमन से जुड़े संशोधन को प्राथमिकता नहीं दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर यह संशोधन बिना उचित सुरक्षा उपायों के पारित हो जाता है तो इससे उत्तरी और दक्षिणी राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व में आनुपातिक अंतर और बढ़ सकता है।
विजय के मुताबिक, इस तरह के बदलाव से उन दक्षिणी राज्यों का संसदीय प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण उपायों को प्रभावी ढंग से लागू किया है, जबकि अधिक आबादी वाले उत्तरी राज्यों का प्रभाव बढ़ जाएगा।
उन्होंने तर्क दिया कि इसके नीति-निर्माण, विधायी प्राथमिकताओं और संघीय सत्ता के संतुलन पर दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।
टीवीके के नेता विजय ने चेतावनी दी कि अगर दक्षिणी राज्यों की आवाज कमजोर पड़ती है तो संसद में भाषा, संस्कृति और राज्यों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर कम ध्यान दिया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु जैसे राज्यों के लोगों की चिंताओं और आकांक्षाओं को शायद अब संसद में ठीक से न सुना जाए। विजय ने इस कदम को संभावित रूप से भेदभावपूर्ण बताया।
टीवीके नेता ने यह भी आरोप लगाया कि प्रस्तावित बदलावों का असर केंद्रीय निधियों के आवंटन पर भी पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि संसदीय सीटों के वितरण में बदलाव से राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों के बंटवारे का आधार बदल सकता है, जिससे तमिलनाडु जैसे राज्यों को मिलने वाले आवंटन में कमी आ सकती है।
उन्होंने बताया कि तमिलनाडु सरकार ने केंद्रीय बजट पेश होने के दौरान अपर्याप्त केंद्रीय वित्तपोषण और परियोजनाओं के लिए सीमित आवंटन को लेकर पहले भी चिंता जताई है।
उन्होंने चेतावनी दी कि परिसीमन के बाद जनसंख्या के आधार पर होने वाले पुनर्वितरण से वित्तीय सहायता में और भी कमी आ सकती है।
विजय ने केंद्र से अपने दृष्टिकोण पर पुनर्विचार करने का आग्रह करते हुए मौजूदा व्यवस्था को जारी रखने की मांग की और प्रस्तावित संशोधन को वापस लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों ने राष्ट्रीय नीतियों का पालन किया है, उन्हें 'दंडित' नहीं किया जाना चाहिए, जबकि दूसरों को 'पुरस्कृत' किया जाए।
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