एनडीए ने सीईसी को हटाने के विपक्ष के कदम की आलोचना की, चुनावी हार से उपजी हताशा बताया
नई दिल्ली, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) के नेताओं ने शनिवार को विपक्षी पार्टियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि चूंकि वे चुनावों के दौरान वोट हासिल करने में नाकाम रहते हैं, इसलिए अब वे अपनी हताशा 'चुनाव आयोग पर निकाल रहे हैं।'
ये प्रतिक्रियाएं तब आईं जब राज्यसभा के 73 विपक्षी सदस्यों ने महासचिव को एक प्रस्ताव का नोटिस सौंपा, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की गई थी।
भारत के राष्ट्रपति को संबोधित इस प्रस्ताव में सीईसी पर 15 मार्च, 2026 के बाद से किए गए कार्यों और चूकों के माध्यम से 'सिद्ध दुर्व्यवहार' का आरोप लगाया गया है।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने कहा कि चूंकि लोग चुनावों के दौरान विपक्षी पार्टियों को वोट नहीं देते, इसलिए वे अपना 'गुस्सा' चुनाव आयोग पर निकाल रहे हैं।
उन्होंने कहा, "वे अपने ही कार्यों के कारण चुनाव हारते हैं और जनता से जुड़ने में असमर्थ रहते हैं।"
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि इस तरह की 'कीचड़ उछालने' वाली हरकतें संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करती हैं।
पिछले चुनावी नतीजों का ज़िक्र करते हुए, जिनमें विपक्ष ने कई राज्यों में भाजपा को हराया था, उन्होंने कहा, "'आप' ने दिल्ली और पंजाब में भाजपा को हराया था। तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में, कांग्रेस ने कर्नाटक में और वाम गठबंधन ने केरल में सरकार बनाई थी। इन सभी मौकों पर विपक्ष को चुनाव आयोग से कोई दिक्कत नहीं थी।"
पटेल ने जोर देकर कहा कि जब तक विपक्ष जीत रहा होता है, तब तक ईसी उन्हें स्वीकार्य होता है; वरना, यह 'अंगूर खट्टे हैं' वाली बात है।
इसी तरह का विचार व्यक्त करते हुए, पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता अश्विनी कुमार चौबे ने कहा, "जब भी विपक्ष चुनाव हारता है, तो वे ईसी पर पक्षपाती और अनुचित होने का आरोप लगाने लगते हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "संस्था के खिलाफ ऐसे आरोप बेबुनियाद हैं।"
भाजपा नेता रोहन गुप्ता ने आईएएनएस से कहा, "यह विपक्ष का असली चेहरा है।"
इस कदम के पीछे विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, "क्या वे चाहते हैं कि चुनावों के दौरान हिंसा हो? यह पहली बार है कि पश्चिम बंगाल में चुनावों से पहले हिंसा नहीं हुई। साथ ही, आजादी के बाद यह पहली बार है कि इतनी बड़ी संख्या में मतदान हुआ है।"
गुप्ता ने उस आधार पर सवाल उठाया जिस पर विपक्ष सीईसी को हटाने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने कहा, "अगर विपक्षी पार्टियाँ इन घटनाक्रमों को उपलब्धि नहीं मानतीं, तो क्या वे चाहती हैं कि चुनाव बिना शांति के हों? अगर वे इतनी सफल चुनावी प्रक्रिया के संचालन का विरोध करते हैं, तो जनता उन्हें माफ नहीं करेगी।"
जदयू नेता साकेत सिंह ने कहा कि चूंकि विपक्ष के पास अब कोई विकल्प नहीं बचा है, इसलिए 'वे मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।'
--आईएएनएस
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