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पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने युवाओं से कृषि पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया

हैदराबाद, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने युवाओं से कृषि पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान करते हुए कहा कि कृषि देश की रीढ़ है।
 
पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने युवाओं से कृषि पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया

हैदराबाद, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने युवाओं से कृषि पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान करते हुए कहा कि कृषि देश की रीढ़ है।

उन्होंने युवाओं से इस महत्वपूर्ण क्षेत्र पर ध्यान देने का आग्रह किया और इस बात पर जोर दिया कि अनुसंधान और वैज्ञानिक प्रगति को प्रयोगशालाओं तक सीमित रहने के बजाय खेतों में किसानों तक पहुंचना चाहिए।

पूर्व उपराष्ट्रपति शनिवार रात यहां आयोजित एक कार्यक्रम में एमएस स्वामीनाथन पुरस्कार प्रदान करते हुए बोल रहे थे।

पर्यावरण संबंधी चिंताओं को उजागर करते हुए पूर्व उपराष्ट्रपति ने रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग के खिलाफ चेतावनी दी और मृदा संरक्षण तथा प्रकृति और पशुधन की सुरक्षा के महत्व पर बल दिया।

वेंकैया नायडू ने कृषि क्षेत्र में असाधारण योगदान के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर) के निदेशक और कुलपति सीएच श्रीनिवास राव को हरित क्रांति के जनक डॉ. एमएस स्वामीनाथन के नाम पर स्थापित प्रतिष्ठित योग्यता पुरस्कार प्रदान करना अपना सौभाग्य बताया।

वेंकैया नायडू ने कृषि और जलवायु परिवर्तन से संबंधित आवश्यक राष्ट्रीय नीतियों को तैयार करने में डॉ. श्रीनिवास राव के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने और देश को सतत कृषि की ओर ले जाने में उनके नेतृत्व को मान्यता देता है।

नौवें प्रोफेसर एमएस स्वामीनाथन पुरस्कार (2024-25) का वितरण समारोह सेवानिवृत्त आईसीएआर कर्मचारी संघ और नुजिवीडू सीड्स लिमिटेड द्वारा संयुक्त रूप से डॉ. मर्री चेन्ना रेड्डी मानव संसाधन विकास संस्थान में आयोजित किया गया।

तेलंगाना के कृषि मंत्री तुम्माला नागेश्वर राव, नुजिवीडू सीड्स लिमिटेड के अध्यक्ष मंडावा प्रभाकर राव और सेवानिवृत्त आईसीएआर कर्मचारी संघ के अध्यक्ष विद्यासागर राव समारोह में उपस्थित थे।

कृषि मंत्री नागेश्वर राव ने प्रोफेसर एमएस स्वामीनाथन की जन्म शताब्दी के अवसर पर पुरस्कार दिए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने किसानों के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान की सुलभता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया और चेतावनी दी कि मृदा स्वास्थ्य की उपेक्षा हरित क्रांति के लाभों को उलट सकती है।

--आईएएनएस

एमएस/