वाल्मीकि निगम घोटाला: भाजपा और जेडी-एस ने कर्नाटक मंत्री नागेंद्र को हटाने की मांग की
बेंगलुरु, 17 अगस्त (आईएएनएस)। कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में अनियमितताओं का मामला एक बार फिर राज्य विधानसभा के मानसून सत्र में राजनीतिक विवाद का कारण बन गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल (सेक्युलर) (जेडी-एस) ने मंत्री बी. नागेंद्र को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग की है।
इस मुद्दे को लेकर विधान परिषद में तीखी बहस और विरोध प्रदर्शन हुआ। प्रश्नकाल शुरू होते ही भाजपा सदस्यों ने नागेंद्र के इस्तीफे की मांग करते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्षी सदस्यों का कहना था कि जब तक मंत्री इस्तीफा नहीं देते, तब तक सदन की कार्यवाही नहीं चलनी चाहिए।
यह मामला विधानसभा में भी उठा, जहां नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक और अन्य भाजपा नेताओं ने नागेंद्र को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग की। परिषद में उच्च शिक्षा मंत्री बसवराज रायरेड्डी के संबोधन के दौरान भाजपा सदस्यों ने "पहले इस्तीफा, फिर कार्यवाही" के नारे लगाए, जिससे कुछ देर हंगामे की स्थिति बनी रही।
विपक्ष की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, वक्फ एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री यूटी खादर ने मामले में अदालत के फैसले का हवाला दिया। उन्होंने सवाल किया कि क्या विपक्ष खुद को न्यायपालिका से ऊपर मानता है।
विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलावादी नारायणस्वामी ने कहा कि नागेंद्र को अब तक क्लीन चिट नहीं मिली है और मामला अभी अदालत में लंबित है। इसके जवाब में मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा कि सीआईडी जांच में नागेंद्र को क्लीन चिट मिल चुकी है और वे दोषी नहीं ठहराए गए हैं, बल्कि उनके खिलाफ केवल आरोप लगाए गए हैं।
सदन के अंदर विरोध के अलावा भाजपा ने बल्लारी, मैसूरु, तुमकुरु और रामनगर समेत कई जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर नागेंद्र को हटाने की मांग की।
नारायणस्वामी ने आरोप लगाया कि वाल्मीकि निगम से 187 करोड़ रुपए का गबन हुआ है और सवाल उठाया कि ऐसे में नागेंद्र को दोबारा मंत्री क्यों बनाया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक नागेंद्र इस्तीफा नहीं देते, भाजपा सदन के अंदर और बाहर अपना आंदोलन और तेज करेगी।
इस बीच भाजपा एमएलसी सीटी रवि ने आरोप लगाया कि इस घोटाले में कांग्रेस पार्टी और उसका शीर्ष नेतृत्व शामिल है। उन्होंने नागेंद्र को तुरंत बर्खास्त करने की मांग की।
विधान सौधा में पत्रकारों से बातचीत करते हुए रवि ने कहा कि सरकार ने उनके सवाल के जवाब में स्वीकार किया है कि 89.62 करोड़ रुपए विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए थे।
उन्होंने बताया कि पुलिस ने नागेंद्र और निगम के तत्कालीन प्रबंध निदेशक सहित 14 लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए हैं।
रवि ने अदालत में 13वें आरोपी सत्यानारायण वर्मा के बयान का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि वर्मा ने कहा था कि उन्हें नागेंद्र और उनके सहयोगियों से जान का खतरा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने धन के दुरुपयोग की पुष्टि की है, हालांकि अभी पूरी चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है।
रवि ने सवाल किया, "जब भ्रष्टाचार के आरोप अभी भी लगे हुए हैं, तो उसी व्यक्ति को दोबारा मंत्रिमंडल में क्यों शामिल किया गया?"
उन्होंने आरोप लगाया कि गबन की गई राशि का इस्तेमाल तेलंगाना चुनाव, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के दामाद से जुड़े कलबुर्गी चुनाव और बल्लारी लोकसभा चुनाव में किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह पैसा शराब की दुकानों, ज्वेलरी शोरूम और कार शोरूम तक पहुंचा।
रवि ने आरोप लगाया कि नागेंद्र को इस शर्त पर दोबारा मंत्री बनाया गया कि वे वरिष्ठ नेताओं के नाम उजागर नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा "भ्रष्ट मंत्री" को हटाए जाने तक अपना आंदोलन जारी रखेगी।
उन्होंने यह भी दावा किया कि पूरी राशि अब तक बरामद नहीं हुई है। रवि ने आरोप लगाया कि आरोपी नेक्कुंती नागराज और नागेंद्र के बीच एक होटल में बैठक हुई थी। उन्होंने कहा कि इस बैठक से जुड़ी तस्वीरें पहले भी जारी की जा चुकी हैं और अधिकारियों को सहयोग करने के मौखिक निर्देश दिए गए थे।
रवि ने अधिकारी चंद्रशेखर की आत्महत्या का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि उनके परिवार को अब तक भविष्य निधि (पीएफ) का लाभ नहीं मिला है।
उन्होंने कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोपियों को बचाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जांच से संकेत मिले हैं कि यदि चंद्रशेखर की मौत नहीं हुई होती तो फर्जी लाभार्थी बनाए जा सकते थे।
रवि ने यह भी आरोप लगाया कि गृह लक्ष्मी योजना और अन्य विकास निगमों में भी इसी तरह की गड़बड़ियां हुई हो सकती हैं। उन्होंने मामले की व्यापक जांच की मांग की।
--आईएएनएस
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