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उपराष्ट्रपति ने छात्रों को राष्ट्र-निर्माण के लिए जिम्मेदारी से तकनीक का इस्तेमाल करने की सलाह दी

मोतिहारी, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने शनिवार को बिहार के पूर्वी चंपारण स्थित मोतिहारी में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के तीसरे दीक्षांत समारोह को संंबोधित किया और छात्रों से राष्ट्र निर्माण के लिए तकनीक का जिम्मेदारी से उपयोग करने का आग्रह किया।
 
उपराष्ट्रपति ने छात्रों को राष्ट्र-निर्माण के लिए जिम्मेदारी से तकनीक का इस्तेमाल करने की सलाह दी

मोतिहारी, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने शनिवार को बिहार के पूर्वी चंपारण स्थित मोतिहारी में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के तीसरे दीक्षांत समारोह को संंबोधित किया और छात्रों से राष्ट्र निर्माण के लिए तकनीक का जिम्मेदारी से उपयोग करने का आग्रह किया।

एक बयान के अनुसार, उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि सीखने की जीवन भर चलने वाली यात्रा की शुरुआत का प्रतीक है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि तकनीक से संचालित इस तेजी से बदलती दुनिया में, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा साइंस जैसे क्षेत्र नवाचार और विकास के नए रास्ते खोल रहे हैं; उन्होंने छात्रों से राष्ट्र निर्माण के लिए तकनीक का जिम्मेदारी से उपयोग करने का आग्रह किया।

उन्होंने इस बात पर भी खुशी जाहिर की कि स्नातक और स्नातकोत्तर, दोनों ही कार्यक्रमों में विश्वविद्यालय के टॉपर छात्राएं हैं; उन्होंने इसे देश में 'महिला-नेतृत्व वाले विकास' की प्रगति का प्रतिबिंब बताया।

उन्होंने कहा कि भारत के इतिहास में चंपारण का एक विशेष स्थान है, क्योंकि यहीं पर महात्मा गांधी एक बैरिस्टर से भारत के गांवों से जुड़े एक जननेता में तब्दील हुए थे; साथ ही, चंपारण सत्याग्रह ने सत्य, साहस और न्याय के माध्यम से राष्ट्र की अंतरात्मा को जगाया था।

बिहार की समृद्ध बौद्धिक और आध्यात्मिक विरासत को रेखांकित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि इसी पवित्र भूमि पर गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी; यहीं पर प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय वैश्विक शिक्षा के एक प्रकाश स्तंभ के रूप में खड़ा था, और यहीं से चाणक्य जैसे महान विचारक निकले थे।

राधाकृष्णन ने कहा कि 'महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय' का नामकरण अत्यंत प्रतीकात्मक है, जो गांधीजी के सामाजिक न्याय, ग्रामीण उत्थान और नैतिक नेतृत्व के आदर्शों के प्रति प्रतिबद्धता को दिखाता है।

उन्होंने महारानी जानकी कुंवर के योगदान को भी याद किया, जिनकी परोपकारिता और भूमि दान ने इस क्षेत्र में शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी; उन्होंने कहा कि ऐसी दूरदर्शी उदारता शिक्षा और सामाजिक प्रगति की नींव को मजबूत करती है।

उपराष्ट्रपति ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि विश्वविद्यालय ने 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020' को लागू किया है और नए एकीकृत पाठ्यक्रम शुरू किए हैं।

उन्होंने 'भारतीय ज्ञान प्रणाली केंद्र' की स्थापना और 'फिट इंडिया मूवमेंट' के तहत खेल व फिटनेस पर विश्वविद्यालय के जोर की सराहना की।

--आईएएनएस

एससीएच