दक्षिण कोरिया को ओपीकॉन देने पर अब भी कायम हैं तय शर्तें: यूएस फोर्सेज कोरिया
सोल, 28 मई (आईएएनएस)। दक्षिण कोरिया और अमेरिका का गठबंधन युद्धकालीन ऑपरेशनल कंट्रोल वाशिंगटन से सियोल को शर्त-आधारित हस्तांतरण प्रक्रिया (ओपीकॉन) के तहत सौंपा जाएगा। यह बात अमेरिका स्थित यूएस फोर्सेज कोरिया (यूएसएफके) के एक अधिकारी ने कही है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब एक रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिकी सेना ने इस प्रक्रिया को जल्दबाजी में करने को लेकर चिंता जताई है।
यूएसएफके अधिकारी ने योनहाप समाचार एजेंसी से कहा, “अमेरिका और दक्षिण कोरिया का गठबंधन युद्धकालीन ऑपरेशनल कंट्रोल के ‘कंडीशन्स-बेस्ड’ ट्रांसफर के लिए प्रतिबद्ध है और इस नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।”
उन्होंने कहा कि हमारा ध्यान संयुक्त रक्षा क्षमता को मजबूत करने और दक्षिण कोरिया और अमेरिकी मुख्य भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर है।
हालांकि, अधिकारी ने उस रिपोर्ट पर सीधे तौर पर कोई जवाब नहीं दिया, जिसमें यह दावा किया गया था कि अगर ओपीकॉन ट्रांसफर जल्दबाजी में किया गया तो मौजूदा संयुक्त कमांड सिस्टम के तहत अमेरिकी सैनिकों का दक्षिण कोरियाई कमांड में काम करना मुश्किल हो सकता है।
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग की सरकार चाहती है कि उनके पांच साल के कार्यकाल यानी 2030 तक, देश युद्धकालीन ओपीकॉन वापस हासिल कर ले।
दरअसल दक्षिण कोरिया के संदर्भ में ओपीकॉन का मतलब है कि युद्ध या युद्ध जैसी स्थिति में कौन सेना को आदेश देगा, कौन सैन्य अभियानों का नेतृत्व करेगा कौन कोरिया-अमेरिका संयुक्त सेना को नियंत्रित करेगा।
सोल के एक सूत्र के मुताबिक, दक्षिण कोरियाई सरकार का मानना है कि ओपीकॉन ट्रांसफर के लिए जरूरी शर्तें अगले साल तक पूरी की जा सकती हैं, लेकिन पिछले महीने अमेरिकी संसद की हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी की सुनवाई के दौरान यूएसएफके के कमांडर जनरल जेवियर ब्रूनसन ने कहा था कि दोनों देशों का लक्ष्य 2029 की पहली तिमाही तक इन शर्तों को पूरा करना है। इससे यह संकेत मिला कि ट्रांसफर के समय को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद हैं।
दोनों देश अक्टूबर 2014 में इस बात पर सहमत हुए थे कि ओपीकॉन ट्रांसफर तय शर्तों के आधार पर होगा। इन शर्तों में दक्षिण कोरिया की संयुक्त अमेरिका-दक्षिण कोरिया सेना का नेतृत्व करने की क्षमता, उसकी स्ट्राइक और एयर डिफेंस क्षमता और ऐसा क्षेत्रीय सुरक्षा माहौल शामिल है जो इस तरह के ट्रांसफर के लिए सही माना जाए।
चोसुन इल्बो की रिपोर्ट के अनुसार, यूएसएफके ने सोल से कहा है कि अगर सैन्य जरूरतें पूरी किए बिना ओपीकॉन ट्रांसफर किया गया, तो अमेरिकी सैनिकों का दक्षिण कोरियाई जनरल के ऑपरेशनल कंट्रोल में काम करना मुश्किल हो जाएगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ऐसी स्थिति में मौजूदा संयुक्त कमांड सिस्टम टूट सकता है।
1950-53 के कोरियाई युद्ध के दौरान दक्षिण कोरिया ने अपनी सेना का ऑपरेशनल कंट्रोल अमेरिका नेतृत्व वाले संयुक्त राष्ट्र कमांड को सौंप दिया था। बाद में 1978 में संयुक्त बल कमांड बनने के बाद यह कंट्रोल वहां चला गया।
दक्षिण कोरिया ने 1994 में शांति काल का ऑपरेशनल कंट्रोल वापस ले लिया था, लेकिन युद्धकालीन ओपीकॉन अब भी अमेरिका के पास है।
--आईएएनएस
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