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कंपनियों को चीन-रूस की खुफिया एजेंसियों से दूर रखना जरूरी, अमेरिकी लॉमेकर्स ने उठाई आवाज

वॉशिंगटन, 26 अगस्त (आईएएनएस)। अमेरिका के दोनों प्रमुख दलों के लॉमेकर्स के एक समूह ने ट्रंप प्रशासन से मांग की है कि अमेरिकी नागरिकों और कंपनियों को चीन और रूस की सिविलियन खुफिया एजेंसियों के लिए काम करने से रोका जाए। लॉमेकर्स का कहना है कि मौजूदा कमियों की वजह से विदेशी दुश्मन देश अमेरिका की एडवांस्ड सर्विलांस, साइबर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी हासिल कर सकते हैं।
 

वॉशिंगटन, 26 अगस्त (आईएएनएस)। अमेरिका के दोनों प्रमुख दलों के लॉमेकर्स के एक समूह ने ट्रंप प्रशासन से मांग की है कि अमेरिकी नागरिकों और कंपनियों को चीन और रूस की सिविलियन खुफिया एजेंसियों के लिए काम करने से रोका जाए। लॉमेकर्स का कहना है कि मौजूदा कमियों की वजह से विदेशी दुश्मन देश अमेरिका की एडवांस्ड सर्विलांस, साइबर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी हासिल कर सकते हैं।

लॉमेकर्स ने कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लटनिक से आग्रह किया कि वे 2022 में कांग्रेस की ओर से मंजूर किए गए उन एक्सपोर्ट कंट्रोल प्रावधानों को लागू करें, जिन्हें अब तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया है।

इस समूह में डेमोक्रेट सीनेटर रॉन वाइडन और पीटर वेल्च, रिपब्लिकन सीनेटर जॉन कॉर्निन, रिपब्लिकन लॉमेकर पैट हैरिगन और माइकल मैककॉल, तथा डेमोक्रेट लॉमेकर सारा जैकब्स शामिल हैं।

लॉमेकर्स ने कहा कि वर्तमान अमेरिकी नियम चीन, रूस और कुछ अन्य देशों की सैन्य खुफिया एजेंसियों की मदद करने पर रोक लगाते हैं, लेकिन उनकी नागरिक खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों को प्रभावी ढंग से कवर नहीं करते।

उन्होंने अपने पत्र में लिखा, "नतीजतन, कई देशों की विदेशी खुफिया एजेंसियां अब भी कानूनी रूप से अमेरिका में सलाहकार नियुक्त कर सकती हैं और अमेरिकी निगरानी, साइबर तथा एआई जैसी उन्नत तकनीक खरीद सकती हैं। इनका इस्तेमाल वे अमेरिकियों को निशाना बनाने और अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा तथा विदेश नीति के हितों के खिलाफ कर सकती हैं।"

ट्रंप प्रशासन ने 2021 में ऐसे अमेरिकी नागरिकों और कंपनियों पर निर्यात नियंत्रण लगाए थे जो चीन, रूस और अन्य चिंताजनक देशों की सैन्य खुफिया एजेंसियों के साथ कारोबार करते थे। हालांकि उस समय के कानून के तहत ये प्रतिबंध केवल सैन्य खुफिया संगठनों तक ही सीमित थे।

इसके बाद 2022 में कांग्रेस ने एक कानून पारित किया, जिसने सरकार को विदेशी नागरिक खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों पर भी ऐसे ही नियंत्रण लगाने का अधिकार दिया।

बाइडेन प्रशासन ने 2024 में इन अधिकारों को लागू करने के लिए नए नियमों का मसौदा पेश किया था, लेकिन बयान के मुताबिक वे नियम कभी अंतिम रूप नहीं ले सके।

लॉमेकर्स ने लिखा, "इस कानूनी खामी को पूरी तरह बंद करने के लिए इन महत्वपूर्ण सुधारों को लागू करना बेहद जरूरी है, ताकि विदेशी प्रतिद्वंद्वी अमेरिकी सरकार, नागरिकों और रणनीतिक हितों के खिलाफ अमेरिकी तकनीक और विशेषज्ञता का इस्तेमाल न कर सकें।"

उन्होंने सुझाव दिया कि वाणिज्य विभाग एक 'विश्वसनीय देशों की सूची' तैयार करें। इसमें वे देश शामिल हों जिनका मानवाधिकार रिकॉर्ड अच्छा हो और जो अमेरिका के खिलाफ निगरानी गतिविधियां न चलाते हों।

प्रस्ताव के अनुसार, यदि कोई देश इस सूची में शामिल नहीं है, तो वहां की खुफिया या सुरक्षा एजेंसियों के साथ कारोबार करने से पहले अमेरिकी नागरिकों और कंपनियों को सरकारी लाइसेंस लेना होगा।

लॉमेकर्स का कहना है कि पिछली सरकार की ओर से प्रस्तावित देशों की सूची में कुछ ऐसे देशों को बाहर रखा गया था जिन पर मानवाधिकार उल्लंघन या अमेरिका के खिलाफ जासूसी करने के आरोप लगते रहे हैं।

उन्होंने वाणिज्य विभाग से उन खामियों को भी बंद करने की मांग की, जिनका इस्तेमाल निजी निगरानी (सर्विलांस) ठेकेदार नियमों से बचने के लिए करते हैं।

लॉमेकर्स के मुताबिक, निजी स्पाइवेयर और साइबर निगरानी कंपनियां अक्सर अपने ग्राहकों की पहचान छिपाती हैं ताकि वे नियामकीय प्रतिबंधों से बच सकें।

उन्होंने सिफारिश की कि विदेशी निगरानी कंपनियों को अमेरिकी आपूर्तिकर्ताओं के सामने शपथ-पत्र देना अनिवार्य किया जाए। इसमें यह पुष्टि करनी होगी कि उनके ग्राहकों में विश्वसनीय देशों की सूची से बाहर किसी देश की खुफिया या सुरक्षा एजेंसी शामिल नहीं है।

लॉमेकर्स ने बायोमेट्रिक निगरानी और पहचान वर्गीकरण तकनीकों पर भी व्यापक नियंत्रण लगाने की मांग की।

हालांकि 2024 के प्रस्तावित नियमों में फेशियल रिकग्निशन प्रणाली शामिल थी, लेकिन लॉमेकर्स का कहना है कि कई दूसरी तकनीकों का भी दमनकारी सरकारें लोगों की निगरानी या उन्हें वर्गीकृत करने के लिए इस्तेमाल कर सकती हैं।

--आईएएनएस

एवाई/एएस