केंद्रीय मंत्रालय 2 मई को हैदराबाद में 'आत्मनिर्भर पंचायत' पर कार्यशाला आयोजित करेगा
हैदराबाद, 1 मई (आईएएनएस)। एक अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि पंचायती राज सचिव विवेक भारद्वाज शनिवार को यहां राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) के तहत पंचायती राज मंत्रालय की एक दूरदर्शी पहल, आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम पर चर्चा शुरू करेंगे।
बयान में कहा गया कि राजेंद्र नगर स्थित राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (एनआईआरडी एवं पीआर) में आयोजित कार्यशाला में सचिव प्रतिभागियों को आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम की परिकल्पना, उद्देश्यों और परिचालन ढांचे से परिचित कराएंगे।
इस कार्यशाला का उद्घाटन भारद्वाज द्वारा पंचायती राज मंत्रालय की संयुक्त सचिव मुक्ता शेखर, तेलंगाना के पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास विभाग के विशेष मुख्य सचिव एम. दाना किशोर, राज्य सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों, एनआईआरडी एवं पीआर के संकाय सदस्यों, आवास एवं शहरी विकास निगम लिमिटेड (एचयूडीसीओ) और राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के वरिष्ठ अधिकारियों और तेलंगाना भर के पंचायत प्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों की उपस्थिति में किया जाएगा।
बयान में कहा गया कि अपने संबोधन में भारद्वाज द्वारा आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम की परिकल्पना प्रस्तुत करने की उम्मीद है, जिसके बाद राष्ट्रीय नीति के उद्देश्यों, तकनीकी रोडमैप और अपेक्षित परिणामों पर विस्तृत प्रस्तुति दी जाएगी।
आत्मनिर्भर पंचायत पोर्टल का एक लाइव, संपूर्ण प्रदर्शन प्रतिभागियों को आवेदन प्रक्रिया और डिजिटल डैशबोर्ड से परिचित कराएगा, जिससे हर स्तर की पंचायतों के लिए प्रक्रिया सुलभ और पारदर्शी हो जाएगी।
बयान में आगे कहा गया है कि एक संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र सभी हितधारकों को मंत्रालय के साथ सीधे जुड़ने और भागीदारी के बारे में स्पष्टता प्राप्त करने का एक मूल्यवान अवसर प्रदान करेगा।
तेलंगाना राज्य भी इस कार्यक्रम के तहत अपनी प्रतिबद्धता और प्राथमिकताओं को स्पष्ट करेगा, जिससे केंद्र और राज्य के बीच सक्रिय साझेदारी की नींव रखी जाएगी।
एचयूडीसीओ और नाबार्ड जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के संगठन ग्रामीण परियोजना विकास में अपनी विशेषज्ञता और संभावित वित्तीय सहायता प्रदान करके कार्यक्रम का समर्थन कर रहे हैं।
बयान में कहा गया है कि आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम पात्र ग्राम पंचायतों और ब्लॉक पंचायतों को आर्थिक रूप से व्यवहार्य और ऋण-योग्य परियोजनाओं को विकसित करने और लागू करने में सहायता प्रदान करने के लिए बनाया गया है, जिससे उनके अपने राजस्व स्रोत मजबूत हों।
एक पारदर्शी राष्ट्रीय चुनौती प्रक्रिया के माध्यम से, पंचायतों से चयनित प्रस्तावों को परियोजना विकास से लेकर वित्तीय समापन तक समर्पित तकनीकी सहायता प्राप्त होगी, जिसमें सार्वजनिक-निजी भागीदारी, सीएसआर वित्तपोषण, बैंक वित्तपोषण और अन्य सरकारी योजनाओं के साथ समन्वय शामिल होगा।
ग्राम सभाओं की अनिवार्य सहमति के माध्यम से योजना में सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
विचार पंचायतों से आएंगे, और तकनीकी सहायता विजयी विचारों को बैंक से वित्तपोषण योग्य परियोजनाओं में विकसित करेगी।
बयान में यह भी कहा गया कि इस कार्यक्रम के चार साल के कार्यान्वयन काल में, इसका उद्देश्य आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से आत्मविश्वासी पंचायतों की एक नई पीढ़ी का निर्माण करना है, जिनमें से प्रत्येक इस बात का जीता-जागता उदाहरण होगी कि वित्तीय स्वतंत्रता और सुशासन साथ-साथ चलते हैं।
--आईएएनएस
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