यूएन रिपोर्ट का बड़ा खुलासा: आधे से ज्यादा सतत विकास लक्ष्य पटरी से उतरे
संयुक्त राष्ट्र, 8 जुलाई (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (एसडीजी) के जिन लक्ष्यों का आकलन किया जा सकता है, उनमें से केवल 36 प्रतिशत ही अपने लक्ष्य की ओर हैं। जबकि लगभग आधे लक्ष्य रुके हुए हैं और 15 प्रतिशत में गिरावट आई है। इन्हें पूरा करने में अब केवल चार साल बचे हैं।
सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, 'सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स रिपोर्ट 2026' में कहा गया है कि 2015 में सस्टेनेबल डेवलपमेंट के लिए 2030 एजेंडा को अपनाए जाने के बाद से लगातार निवेश, सही नीतियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग ने दुनिया भर में अरबों लोगों के जीवन में सुधार किया है और एसडीजी के तहत मापने योग्य प्रगति हुई है।
लगभग 1 अरब लोगों को सुरक्षित रूप से प्रबंधित पीने का पानी और 1.2 अरब लोगों को सुरक्षित रूप से प्रबंधित स्वच्छता सुविधाएं मिली हैं। 2015 और 2024 के बीच एचआईवी के नए मामलों में 30 प्रतिशत और एड्स से होने वाली मौतों में 35 प्रतिशत की कमी आई है। अब दुनिया की 92 प्रतिशत आबादी तक बिजली पहुंचती है। इंटरनेट की सुविधा 40 प्रतिशत से बढ़कर 74 प्रतिशत हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इतिहास में पहली बार दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में है।
रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा, "इस रिपोर्ट के डेटा से प्रेरित होकर, 2030 एजेंडा का हमारा लक्ष्य अभी भी हासिल किया जा सकता है। आइए, हम सब मिलकर सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स को हासिल करने और सभी के लिए एक स्वस्थ, समृद्ध भविष्य बनाने की दिशा में निर्णायक अंतिम प्रयास करें।"
रिपोर्ट से पता चलता है कि प्रगति के बावजूद, बड़ी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। हर 10 में से एक व्यक्ति अभी भी अत्यधिक गरीबी में जी रहा है। लगभग 2.3 अरब लोग मध्यम या गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। 15 करोड़ से ज्यादा बच्चे कुपोषण के कारण अविकसित हैं। मातृ मृत्यु दर वैश्विक लक्ष्य से लगभग तीन गुना ज्यादा है। रिपोर्ट के अनुसार, 2015 के बाद से जलवायु-संबंधी आपदाओं से प्रभावित लोगों की संख्या दोगुनी से भी ज्यादा हो गई है।
इसमें कहा गया है कि बढ़ते संघर्ष, जलवायु परिवर्तन, धीमी आर्थिक वृद्धि, बढ़ता कर्ज और आधिकारिक विकास सहायता में रिकॉर्ड गिरावट कमियों को और बढ़ा रही है और दुनिया के सबसे कमजोर लोगों को असमान रूप से प्रभावित कर रही है।
रिपोर्ट जारी करने के दौरान हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में संयुक्त राष्ट्र की उप-महासचिव अमीना मोहम्मद ने कहा कि एसडीजी सही दिशा में हैं। उन्होंने कहा, "जहां भी उन्हें राजनीतिक इच्छाशक्ति और संसाधनों का समर्थन मिला है, वहां उन्होंने नतीजे दिए हैं।" साथ ही, उन्होंने लागू करने के तरीकों में बढ़ते संकट के बारे में चेतावनी भी दी।
उन्होंने तीन वादों पर जोर दिया: हर लक्ष्य को हासिल करने में मदद के तौर पर लैंगिक समानता को बढ़ावा देना, रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) की ओर तेजी से बढ़ना और लगातार बढ़ते सैन्य खर्च के बजाय विकास के साधनों में निवेश करके शांति को प्राथमिकता देना।
मोहम्मद ने कहा, "आज की अहम चुनौतियों में से किसी का भी समाधान देश अकेले नहीं कर सकते। इस रिपोर्ट में पेश किए गए सबूत एक बात बिल्कुल साफ करते हैं: सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (सतत विकास लक्ष्य) को हासिल किया जा सकता है, अगर हम ज्यादा तेजी, बड़े पैमाने, एकजुटता और पक्के इरादे के साथ मिलकर काम करने का फैसला करें। लेकिन यह फैसला अभी करना होगा। यह फैसला तब करना होगा जब हमारे पास उस रास्ते को बदलने के लिए चार साल बचे हों जिस पर हम अभी चल रहे हैं।"
आर्थिक और सामाजिक मामलों के लिए यूएन के अंडर-सेक्रेटरी-जनरल ली जुनहुआ ने कहा कि 2030 एजेंडा यह मानता है कि सतत विकास एक साझा प्रयास है, न कि 'जीरो-सम गेम' (जिसमें एक की जीत दूसरे की हार होती है)।
ली ने रिपोर्ट में कहा कि हाल की उपलब्धियां, जैसे कि खुले समुद्र (हाई सीज) को कानूनी सुरक्षा देना या विकासशील देशों में रिन्यूएबल बिजली उत्पादन क्षमता में तेजी, यह साबित करती हैं कि बड़े और तालमेल वाले कदमों से नतीजे मिलते हैं।
उन्होंने कहा, "अगले चार साल हमारी रफ्तार की परीक्षा लेंगे। फंडिंग, वैश्विक सहयोग और संकट के सामूहिक प्रबंधन को लेकर हम जो फैसले अभी लेंगे, उनका असर आने वाली पीढ़ियों तक रहेगा। इस रिपोर्ट के सबूत साबित करते हैं कि 2015 में हमने जो लक्ष्य तय किए थे, वे हमारी पहुंच से बाहर कभी नहीं थे। अब हमें उस काम को पूरा करने का पक्का इरादा करना होगा जिसे हमने शुरू किया था।"
--आईएएनएस
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