मिलनाडु: उदयनिधि स्टालिन ने राज्यपाल के मदुरै निरीक्षण की कड़ी आलोचना की
चेन्नई, 2 जुलाई (आईएएनएस)। डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन ने गुरुवार को तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर द्वारा मदुरै दौरे के दौरान किए गए निरीक्षण की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि यह असंवैधानिक था और निर्वाचित राज्य सरकार की शक्तियों का अतिक्रमण था।
एक बयान में उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि राज्यपाल ने संवैधानिक पद पर रहते हुए और तमिलनाडु के राज्यपाल के रूप में केवल अतिरिक्त प्रभार संभालते हुए भी निर्वाचित जन प्रतिनिधि की तरह व्यवहार किया। उन्होंने सत्तारूढ़ टीवीके सरकार पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उसने राज्यपाल को संवैधानिक सीमाओं का उल्लंघन करने की अनुमति दी।
पूर्व एआईएडीएमके सरकार से तुलना करते हुए उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि राज्यपाल का यह निरीक्षण राज्यपालों द्वारा क्षेत्र निरीक्षण करने की 'कूवथुर युग' की प्रथा की वापसी का प्रतीक है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने एक ऐसी मिसाल कायम होने दी है जिसने तमिलनाडु के अधिकारों को कमजोर किया है।
उन्होंने राज्यपाल के उन कथित बयानों पर आपत्ति जताई, जिनमें उन्होंने कहा था कि अगर राज्य सरकार वैगई नदी का जीर्णोद्धार करने में विफल रहती है तो राजभवन हस्तक्षेप करेगा। उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि राजभवन का रखरखाव स्वयं तमिलनाडु सरकार की जिम्मेदारी है और राज्यपाल की टिप्पणियां सत्ता का अनुचित प्रदर्शन हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे बयान केवल इसलिए संभव हो पाए हैं क्योंकि सत्ताधारी दल राज्य सरकार की संवैधानिक शक्तियों की रक्षा करने में विफल रहा है।
डीएमके नेता ने याद दिलाया कि उनकी पार्टी ने पहले विधानसभा में सरकार से राज्यपाल की उपस्थिति में आयोजित आधिकारिक समारोहों में तमिल थाई वझथु को दिए जाने वाले महत्व पर कथित समझौते को लेकर सवाल किया था। उन्होंने कहा कि सरकार संतोषजनक स्पष्टीकरण देने में विफल रही और तर्क दिया कि हाल के घटनाक्रम स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि सरकार राज्य के अधिकारों से समझौता कर रही है।
उदयनिधि स्टालिन ने आगे आरोप लगाया कि सत्ताधारी पार्टी विपक्षी दलों से दलबदल कराने की कोशिश कर रही थी, वहीं साथ ही राज्यपाल के निरीक्षण की अनुमति इस डर से दे रही थी कि कहीं राज्यपाल सरकार के खिलाफ कार्रवाई न शुरू कर दें।
पूर्व एआईएडीएमके शासनकाल के दौरान डीएमके के विरोध प्रदर्शनों को याद करते हुए उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं ने तत्कालीन राज्यपाल द्वारा किए गए इसी तरह के निरीक्षणों के दौरान काले झंडे लहराकर प्रदर्शन किया था। उन्होंने आगे कहा कि एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली पूर्व डीएमके सरकार के कार्यकाल में ऐसे किसी भी निरीक्षण की अनुमति नहीं दी गई थी।
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