उद्धव ठाकरे ने सीईसी की तत्काल गिरफ्तारी, महाराष्ट्र-तमिलनाडु और बंगाल में दोबारा चुनाव की मांग की
मुंबई, 23 सितंबर (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बुधवार को भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) पर कड़ा हमला करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की।
मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने सीईसी ज्ञानेश कुमार पर केंद्र सरकार के इशारे पर लोकतंत्र को खत्म करने और राजनीतिक दलों में फूट डालने वाले गैंग के सरगना के तौर पर काम करने का आरोप लगाया।
उन्होंने महाराष्ट्र, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों को रद्द करने और नए सिरे से चुनाव कराने की भी मांग की।
ठाकरे की यह तीखी प्रतिक्रिया एक मीडिया रिपोर्ट के बाद आई, जिसमें तीन सदस्यीय चुनाव पैनल के भीतर बड़ी अंदरूनी कलह का खुलासा हुआ था।
रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन को औपचारिक शिकायत सौंपी। उन्होंने आरोप लगाया कि सीईसी ज्ञानेश कुमार उनसे सलाह किए बिना या उनकी असहमति पर ध्यान दिए बिना मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) के बारे में एकतरफा फैसले ले रहे थे।
ठाकरे ने कहा कि चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू द्वारा अंदरूनी तौर पर मामले को उजागर करने से पता चलता है कि यह प्रशासन कितना मनमाना था। उन्होंने हिम्मत दिखाने के लिए चुनाव आयुक्तों की तारीफ की। मीडिया और जनता को डर से बाहर निकलना होगा। जब राजनीतिक डकैतों का एक गिरोह खुलेआम लोकतंत्र की हत्या कर रहा हो तो नागरिकों और प्रेस को संविधान की रक्षा के लिए खड़ा होना चाहिए।
इन खुलासों पर प्रतिक्रिया देते हुए महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इस खबर ने उस बात की पुष्टि कर दी है, जिसका आरोप विपक्ष सालों से केंद्रीय एजेंसी के मनमाने कामकाज को लेकर लगा रहा था।
ठाकरे ने कहा कि ज्ञानेश कुमार का असली चेहरा देश के सामने आ गया है। वह उस गिरोह के मुख्य मास्टरमाइंड हैं जो राजनीतिक दलों को तोड़ता है, पार्टियों के नाम चुराता है और लोकतंत्र की हत्या करता है। उन्हें तुरंत जेल में डाल दिया जाना चाहिए। तीन में से दो आयुक्तों के उनके मनमाने तरीके के खिलाफ बगावत करने से, अब बहुमत मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ है।
हाल की चुनावी प्रक्रियाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए ठाकरे ने राज्य में मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हेरफेर का आरोप लगाया।
उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के दौरान मतदाता सूची में मनमाने ढंग से 45 लाख से अधिक नाम जोड़े गए थे, जबकि बाद की एसआईआर प्रक्रिया के दौरान 40 लाख नामों पर सवाल उठाए गए या उन्हें हटाने के लिए चिह्नित किया गया। ठाकरे ने आरोप लगाया कि ईसीआई ने सबसे पहले उनकी पार्टी को निशाना बनाया। एक अहम उपचुनाव के दौरान पार्टी का असली नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज कर दिया गया और फिर उन्हें गैर-कानूनी तरीके से बागी गुट को सौंप दिया गया।
उन्होंने कहा कि बाद में शरद पवार की नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के खिलाफ भी यही तरीका अपनाया गया और अब पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ भी ऐसा ही किया जा रहा है।
ठाकरे ने पूछा कि भाजपा के दिग्गज नेता एलके आडवाणी का नाम भी वोटर लिस्ट से गायब हो गया था। क्या वे उस व्यक्ति के साथ ऐसा ही व्यवहार करते हैं जो उन्हें सत्ता में लाया।
महाराष्ट्र, तमिलनाडु, बंगाल में दोबारा चुनाव की मांग करते हुए उन्होंने नए चुनाव ईवीएम के बजाय पूरी तरह से फिजिकल बैलेट पेपर के जरिए कराए जाएं।
चुनाव आयोग के कामकाज के पीछे राजनीतिक प्रभाव पर सवाल उठाते हुए उद्धव ठाकरे ने इस बात की निष्पक्ष जांच की मांग की कि क्या चुनाव आयोग केंद्रीय गृह मंत्रालय से सीधे आदेश ले रहा था।
उन्होंने कहा कि अगर ईसीआई गृह मंत्रालय के निर्देशों पर काम कर रहा है तो देश को यह जानने का हक है कि क्या केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद इन गतिविधियों को निर्देशित कर रहे हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर लोकतांत्रिक संस्थाओं के साथ इसी तरह समझौता किया जाता रहा तो नागरिकों को विरोध में सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
--आईएएनएस
डीकेएम/डीकेपी
