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उदयपुर को हर साल मिलेगा 1000 एमसीएफटी अतिरिक्त पानी, देवास परियोजना के नए चरणों पर तेजी से काम

जयपुर, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। उदयपुर को जल्द ही हर साल करीब 1,000 एमसीएफटी (मिलियन क्यूबिक फीट) अतिरिक्त पानी मिलने की संभावना है। यह लाभ देवास परियोजना के चरण-3 और चरण-4 के पूरा होने के बाद मिलेगा। इससे शहर की पेयजल आपूर्ति मजबूत होगी और पिछोला झील तथा फतेह सागर झील में जलस्तर बनाए रखने में मदद मिलेगी।
 

जयपुर, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। उदयपुर को जल्द ही हर साल करीब 1,000 एमसीएफटी (मिलियन क्यूबिक फीट) अतिरिक्त पानी मिलने की संभावना है। यह लाभ देवास परियोजना के चरण-3 और चरण-4 के पूरा होने के बाद मिलेगा। इससे शहर की पेयजल आपूर्ति मजबूत होगी और पिछोला झील तथा फतेह सागर झील में जलस्तर बनाए रखने में मदद मिलेगी।

अतिरिक्त पानी की उपलब्धता से पर्यटन, इको-टूरिज्म और इससे जुड़े आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

उदयपुर की दीर्घकालिक जल सुरक्षा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई देवास परियोजना के चरण-3 और चरण-4 के तहत बांधों और सुरंगों के निर्माण का काम तेजी से चल रहा है।

यह अंतर-बेसिन जल हस्तांतरण परियोजना साबरमती बेसिन के उस पानी को, जो सामान्य रूप से अरब सागर में चला जाता है, बनास बेसिन की ओर मोड़कर उदयपुर की जल आपूर्ति व्यवस्था से जोड़ने का लक्ष्य रखती है।

देवास-4 परियोजना के तहत गोगुंदा तहसील के अंबावा गांव के पास 390 एमसीएफटी क्षमता वाले बांध और 4.15 किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण किया जा रहा है। इस बांध का पानी देवास-3 परियोजना तक पहुंचाया जाएगा।

इसी तरह देवास-3 बांध, जिसकी क्षमता 703 एमसीएफटी है, नाथियाथल गांव के पास बनाया जा रहा है। इस बांध का पानी 10.50 किलोमीटर लंबी सुरंग के जरिए मौजूदा देवास-2 (अकोदरा बांध) तक पहुंचाया जाएगा और आवश्यकता अनुसार वहां से पिछोला झील में छोड़ा जाएगा।

दोनों चरण पूरे होने के बाद उदयपुर शहर के लिए हर वर्ष लगभग 1,000 एमसीएफटी अतिरिक्त पानी उपलब्ध होगा।

इस अतिरिक्त जल आपूर्ति से शहर की बढ़ती पेयजल जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ पिछोला और फतेह सागर झील के जलस्तर को बनाए रखने में मदद मिलेगी।

सरकार का मानना है कि इससे शहर की जल सुरक्षा मजबूत होगी और पर्यटन तथा इको-टूरिज्म से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

राज्य सरकार के निर्देशों के अनुसार, परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। प्रभावित लोगों को नजदीकी क्षेत्रों में आवासीय भूखंड और आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि उनका सुरक्षित और सम्मानजनक पुनर्वास सुनिश्चित किया जा सके।

देवास परियोजना का पहला चरण वर्ष 1974 में उदयपुर की जल सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।

इसके बाद देवास-2 परियोजना वर्ष 2015 में पूरी हुई थी। इस परियोजना के तहत अकोदरा बांध और सुरंगों के नेटवर्क के माध्यम से गुरुत्वाकर्षण आधारित प्रणाली से पानी को पिछोला झील तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई थी।

वर्तमान में चल रही देवास-3 और देवास-4 परियोजनाएं इस दीर्घकालिक जल सुरक्षा योजना की महत्वपूर्ण कड़ियां हैं। इनके पूरा होने के बाद उदयपुर की पेयजल व्यवस्था और भविष्य में जल संकट से निपटने की क्षमता और मजबूत होने की उम्मीद है।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी