बंगाल के दो नेता भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति में शामिल हुए
कोलकाता, 17 अगस्त (आईएएनएस)। हाल ही में हुए चुनावों में भाजपा की जबरदस्त जीत के बाद, पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति में पश्चिम बंगाल के दो प्रमुख चेहरों को जगह मिली है। यह राष्ट्रीय नेतृत्व के लिए पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई के महत्व को दर्शाता है।
नए चेहरों में उत्तरी बंगाल की अलीपुरद्वार सीट से भाजपा के लोकसभा सांसद मनोज टिग्गा शामिल हैं, जो पहले पश्चिम बंगाल विधानसभा में भाजपा विधायक दल के मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) थे। इसके अलावा, पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई की पूर्व उपाध्यक्ष और जानी-मानी मेडिकल प्रोफेशनल मधुचंदा कर भी इसमें शामिल हैं।
टिग्गा को भाजपा का राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है, जबकि कर को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
इससे पहले 2020 में पश्चिम बंगाल के दो प्रमुख चेहरों को भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति में अहम पद दिए गए थे।
तब तृणमूल कांग्रेस से भाजपा में आए नेता, स्वर्गीय मुकुल रॉय को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया था। साथ ही, अनुपम हाजरा को पार्टी का राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किया गया था।
इस साल पश्चिम बंगाल में भाजपा की चुनावी जीत के बाद, उम्मीद थी कि पार्टी के अखिल भारतीय नेतृत्व में राज्य को ज्यादा अहमियत मिलेगी। छह साल बाद, पश्चिम बंगाल से दो प्रतिनिधियों को एक साथ भाजपा का केंद्रीय पदाधिकारी बनाया गया है।
हालांकि मधुचंदा कर ने आधिकारिक तौर पर 2020 में भाजपा जॉइन की थी, लेकिन वह पहले आरएसएस के छात्र संगठन 'अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद' (एबीवीपी) की राज्य उपाध्यक्ष रह चुकी थीं। छात्र जीवन के बाद वह राजनीति में सक्रिय नहीं थीं।
कैंसर स्पेशलिस्ट होने के नाते, वह 2020 में राज्य भाजपा के मेडिकल सेल की सह-संयोजक बनीं। कुछ ही दिनों में वह राज्य कार्यकारिणी की सदस्य बन गईं।
2022 में, जब सुकांत मजूमदार पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष थे, तब कर राज्य उपाध्यक्ष थीं। हालांकि, जब समीक भट्टाचार्य राज्य अध्यक्ष बने और उन्होंने नई समिति बनाई, तो उन्हें उसमें शामिल नहीं किया गया।
2019 के लोकसभा चुनावों के बाद कई सफल हस्तियां भाजपा में शामिल हुई थीं, लेकिन 2021 के विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार के बाद, उनमें से कई ने पार्टी से दूरी बना ली। कर ने ऐसा नहीं किया।
वह 2022 के नगर निकाय चुनावों में बिधाननगर नगर निगम के वार्ड नंबर 39 में पार्टी की बूथ एजेंट बनीं। ऐसी अटकलें थीं कि उन्हें इस साल के विधानसभा चुनावों में बिधाननगर से भाजपा का टिकट मिल सकता है। हालांकि, ऐसा नहीं हुआ।
वहीं, मनोज टिग्गा, कर की तुलना में भाजपा के पुराने नेता हैं और उन्हें संसदीय राजनीति का ज्यादा अनुभव है। वह अलीपुरद्वार जिले के मदारीहाट ब्लॉक के एक दूर-दराज गांव से आते हैं। 2004 में, उन्होंने पहली बार भाजपा उम्मीदवार के तौर पर अलीपुरद्वार लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था।
वह जीते तो नहीं, लेकिन कांग्रेस के बाद दूसरे स्थान पर रहे। उन्होंने 2009 में फिर से लोकसभा चुनाव और 2011 के विधानसभा चुनावों में मदारीहाट विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन दोनों बार हार गए।
हालांकि, 2016 के विधानसभा चुनावों में वह भाजपा उम्मीदवार के तौर पर मदारीहाट से जीते। 2021 के विधानसभा चुनावों में भी उन्होंने मदारीहाट से जीत हासिल की। जहां सुवेंदु अधिकारी विपक्ष के नेता बने, वहीं टिग्गा पश्चिम बंगाल विधानसभा में भाजपा विधायक दल के मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) बने। बाद में, अलीपुरद्वार जिले में पार्टी को मजबूत करने के लिए उन्हें जिला भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया।
2024 के लोकसभा चुनावों में, टिग्गा को अलीपुरद्वार लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया। वह जीते और सांसद बने। बाद में वह पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष बने। इस बार उन्हें राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किया गया है।
--आईएएनएस
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