औरंगाबाद में अफीम की तस्करी के मामले में दो को 10 साल की कठोर सजा
पटना, 12 सितंबर (आईएएनएस)। पटना जोनल यूनिट की नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने बिहार के औरंगाबाद जिले में 5.250 किलोग्राम अफीम की बरामदगी से जुड़े एक मादक पदार्थ तस्करी मामले में दो आरोपियों को दोषी ठहराने में सफलता हासिल की है। अदालत ने दोनों को 10 साल की कठोर सजा सुनाई और प्रत्येक पर 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया। जुर्माना न भरने की स्थिति में प्रत्येक दोषी को अतिरिक्त एक साल की साधारण जेल की सजा काटनी होगी।
खुफिया जानकारी के आधार पर एनसीबी ने 24 फरवरी, 2021 को औरंगाबाद के टाउन पुलिस स्टेशन इलाके में रामाबंध बस स्टैंड पर आरोपी प्रमोद प्रसाद को रोका और उसके पास से 5.250 किलोग्राम अफीम बरामद की।
एनसीबी के अनुसार, यह अफीम झारखंड के डाल्टनगंज से लाई गई थी और इसे बिहार के औरंगाबाद ले जाया जा रहा था।
यह मामला नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट, 1985 की धाराओं के तहत एनसीबी पटना जोनल यूनिट में दर्ज किया गया था। बाद की जांच के दौरान सप्लायर बिकेश कुमार गुप्ता को भी गिरफ्तार किया गया।
एनसीबी ने कहा कि उसकी जांच में ऐसे सबूत मिले जिन्हें बाद में दोनों आरोपियों की संलिप्तता साबित करने के लिए अदालत में पेश किया गया।
औरंगाबाद के पहले अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-विशेष न्यायाधीश ने गया जिले के इमामगंज निवासी प्रमोद प्रसाद और झारखंड के पलामू जिले के पांकी निवासी बिकेश कुमार गुप्ता उर्फ विकास कुमार गुप्ता को एनडीपीएस एक्ट के तहत अपराधों का दोषी पाया।
एनसीबी ने इस सजा का श्रेय अपने अधिकारियों द्वारा की गई जांच और अभियोजन को दिया और कहा कि वह नशीले पदार्थों की अवैध तस्करी को रोकने और नशीले पदार्थों के दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है।
ब्यूरो ने आम जनता से भी अपील की है कि वे मानस पोर्टल या हेल्पलाइन नंबर 1933 के माध्यम से नशीले पदार्थों और साइकोट्रोपिक पदार्थों की अवैध तस्करी के बारे में जानकारी साझा करें। एनसीबी ने कहा कि मुखबिरों की पहचान पूरी तरह से गोपनीय रखी जाएगी।
--आईएएनएस
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