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तमिलनाडु : दिनाकरन ने राज्यपाल के भाषण को 'सोने की परत चढ़ा टिन' बताया, टीवीके सरकार पर निशाना साधा

चेन्नई, 18 जून (आईएएनएस)। एएमएमके के महासचिव टीटीवी. दिनाकरन ने गुरुवार को टीवीके के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने विधानसभा में दिए गए राज्यपाल के अभिभाषण को 'सोने का पानी चढ़ा टिन' बताया, जिसका मतलब 'देखने में तो शानदार, लेकिन असल में उसमें कोई दम या सच्चाई नहीं होने' से है।
 
तमिलनाडु : दिनाकरन ने राज्यपाल के भाषण को 'सोने की परत चढ़ा टिन' बताया, टीवीके सरकार पर निशाना साधा

चेन्नई, 18 जून (आईएएनएस)। एएमएमके के महासचिव टीटीवी. दिनाकरन ने गुरुवार को टीवीके के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने विधानसभा में दिए गए राज्यपाल के अभिभाषण को 'सोने का पानी चढ़ा टिन' बताया, जिसका मतलब 'देखने में तो शानदार, लेकिन असल में उसमें कोई दम या सच्चाई नहीं होने' से है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में दिनाकरन ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा तैयार और राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर द्वारा पेश किए गए नीतिगत भाषण में राज्य की स्वायत्तता, महिलाओं के कल्याण और सुरक्षा, सामाजिक न्याय, समान अवसर और समावेशी शासन जैसे सिद्धांतों पर आधारित होने का दावा किया गया था। उन्होंने तर्क दिया कि भाषण राज्य के सामने आने वाले प्रमुख मुद्दों को संबोधित करने में विफल रहा और इसके बजाय शासन की एक भ्रामक तस्वीर पेश की।

पूर्व मुख्यमंत्री सी.एन. अन्नादुरई के इस कथन से भाषण की शुरुआत का जिक्र करते हुए कि 'लोग ही देश के असली मालिक हैं,' दिनाकरन ने आरोप लगाया कि सरकार ने अन्ना की विरासत को चुनिंदा रूप से अपनाया, जबकि उनके व्यापक दृष्टिकोण को नजरअंदाज कर दिया।

उन्होंने दो-भाषा नीति को दोहराने और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कुछ पहलुओं का विरोध करने की आलोचना की, और दावा किया कि इस तरह के रुख छात्रों के शैक्षिक अवसरों को सीमित करके उन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।

एएमएमके नेता ने आरोप लगाया कि तमिलनाडु द्वारा बार-बार उठाई गई कई मांगों को बिना किसी ठोस कार्ययोजना के पिछले राज्यपाल के भाषणों से केवल कॉपी किया गया था। इनमें मद्रास उच्च न्यायालय में कार्यवाही की भाषा के रूप में तमिल को शामिल करना, चेन्नई में सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच स्थापित करना, शिक्षा को समवर्ती सूची से राज्य सूची में स्थानांतरित करना, मछुआरों की समस्याओं का स्थायी समाधान सुनिश्चित करना और नदियों को जोड़ना शामिल है।

दिनाकरन ने कर्नाटक की प्रस्तावित मेकेदातु बांध परियोजना और मुल्लापेरियार में नए बांध के लिए केरल की बार-बार की मांगों का कड़ा विरोध न करने के लिए भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने तर्क दिया कि यह चुप्पी तमिलनाडु के अधिकारों और किसानों के हितों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल कांग्रेस के प्रभाव को दिखाती है।

महिलाओं की सुरक्षा पर सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए, उन्होंने महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हत्या, डकैती और अपराध की हालिया घटनाओं की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल का यह दावा कि सरकार महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल बनाएगी, जमीनी हकीकत से अलग लगता है।

दिनाकरन ने निराशा व्यक्त की कि महिलाओं के लिए वित्तीय सहायता, मुफ्त एलपीजी सिलेंडर और अन्य कल्याणकारी योजनाओं सहित कई प्रमुख चुनावी वादे भाषण में शामिल नहीं थे। उन्होंने सीएम सी. जोसेफ विजय से पूर्व नेताओं सी.एन. अन्नादुरई और एम.जी. रामचंद्रन की शासन विरासत का अनुसरण करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अपनी शानदार भाषा और बड़े-बड़े दावों के बावजूद, राज्यपाल का अभिभाषण आखिरकार 'सोने का पानी चढ़े टिन' जैसा था, जो ऊपर से तो आकर्षक था, लेकिन उसमें कोई ठोस बात नहीं थी।

--आईएएनएस

एससीएच/एबीएम