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सिस्टम पर सवाल उठाने के बजाय चुनाव जीतकर सरकार को हराएं: पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज हेमंत गुप्ता

नई दिल्ली, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश हेमंत गुप्ता ने शुक्रवार को लोगों से संस्थाओं पर भरोसा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जो लोग सरकार से नाखुश हैं, उन्हें चुनाव में हारने के बाद सिस्टम पर सवाल उठाने के बजाय चुनावों के जरिए उसे हराने की कोशिश करनी चाहिए।
 

नई दिल्ली, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश हेमंत गुप्ता ने शुक्रवार को लोगों से संस्थाओं पर भरोसा करने की अपील की। ​​उन्होंने कहा कि जो लोग सरकार से नाखुश हैं, उन्हें चुनाव में हारने के बाद सिस्टम पर सवाल उठाने के बजाय चुनावों के जरिए उसे हराने की कोशिश करनी चाहिए।

आईएएनएस से ​​बात करते हुए पूर्व जज हेमंत गुप्ता ने कहा, "मेरा कहना है कि आपको संस्थाओं पर भरोसा करना चाहिए। सरकारों से आपकी असहमति हो सकती है, चुनाव आएंगे और तब आप उन्हें हरा सकते हैं। यह आसान है। लेकिन जब आप जीत नहीं पाते, तो यह दावा करना कि सड़कों पर आप जो कहते हैं वही सही है, गलत है। सिस्टम ऐसे काम नहीं करता है।"

उन्होंने बताया कि विपक्षी पार्टियों ने इसी चुनावी सिस्टम के जरिए कुछ जगहों पर सरकारें बनाई हैं, जबकि दूसरी जगहों पर दूसरी पार्टियों ने ऐसा किया है।

2024 के लोकसभा चुनावों का जिक्र करते हुए गुप्ता ने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दावा किया था कि कांग्रेस ने भाजपा को हरा दिया है। हालांकि, उन्होंने इस दावे पर सवाल उठाया और कहा कि कांग्रेस ने 99 सीटें जीती थीं और बहुमत हासिल करने में नाकाम रही थी।

हेमंत गुप्ता ने कहा, "वह बयान तब भी गुमराह करने वाला था, और आज जो बातें कही जा रही हैं, वे और भी ज्यादा गुमराह करने वाली हैं।" गुप्ता ने इस बात पर भी जोर दिया कि चुनाव आयुक्त का कार्यकाल कानून द्वारा सुरक्षित होता है, ठीक वैसे ही जैसे जज का होता है, और उन्हें मनमाने ढंग से हटाया नहीं जा सकता।

उन्होंने कहा, "चुनाव आयुक्त का कार्यकाल जज के कार्यकाल जितना ही सुरक्षित होता है, उन्हें केवल महाभियोग के जरिए ही हटाया जा सकता है, मनमाने ढंग से नहीं। कोई भी इस्तीफे की मांग कर सकता है, लेकिन कुछ लोग बहुत अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हैं।"

चुनाव आयुक्तों के खिलाफ अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल पर आपत्ति जताते हुए गुप्ता ने कहा कि वे सम्मानजनक संबोधन के हकदार हैं।

उन्होंने आईएएनएस से ​​कहा, "आयुक्त काफी उम्रदराज होते हैं, उनकी उम्र पिता या दादा जैसी होती है। किसी को अपमानजनक ढंग से 'ज्ञानू' कहना स्वीकार्य नहीं है। क्या कोई अपने पिता को इस तरह संबोधित करेगा? भले ही कोई 'श्री' या 'जी' जैसे सम्मानजनक शब्दों का इस्तेमाल न करे, फिर भी उन्हें कम से कम उनके नाम से सही ढंग से संबोधित करना चाहिए।"

चुनाव आयोग के समर्थन में 42 पूर्व जजों द्वारा लिखे गए पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए गुप्ता ने कहा कि संस्थाओं में भरोसे की कमी देश के सिस्टम में जनता के विश्वास को कमजोर कर सकती है। उन्होंने कहा, "अगर हम संस्थाओं पर भरोसा नहीं करेंगे, तो देश का भरोसा टूट जाएगा। हम हर शिकायत लेकर कोर्ट जाते हैं और सांसद संसद में मुद्दे उठाते हैं। अगर आप हर संस्था पर शक करने लगेंगे, तो सिस्टम का क्या होगा? यह राजनीतिक मकसद पूरा करने के लिए जानबूझकर पैदा किया गया अविश्वास है।"

गुप्ता ने चुनाव आयोग को लेकर हाल ही में हुए प्रदर्शनों और मीडिया कवरेज पर भी टिप्पणी की और कहा कि इन घटनाओं पर अलग-अलग पक्षों की प्रतिक्रियाएं आई हैं। उन्होंने कहा, "पिछले दो-तीन दिनों में काफी हलचल, प्रदर्शन और मीडिया में एक तरह की चर्चा रही है। इसके जवाब में दूसरा पक्ष भी सामने आना ही था।"

भारत के एक प्रमुख दैनिक समाचार पत्र में छपी उस रिपोर्ट का जिक्र करते हुए, जिसमें कथित आंतरिक मतभेदों या कुछ 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (एसआईआर) प्रस्तावों को मंजूरी न मिलने की बात कही गई थी, गुप्ता ने कहा कि यह स्पष्टीकरण भी सामने आया है कि सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।

उन्होंने आईएएनएस को बताया, "चर्चा के दौरान स्वाभाविक रूप से अलग-अलग राय सामने आती हैं, ठीक वैसे ही जैसे कोर्ट में होती है, जब तक कि किसी एक राय पर आम सहमति नहीं बन जाती।"

--आईएएनएस

एसडी/एएस