ट्रंप अगले महीने आसियान और एपेक शिखर सम्मेलनों में होंगे शामिल, मनीला से जाएंगे चीन
वॉशिंगटन, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। व्हाइट हाउस ने बताया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले महीने फिलीपींस की राजधानी मनीला में होने वाले 'एसोसिएशन ऑफ साउथईस्ट एशियन नेशंस' (आसियान) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इसके बाद वह चीन में होने वाले एशिया-पैसिफिक इकोनॉमिक कोऑपरेशन (एपेक) शिखर सम्मेलन में शामिल होने जाएंगे।
व्हाइट हाउस ने रविवार को न्यूयॉर्क पोस्ट को बताया कि ट्रंप 16 नवंबर को मनीला में आयोजित आसियान शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। इसके बाद वह चीन के शेनझेन जाएंगे, जहां 17 से 19 नवंबर तक एपेक सम्मेलन होगा।
अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, इस यात्रा का मकसद दक्षिण-पूर्व एशिया में अमेरिका की अपने सहयोगी देशों के प्रति प्रतिबद्धता दिखाना और अमेरिकी आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े लक्ष्यों को आगे बढ़ाना है।
रिपोर्ट के अनुसार, चीन में ट्रंप की मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होने की संभावना है। इस साल दोनों नेताओं की यह तीसरी आमने-सामने की बैठक हो सकती है। इससे पहले मई में बीजिंग में दोनों की मुलाकात हुई थी जबकि पिछले महीने शी जिनपिंग ने व्हाइट हाउस का दौरा किया था।
इस साल आसियान की अध्यक्षता कर रहे फिलीपींस ने 49वें आसियान शिखर सम्मेलन और उससे जुड़े कार्यक्रमों के लिए 16 से 18 नवंबर तक मेट्रो मनीला में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। इन कार्यक्रमों में ईस्ट एशिया समिट भी शामिल है, जिसमें भारत और अमेरिका दोनों सदस्य हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने जुलाई में ही राष्ट्रपति की इस सम्मेलन में रुचि का संकेत दिया था, जब वह मनीला में आसियान देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल हुए थे। उस समय रुबियो ने पत्रकारों से कहा था, "मुझे लगता है कि राष्ट्रपति ट्रंप जाना चाहेंगे। हालांकि, मैं फिलहाल उनका कार्यक्रम नहीं जानता।"
सितंबर में नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आसियान-भारत शिखर सम्मेलन और ईस्ट एशिया समिट में शामिल होने का निमंत्रण दोबारा दिया था। मार्कोस ने उस मुलाकात के बाद जारी बयान में कहा था, "मैं नवंबर में मनीला में प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करने के लिए उत्सुक हूं।"
अगर मनीला में मोदी और ट्रंप की मुलाकात होती है, तो यह ऐसे समय में होगी जब वॉशिंगटन और नई दिल्ली के संबंध शुल्क (टैरिफ) और भारत की ओर से रूसी तेल की खरीद को लेकर कुछ तनाव के दौर से गुजर रहे हैं।
पिछले वर्ष प्रधानमंत्री मोदी ने कुआलालंपुर में आयोजित आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में वर्चुअल रूप से हिस्सा लिया था। वहीं ईस्ट एशिया समिट में उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को भेजा था। उस समय ट्रंप स्वयं सम्मेलन में मौजूद थे और दोनों नेताओं की मुलाकात नहीं हुई थी।
दोनों नेताओं की आखिरी बातचीत 30 सितंबर को टेलीफोन पर हुई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने उस बातचीत को 'सार्थक' बताया था।
इस बीच, 18 अक्टूबर एक महत्वपूर्ण तारीख मानी जा रही है। लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026 की धारा 113 के तहत राष्ट्रपति को यह फैसला लेना है कि रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाया जाए या नहीं। 2022 के बाद से भारत रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल रहा है।
हालांकि, कानून में यह भी प्रावधान है कि अमेरिकी राष्ट्रपति यदि कांग्रेस को यह भरोसा दिला दें कि शुल्क में छूट देना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है, तो वे इस कार्रवाई को टाल सकते हैं।
--आईएएनएस
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