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पश्चिम बंगाल में चुनाव ड्यूटी के लिए बस किराया बढ़ा, परिवहन विभाग ने आयोग को दी जानकारी

कोलकाता, 23 मार्च (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल परिवहन विभाग ने औपचारिक रूप से चुनाव आयोग को उन बसों और वाहनों के संशोधित किराए के बारे में सूचित की है जिन्हें चुनावों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
 
पश्चिम बंगाल में चुनाव ड्यूटी के लिए बस किराया बढ़ा, परिवहन विभाग ने आयोग को दी जानकारी

कोलकाता, 23 मार्च (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल परिवहन विभाग ने औपचारिक रूप से चुनाव आयोग को उन बसों और वाहनों के संशोधित किराए के बारे में सूचित की है जिन्हें चुनावों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

परिवहन विभाग के प्रधान सचिव सौमित्र मोहन ने सोमवार को चुनाव आयोग को अपडेटेड दरों की सूची सौंपी, जिसमें पिछले वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाई गई है। यह पत्र राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) को संबोधित था और इसमें वाहन किराए की दरों के साथ-साथ अन्य नियम और शर्तें भी विस्तार से बताई गई थीं।

अन्य राज्यों में चुनाव ड्यूटी के लिए जिन दरों पर बसें किराए पर ली जाती हैं, वे पश्चिम बंगाल की दरों की तुलना में काफी ज्यादा हैं। इनमें कम यात्री क्षमता वाली बसें भी शामिल हैं।

इसके परिणामस्वरूप, राज्य में निजी रूट बसों के मालिकों ने पहले ही संकेत दिया था कि वे बढ़ी हुई दरों को पूरा किए बिना अपने वाहन उपलब्ध कराने से इनकार कर देंगे, इस रुख ने परिवहन विभाग को मुश्किल स्थिति में डाल दिया था।

चुनाव आयोग ने वाहनों की उपलब्धता के संबंध में परिवहन विभाग से बार-बार जानकारी मांगी थी। इस बीच, निजी बस मालिकों ने अपना रुख नहीं बदला कि वे किराया न बढ़ाए जाने पर अपने वाहन नहीं देंगे। कई बैठकों के बाद, परिवहन विभाग ने अब लिखित पत्र के माध्यम से मुख्य निर्वाचन अधिकारी को संशोधित किराया दरों की औपचारिक जानकारी दे दी है।

ऑल बंगाल बस-मिनीबस समन्वय समिति के महासचिव राहुल चटर्जी ने बताया कि चुनाव संबंधी कार्यों के लिए हर साल बसों और वाहनों की मांग की जाती है। हालांकि, पश्चिम बंगाल में किराए की दरें अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम रही हैं। पहले एक बस का किराया 2,530 रुपए था, जिसमें प्रत्येक चालक दल के सदस्य को 250 रुपए का भत्ता मिलता था।

इस संदर्भ में उन्होंने कहा, "हमने बस किराए और चालक दल के सदस्यों के दैनिक भत्ते दोनों को कवर करने के लिए 10 प्रतिशत की वृद्धि की मांग की है। हमने पिछले साल अक्टूबर में परिवहन विभाग को इस मामले से अवगत कराया था। अब हमने औपचारिक रूप से यह अपील चुनाव आयोग को सौंप दी है।"

--आईएएनएस

एएसएच/डीकेपी