उज्जैन त्रासदी: 22 घंटे के बचाव अभियान के बाद बोरवेल में फंसे तीन वर्षीय बच्चे की मौत
उज्जैन/बड़नगर, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर से लगभग 75 किलोमीटर दूर बड़नगर तहसील के झालरिया गांव में एक खुले बोरवेल में गिरने से तीन वर्षीय भागीरथ देवासी की मौत हो गई। इसके साथ ही लगभग 22 घंटे तक चला एक बड़ा बचाव अभियान का दिल दहला देने वाला अंत हो गया।
राजस्थान के पाली जिले के गुडनला गांव के चरवाहे प्रवीण देवासी के तीन बेटों में सबसे छोटा यह बच्चा गुरुवार शाम करीब 7:30-8:00 बजे बोरवेल में फिसल गया।
एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि बच्चे की मौत हो गई है। परिवार तीन दिन पहले ही भेड़ चराने के लिए इस इलाके में आया था।
परिवार के सदस्यों के अनुसार, एक भेड़ ने गलती से खुले बोरवेल को ढकने वाले पत्थर को हटा दिया। उत्सुक छोटा भागीरथ पीछे से आया, अंदर झांकने के लिए ढक्कन हटाया और उसी समय बोरवेल में गिर गया।
पास ही में काम कर रही उसकी मां ने इस भयावह क्षण को देखा लेकिन समय पर उस तक नहीं पहुंच सकी।
भोपाल से राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनए) और हरदा, इंदौर और उज्जैन से राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एनए) की इकाइयों को शामिल करते हुए तुरंत एक व्यापक संयुक्त बचाव अभियान शुरू किया गया।
बच्चा लगभग 70 फीट की गहराई पर फंसा हुआ था।
बचाव दल ने बोरवेल में नीचे उतारे गए कैमरे के माध्यम से लगातार उसकी निगरानी की और शुरुआत में उसे स्थिर रखने के लिए ऑक्सीजन की आपूर्ति की।
बचाव दल चौबीसों घंटे काम करते रहे और कई पोक्लेन और अर्थ एक्सकेवेटर का उपयोग करके समानांतर गड्ढा खोदते रहे। लगभग 40 फीट की गहराई तक पहुंचने के बाद कठोर चट्टानों के कारण खुदाई की गति काफी धीमी हो गई।
बाधाओं को तोड़ने के लिए भोपाल और इंदौर से एक हैमर मशीन को तुरंत बुलाया गया।
बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बचाव घेरा और रस्सी लगाने के प्रयास भी किए गए।
घटनास्थल पर मौजूद उज्जैन के पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने पहले कहा था कि बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
एक दर्जन से अधिक भारी मशीनों और विशेष बचाव कर्मियों के अथक प्रयासों के बावजूद, शुक्रवार को बचाव अभियान दुखद रूप से समाप्त हो गया जब भागीरथ को मृत घोषित कर दिया गया।
मृत्यु के सटीक हालात और समय का अभी भी पता लगाया जा रहा है, लेकिन लंबे समय तक फंसे रहने और पथरीले इलाके की वजह से दुर्घटना से पार पाना असंभव साबित हुआ।
इस घटना से गांव और पशुपालक समुदाय में गहरा सदमा फैल गया है। ग्रामीण भारत में बच्चों से जुड़ी बोरवेल दुर्घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं, अक्सर कृषि क्षेत्रों में खुले या खराब तरीके से सुरक्षित बोरवेल के कारण ऐसा होता है।
इस त्रासदी ने एक बार फिर से सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करने की तत्काल आवश्यकता को उजागर किया है, जिसमें चरागाह और कृषि क्षेत्रों में बोरवेल को ढकना और नियमित निरीक्षण करना अनिवार्य है।
--आईएएनएस
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