तमिलनाडु: आर्द्रभूमि (वेटलैंड) परिवर्तन के नियमों में बदलाव, मंजूरी प्रक्रिया से हटाए गए जिला कलेक्टर
चेन्नई, 7 नवंबर (आईएएनएस)। तमिलनाडु सरकार ने गैर-योजना क्षेत्रों में कृषि योग्य भूमि को गैर-कृषि उपयोग के लिए बदलने की प्रक्रिया में बड़े बदलाव किए हैं। इसके तहत, मंजूरी देने के अधिकार जिला कलेक्टरों से हटाकर 'टाउन एंड कंट्री प्लानिंग निदेशालय' (डीटीसीपी) को सौंप दिए गए हैं।
सरकार के इस फैसले से जमीन मालिकों, बिल्डरों और डेवलपर्स को फायदा होने की उम्मीद है। इससे प्रक्रिया में होने वाली देरी कम होगी और जमीन के उपयोग में बदलाव के आवेदनों पर तेजी से काम हो सकेगा, जबकि मौजूदा सुरक्षा नियम और शर्तें पहले की तरह ही लागू रहेंगी।
नई व्यवस्था के तहत, 'टाउन एंड कंट्री प्लानिंग निदेशक' सीधे तौर पर पूर्व-सहमति दे सकते हैं। इससे पुरानी व्यवस्था खत्म हो गई है, जिसमें आवेदकों को योजना की अनुमति लेने से पहले जिला कलेक्टर से मंजूरी लेनी पड़ती थी।
आवास और शहरी विकास विभाग ने 4 नवंबर को सरकारी आदेश जारी किया। इसके जरिए 'तमिलनाडु टाउन एंड कंट्री प्लानिंग एक्ट, 1971' में किए गए उन संशोधनों को लागू किया गया है, जिन्हें हाल ही में विधानसभा सत्र के दौरान मंजूरी दी गई थी।
विभाग के सचिव आर. किर्लोश कुमार ने बताया कि इन बदलावों का मकसद मंजूरी प्रक्रिया को और अधिक कुशल बनाना है। इस कानून की धारा 47-ए और 9-एफ में किए गए संशोधनों के तहत, पूर्व-सहमति देने की जिम्मेदारी जिला कलेक्टरों से हटाकर डीटीसीपी को सौंप दी गई है।
पहले, जो डेवलपर्स या जमीन मालिक अपनी कृषि योग्य भूमि का उपयोग बदलना चाहते थे, उन्हें डीटीसीपी से योजना की अनुमति मांगने से पहले जिला कलेक्टर से मंजूरी लेनी पड़ती थी। नई प्रक्रिया से यह दो-चरणीय मंजूरी व्यवस्था खत्म हो गई है। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पर्यावरण और जमीन से जुड़े सुरक्षा नियम पहले की तरह ही लागू रहेंगे।
डीटीसीपी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आवेदकों को संबंधित विभागों से सभी जरूरी 'नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (एनओसी) लेना अभी भी अनिवार्य होगा। सरकार ने जमीन के उपयोग में बदलाव के लिए जरूरी जांच-पड़ताल की शर्तों में कोई ढील नहीं दी है। नई गाइडलाइंस के अनुसार, आवेदकों को ऑनलाइन 'सिंगल विंडो पोर्टल' के जरिए नौ जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे।
इनमें मालिकाना हक या लीज के दस्तावेज, पट्टा, चिट्टा और अडंगल रिकॉर्ड (पिछले तीन फसली वर्षों के रिकॉर्ड), ड्रेनेज प्लान और प्रस्तावित जगह के 500 मीटर के दायरे में मौजूद विकास कार्यों को दर्शाने वाले टोपोग्राफिकल मैप शामिल हैं।
आवेदकों को एक शपथ-पत्र (एफिडेविट) भी देना होगा, जिसमें यह पुष्टि करनी होगी कि जिस जमीन के उपयोग में बदलाव किया जा रहा है, उसमें कोई सरकारी 'पोराम्बोके' जमीन या किसी दूसरे व्यक्ति की संपत्ति शामिल नहीं है।
सरकार ने 2017 के नियमों के 'नियम 6' को हटा दिया है, जिसके तहत जिला कलेक्टरों द्वारा निरीक्षण और जांच-पड़ताल करना अनिवार्य था। हालांकि, नियम 7 के तहत निर्धारित सुरक्षा उपाय लागू रहेंगे। निर्माण उद्योग ने इस फैसले का स्वागत किया है।
बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रतिनिधियों ने बताया कि पहले मंजूरियों में दो से तीन महीने लग जाते थे। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई प्रक्रिया से प्रोसेसिंग का समय घटकर 15-30 दिन रह जाएगा। यह फैसला तमिलनाडु सरकार की उस व्यापक पहल का हिस्सा है, जिसका मकसद भूमि-उपयोग नियमों को आसान बनाना और निवेश को बढ़ावा देना है।
--आईएएनएस
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