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नीलगिरी क्षेत्र में 7-8 मार्च को होगी गिद्धों की गणना, तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक वन विभाग मिलकर करेंगे सर्वे

चेन्नई, 5 मार्च (आईएएनएस)। तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक के वन विभाग 7 और 8 मार्च को नीलगिरी क्षेत्र में एक समन्वित गिद्ध गणना करेंगे। इसका उद्देश्य दक्षिण भारत के सबसे महत्वपूर्ण आवासों में से एक में संकटग्रस्त गिद्धों की आबादी का आकलन करना है। गणना के दौरान टीमें तय समय पर गिद्धों की गतिविधियों का रिकॉर्ड रखेंगी और उड़ान की दिशा व समय को दर्ज करेंगी, ताकि दोहरी गणना से बचा जा सके।
 
नीलगिरी क्षेत्र में 7-8 मार्च को होगी गिद्धों की गणना, तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक वन विभाग मिलकर करेंगे सर्वे

चेन्नई, 5 मार्च (आईएएनएस)। तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक के वन विभाग 7 और 8 मार्च को नीलगिरी क्षेत्र में एक समन्वित गिद्ध गणना करेंगे। इसका उद्देश्य दक्षिण भारत के सबसे महत्वपूर्ण आवासों में से एक में संकटग्रस्त गिद्धों की आबादी का आकलन करना है। गणना के दौरान टीमें तय समय पर गिद्धों की गतिविधियों का रिकॉर्ड रखेंगी और उड़ान की दिशा व समय को दर्ज करेंगी, ताकि दोहरी गणना से बचा जा सके।

यह सर्वेक्षण नीलगिरी बायोस्फीयर रिजर्व के भीतर प्रमुख वन क्षेत्रों पर केंद्रित होगा, जो देश के दक्षिणी भाग में गिद्धों के लिए एक महत्वपूर्ण गढ़ के रूप में उभरा है।

यह अभ्यास पिछली गणना के उत्साहजनक परिणामों के बाद किया जा रहा है, जिसमें तीनों राज्यों में गिद्धों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई थी।

वन्यजीव अधिकारियों के बीच आशावाद बढ़ाने वाली एक नई घटना में, मुदुमलाई टाइगर रिजर्व के फील्ड स्टाफ ने हाल ही में रिजर्व के मुख्य क्षेत्र में पहली बार एक गिद्ध का घोंसला देखा है। अब तक, अधिकांश घोंसला बनाने की गतिविधियां बफर जोन में ही दर्ज की गई थीं।

वन अधिकारियों ने घोंसला बनाने के व्यवहार और जनसंख्या के रुझानों पर बारीकी से नजर रखने के लिए इस वर्ष के सर्वेक्षण हेतु मुदुमलाई के मुख्य क्षेत्र में आठ महत्वपूर्ण स्थानों की पहचान की है। समन्वित सर्वेक्षण में नीलगिरी क्षेत्र के कई प्रमुख वन्यजीव आवासों को शामिल किया जाएगा।

तमिलनाडु में निगरानी मुदुमलाई टाइगर रिजर्व, सत्यमंगलम टाइगर रिजर्व और तिरुनेलवेली वन्यजीव अभयारण्य में की जाएगी।

कर्नाटक में टीमें बांदीपुर टाइगर रिजर्व, नागरहोल टाइगर रिजर्व और बिलिगिरि रंगनाथ मंदिर (बीआरटी) टाइगर रिजर्व का सर्वेक्षण करेंगी, जबकि केरल में यह अभ्यास वायनाड वन्यजीव अभयारण्य पर केंद्रित रहेगा।

अधिकारियों के अनुसार नीलगिरी क्षेत्र दक्षिण भारत में गिद्धों की आबादी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण पारिस्थितिक भूमिका निभाता है। यह न केवल प्रजनन कॉलोनियों का समर्थन करता है, बल्कि प्रवासी गिद्धों के लिए भी सुरक्षित ठिकाना प्रदान करता है।

भारत में गिद्धों की नौ प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से सात तमिलनाडु में दर्ज की गई हैं। इनमें श्वेत पूंछ वाला गिद्ध, लंबी चोंच वाला गिद्ध और लाल सिर वाला गिद्ध जैसी स्थानीय प्रजनन करने वाली प्रजातियां शामिल हैं।

अन्य प्रजातियों में मिस्र का गिद्ध, हिमालयी ग्रिफॉन, सिनेरियस गिद्ध और यूरेशियन ग्रिफॉन शामिल हैं। आमतौर पर इस क्षेत्र में प्रवासी आगंतुकों के रूप में देखी जाती हैं।

नीलगिरी क्षेत्र में यह चौथी समन्वित गणना होगी। लगभग 4,670 वर्ग किलोमीटर में फैले 106 महत्वपूर्ण स्थानों पर किए गए पिछले सर्वेक्षण में गिद्धों की संख्या 320 से बढ़कर 390 हो गई थी। तमिलनाडु में सबसे अधिक 157 गिद्ध देखे गए, उसके बाद केरल में 125 और कर्नाटक में 106 गिद्ध देखे गए।

घोंसलों की गणना प्रजनन वाली चट्टानों और पेड़ों पर केंद्रित होगी। पिछले सर्वेक्षण में 75 सक्रिय घोंसले दर्ज किए गए थे, जिनमें से 54 अकेले मुदुमलाई टाइगर रिजर्व में पाए गए थे।

हर सर्वे टीम में कम से कम चार सदस्य होंगे, जिनमें एक प्रशिक्षित गिद्ध विशेषज्ञ भी शामिल रहेगा। फील्ड टीमों को दूरबीन, कैमरा, जीपीएस उपकरण, कंपास और मानकीकृत डेटा शीट दी जाएंगी, ताकि आंकड़ों का सटीक और समान रूप से संग्रह किया जा सके।

--आईएएनएस

एसएके/वीसी