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घोंसला बनाने के मौसम से पहले तमिलनाडु वन विभाग ने ओलिव रिडले कछुओं के संरक्षण के तेज किए प्रयास

चेन्नई, 5 नवंबर (आईएएनएस)। तमिलनाडु वन विभाग ने चेन्नई के तटवर्ती इलाकों में कई संरक्षण उपाय शुरू किए हैं। इनका उद्देश्य लुप्तप्राय 'ऑलिव रिडले' समुद्री कछुओं और उनके आवासों की सुरक्षा करना है। यह कदम वार्षिक प्रवास और घोंसला बनाने के मौसम से पहले उठाया गया है, जिसके दिसंबर में शुरू होने की उम्मीद है।
 

चेन्नई, 5 नवंबर (आईएएनएस)। तमिलनाडु वन विभाग ने चेन्नई के तटवर्ती इलाकों में कई संरक्षण उपाय शुरू किए हैं। इनका उद्देश्य लुप्तप्राय 'ऑलिव रिडले' समुद्री कछुओं और उनके आवासों की सुरक्षा करना है। यह कदम वार्षिक प्रवास और घोंसला बनाने के मौसम से पहले उठाया गया है, जिसके दिसंबर में शुरू होने की उम्मीद है।

चेन्नई वन्यजीव प्रभाग ने कछुओं के लिए एक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से समुद्र तट और नावों के जरिए गश्त (पेट्रोलिंग) शुरू की है। यह पहल कछुओं के अंडे देने के लिए तट पर आने के दौरान उनकी सुरक्षा के लिए बनाई गई एक व्यापक संरक्षण रणनीति का हिस्सा है।

चेन्नई के वन्यजीव वार्डन भार्गव तेजा ने बताया कि विभाग की मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) के अनुसार, नवंबर में गश्त का काम शुरू कर दिया गया है। यह गश्त सप्ताह में तीन से चार बार की जाएगी और हर बार दो से तीन घंटे तक चलेगी। इसमें उन संवेदनशील तटीय इलाकों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जहां कछुए अक्सर घोंसले बनाते हैं।

मुख्यालय की वन्यजीव रेंज, चेन्नई जिले में मरीना बीच से लेकर नीलंकरई और उथंडी तक के तटीय इलाकों की निगरानी करेगी, जबकि पुलिकट रेंज अपने तटीय क्षेत्र में इसी तरह के संरक्षण कार्य करेगी। अधिकारी संवेदनशील गश्ती क्षेत्रों की पहचान कर उन्हें चिह्नित करेंगे, नियमित रूप से समुद्र तट की सफाई करेंगे और ऐसी रुकावटों को हटाएंगे जो कछुओं के घोंसला बनाने की प्रक्रिया में बाधा डाल सकती हैं।

विभाग स्वयंसेवकों को कछुआ संरक्षण तकनीकों, घोंसले बनाने वाली जगहों की पहचान करने और रिपोर्टिंग प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण देने की भी योजना बना रहा है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि जब भी कछुओं या उनके घोंसलों पर कोई खतरा आए, तो समय रहते जरूरी कदम उठाए जा सकें।

इस बीच, 'मरीन एलीट फोर्स' (एमईएफ) ने मत्स्य विभाग के साथ मिलकर चेन्नई के तट पर नावों के जरिए गश्त शुरू कर दी है, ताकि मछली पकड़ने की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। यह विशेष बल ट्रॉलर और मछली पकड़ने वाली अन्य नावों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखेगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि समुद्री वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए सरकार द्वारा मछली पकड़ने पर लगाए गए प्रतिबंधों का पालन हो रहा है।

मछली पकड़ने से जुड़ी गतिविधियां, खासकर संवेदनशील तटीय इलाकों में मशीनी ट्रॉलरों का चलना, 'ऑलिव रिडले' कछुओं के लिए बड़ा खतरा पैदा करता है, क्योंकि वे गलती से मछली पकड़ने वाले जालों में फंस सकते हैं।

'ऑलिव रिडले' कछुए हर साल अंडे देने के लिए तमिलनाडु के तट पर आते हैं। इसलिए, प्रजनन के मौसम में समुद्र तटों और तटीय इलाकों की सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है। संरक्षण के प्रयासों में मुख्य रूप से कछुओं की अनजाने में होने वाली मौतों को रोकना, अंडे देने वाली जगहों को इंसानी दखल से बचाना और यह सुनिश्चित करना शामिल है कि अंडे और उनसे निकले बच्चे सुरक्षित रहें।

वन अधिकारियों को उम्मीद है कि आने वाले प्रजनन के मौसम में चेन्नई के तट पर समन्वित गश्त, उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा और स्वयंसेवकों की भागीदारी से संरक्षण के प्रयासों को और मजबूती मिलेगी।

--आईएएनएस

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