तमिलनाडु जिला बाल संरक्षण इकाई के कर्मियों ने सीएम विजय से बाल सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की मांग की
चेन्नई, 20 जून (आईएएनएस)। तमिलनाडु की जिला बाल संरक्षण इकाइयों (डीसीपीयू) में कार्यरत कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से राज्य में बाल संरक्षण सेवाओं को मजबूत करने और इस क्षेत्र में काम कर रहे कर्मियों की लंबे समय से लंबित मांगों का समाधान करने की अपील की है।
मुख्यमंत्री को सौंपे गए एक ज्ञापन में कर्मचारियों ने बताया कि वे बाल कल्याण एवं विशेष सेवा विभाग (डीसीडब्ल्यूएसएस) के अंतर्गत कार्यरत हैं और किशोर न्याय (बालकों की देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत बाल कल्याण संबंधी योजनाओं के क्रियान्वयन में कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
विभाग बच्चों को शोषण से बचाने, बाल विवाह रोकने, बाल श्रम समाप्त करने, भीख मांगने के लिए मजबूर किए गए बच्चों के बचाव और कानून से संघर्ष की स्थिति में आने वाले बच्चों के पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कर्मचारियों ने कहा कि कई जिला बाल संरक्षण कार्यालय, किशोर न्याय बोर्ड और बाल कल्याण समितियां अभी भी किराए के भवनों या अपर्याप्त सुविधाओं वाले सरकारी परिसरों में संचालित हो रही हैं। उन्होंने बताया कि समर्पित वाहनों की कमी के कारण बच्चों से जुड़े आपातकालीन मामलों में समय पर हस्तक्षेप करना मुश्किल हो जाता है।
उनकी प्रमुख मांगों में प्रत्येक जिले में संकटग्रस्त बच्चों के लिए सभी आवश्यक सुविधाओं से युक्त अस्थायी आश्रय गृहों की स्थापना शामिल है। उनका कहना है कि इन केंद्रों में परामर्शदाता, चिकित्सक, विशेष शिक्षक और अन्य जरूरी सहायता सेवाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए ताकि बच्चों की समुचित देखभाल और पुनर्वास सुनिश्चित हो सके।
कर्मचारियों ने यह भी मांग की कि 18 वर्ष से कम आयु के कानून से संघर्ष की स्थिति में आने वाले बच्चों के लिए प्रत्येक जिले में विशेष पुनर्वास गृह स्थापित किए जाएं। उनका मानना है कि ऐसे केंद्र बच्चों को उचित देखभाल, परामर्श, शिक्षा और समाज में पुनः स्थापित होने के अवसर प्रदान करेंगे।
ज्ञापन में सरकार से विभाग की देखरेख में रहने वाले बच्चों के लिए वित्तीय सहायता योजनाओं का विस्तार करने का भी आग्रह किया गया है। कर्मचारियों का कहना है कि वर्तमान सहायता सीमित है और सभी पात्र लाभार्थियों तक नहीं पहुंच पा रही है।
बाल संरक्षण व्यवस्था को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने के लिए उन्होंने गांव, ब्लॉक, नगर पालिका और निगम स्तर पर बाल संरक्षण समितियों की गतिविधियों का विस्तार करने तथा ब्लॉक स्तर पर अतिरिक्त बाल संरक्षण अधिकारियों की नियुक्ति की सिफारिश की है।
कर्मचारियों के अनुसार, वे वर्ष 2012 से वार्षिक अनुबंध के आधार पर कार्य कर रहे हैं और 14 वर्षों से अधिक सेवा देने के बावजूद उन्हें नौकरी की सुरक्षा, दुर्घटना बीमा और सेवानिवृत्ति संबंधी कल्याण लाभ प्राप्त नहीं हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री से उनकी सेवाओं को नियमित करने, स्थायी नियुक्ति देने और कल्याणकारी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि बाल संरक्षण कर्मियों की कार्य स्थितियों में सुधार होने से राज्य में बाल कल्याण और सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता भी बढ़ेगी।
--आईएएनएस
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