तमिलनाडु विधानसभा ने 'तमिल थाई वाज्थु' को सर्वसम्मति से पारित किया, सरकारी कार्यक्रमों में गाना अनिवार्य
चेन्नई, 10 अगस्त (आईएएनएस)। सरकारी विभागों, शिक्षण संस्थानों और राज्य की ओर से संचालित अन्य निकायों के कार्यक्रमों में सबसे पहले राज्य गीत 'तमिल थाई वाज्थु' गाए जाने वाले प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया गया। मुख्यमंत्री विजय की ओर से पेश किए गए विशेष प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पास कर दिया गया।
मुख्यमंत्री विजय की ओर से पेश किए गए प्रस्ताव पर डीएमके, एआईएडीएमके, कांग्रेस, पीएमके, वीसीके, सीपीआई, भाजपा और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने समर्थन दिया। विभिन्न दलों के प्रतिनिधियों की ओर से प्रस्ताव के पक्ष में बोलने के बाद, स्पीकर जे.सी.डी. प्रभाकर ने सर्वसम्मति से पारित किया।
मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि तमिल भाषा राज्य के लोगों की पहचान, संस्कृति और भावनाओं का अभिन्न अंग है। उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यक्रमों में 'तमिल थाई वाज्थु' को प्राथमिकता देना तमिलनाडु की सांस्कृतिक परंपराओं और अधिकारों की रक्षा का सवाल है।
मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि मनोन्मनीयम सुंदरनार के लिखे गए 'मनोन्मनीयम' से लिया गया यह गीत 1970 में जारी सरकारी आदेश के बाद से ही सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत में गाया जाता रहा है। इसे 2021 में औपचारिक रूप से तमिलनाडु के राज्य गीत का दर्जा दिया गया था।
मुख्यमंत्री विजय ने राज्य गीतों के संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से 1 जुलाई, 2026 को जारी एक संचार का भी जिक्र किया। उन्होंने विधायकों से आग्रह किया कि वे इस मुद्दे को पार्टी की सीमाओं से ऊपर उठकर देखें और कहा कि 'तमिल थाई वाज्थु' का दर्जा राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनना चाहिए।
डीएमके विधायक गोवी चेजियन ने याद दिलाया कि पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि ने सरकारी आदेश के माध्यम से आधिकारिक कार्यक्रमों में 'तमिल थाई वाज्थु' गाने की परंपरा शुरू की थी। चेजियन ने यह भी बताया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने 17 दिसंबर, 2021 को एक आदेश जारी कर इस गीत को गाना अनिवार्य कर दिया था। उन्होंने कहा कि इस परंपरा को मजबूत कानूनी सुरक्षा देने से यह सुनिश्चित होगा कि भविष्य में इसके दर्जे को बदला न जा सके।
एआईएडीएमके महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने भी अपनी पार्टी के समर्थन की घोषणा की। उन्होंने 'तमिल थाई वाज्थु' को केवल एक औपचारिक गीत से कहीं अधिक बताते हुए कहा कि यह तमिल भाषा, संस्कृति और पहचान का प्रतिनिधित्व करता है।
पलानीस्वामी ने इस बात पर भी जोर दिया कि तमिल भाषा पर गर्व और देशभक्ति परस्पर विरोधी भावनाएं नहीं, बल्कि एक-दूसरे की पूरक हैं। सदन में मौजूद सभी पार्टियों के समर्थन से, विधानसभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव को मंजूरी दी और राज्य सरकार तथा शैक्षणिक कार्यक्रमों में 'तमिल थाई वाज्थु' की प्रधानता को फिर से दोहराया।
--आईएएनएस
एसडी/पीएम
