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सदर्न जोनल काउंसिल के लिए तमिलनाडु सरकार ने दो कैबिनेट मंत्रियों को किया नामित

चेन्नई, 26 जुलाई (आईएएनएस)। तमिलनाडु सरकार ने केंद्र के अहम अंतर-राज्यीय समन्वय मंच, 'सदर्न जोनल काउंसिल' (दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद) में राज्य का प्रतिनिधित्व करने के लिए दो कैबिनेट मंत्रियों को नामित किया है। मई में सत्ता में आई टीवीके के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के तहत इस निकाय में ये पहली नियुक्तियां हैं।
 

चेन्नई, 26 जुलाई (आईएएनएस)। तमिलनाडु सरकार ने केंद्र के अहम अंतर-राज्यीय समन्वय मंच, 'सदर्न जोनल काउंसिल' (दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद) में राज्य का प्रतिनिधित्व करने के लिए दो कैबिनेट मंत्रियों को नामित किया है। मई में सत्ता में आई टीवीके के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के तहत इस निकाय में ये पहली नियुक्तियां हैं।

सरकार द्वारा जारी एक राजपत्र अधिसूचना के मुताबिक, ऊर्जा संसाधन और कानून मंत्री आर. निर्मलकुमार और स्कूली शिक्षा, तमिल विकास, सूचना और प्रचार मंत्री राजमोहन को परिषद का सदस्य नामित किया गया है।

वे मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के साथ तमिलनाडु का प्रतिनिधित्व करेंगे। विजय इस उच्च-स्तरीय मंच पर राज्य के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हैं।

सरकार ने प्रशासनिक प्रतिनिधित्व का भी विस्तार किया है और गृह, निषेध और आबकारी विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के. मणिवासन को सदर्न जोनल काउंसिल का दूसरा सलाहकार नियुक्त किया है। वह मुख्य सचिव एम. साईकुमार के साथ काम करेंगे, जो परिषद के लिए राज्य के प्रधान सलाहकार बने रहेंगे।

ये नियुक्तियां 'राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956' के प्रावधानों के तहत जारी जीओएमएस नंबर 461 के माध्यम से अधिसूचित की गईं। यह आदेश 2021 में जारी सरकारी आदेश के तहत पिछली सरकार द्वारा किए गए नामांकन की जगह लेता है।

सदर्न जोनल काउंसिल उन पांच क्षेत्रीय परिषदों में से एक है जिन्हें 'राज्य पुनर्गठन अधिनियम' के तहत स्थापित किया गया था, ताकि केंद्र सरकार और राज्यों के बीच साझा हितों के मामलों पर सहयोग और समन्वय को बढ़ावा दिया जा सके।

केंद्र द्वारा समय-समय पर बुलाई जाने वाली इस परिषद में तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के मुख्यमंत्री, वरिष्ठ मंत्री और मुख्य सचिव एक साथ आते हैं ताकि अंतर-राज्यीय समन्वय की आवश्यकता वाले मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जा सके।

यह मंच नियमित रूप से बुनियादी ढांचे के विकास, आंतरिक सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, नदी जल विवाद, परिवहन कनेक्टिविटी, आपदा प्रबंधन, सामाजिक कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण और दक्षिणी क्षेत्र को प्रभावित करने वाले अन्य शासन संबंधी मुद्दों पर चर्चा करता है।

यह भाग लेने वाले राज्यों के बीच नीतिगत मतभेदों को सुलझाने और सहकारी संघवाद को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में भी काम करता है।

ये नवीनतम नामांकन इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये इस साल की शुरुआत में सत्ता में आने के बाद से सदर्न जोनल काउंसिल में टीवीके के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार का पहला प्रतिनिधित्व हैं।

इन नियुक्तियों से यह सुनिश्चित होने की उम्मीद है कि दक्षिणी राज्यों पर असर डालने वाले मुद्दों पर क्षेत्रीय नीतिगत चर्चाओं और मिलकर फैसले लेने की प्रक्रिया में तमिलनाडु की भागीदारी बनी रहे।

पिछली डीएमके सरकार के दौरान, काउंसिल में तमिलनाडु का प्रतिनिधित्व तत्कालीन मुख्यमंत्री एमके स्टालिन, तत्कालीन उद्योग मंत्री टीआरबी राजा और तत्कालीन हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती मंत्री पीके सेकरबाबू ने किया था।

--आईएएनएस

एएसएच/पीएम