तमिलनाडु: सरकार ने माइनिंग नियमों में बदलाव किया, एक्स्ट्रा फीस देकर महंगे मिनरल बेचने की इजाजत दी
चेन्नई, 3 अगस्त (आईएएनएस)। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने राज्य के लघु खनिज रियायत नियमों में संशोधन कर दिया है। इसके तहत अधिकृत खनन क्षेत्रों से उच्च मूल्य के खनिजों वाली कुछ प्राकृतिक रूप से पाई जाने वाली चट्टानों की बिक्री की अनुमति दी जाएगी। इसके लिए प्रयोगशाला परीक्षण और अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करना होगा।
राज्य प्राकृतिक संसाधन विभाग ने इस बदलाव को नोटिफाई किया है। इसका मकसद उन कीमती मिनरल्स को संभालने के लिए एक रेगुलेटरी सिस्टम बनाना है, जो पहले से ही खदान के लिए परमिशन वाले मिनरल्स और कंस्ट्रक्शन मटीरियल के साथ मिलते हैं। सरकार ने 23 जुलाई को बदले हुए नियम लागू किए और उन्हें ऑफिशियल गैजेट में पब्लिश किया।
नोटिफिकेशन के मुताबिक, माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1957 के तहत बनाए गए तमिलनाडु माइनर मिनरल कंसेशन रूल्स, 1959 में बदलाव किया गया है।
बदलावों के तहत, बिल्डिंग और सड़क बनाने में इस्तेमाल होने वाले पत्थरों के वर्गीकरण में भी बदलाव किया गया है। 'ग्रेनाइट के अलावा दूसरे पत्थरों' के पहले के बड़े विवरण को बदलकर विस्तृत वर्गीकरण कर दिया गया है, जिसमें प्राकृतिक रूप से घिसा हुआ काला पत्थर, पत्थर के टुकड़े, बोल्डर, टूटे और कुचले हुए पत्थर, मेटल ग्रेवल और सड़क बनाने में इस्तेमाल होने वाले पत्थर, और दूसरे मटीरियल शामिल हैं।
बदले हुए नियम उन माइनिंग लीजहोल्डर्स के लिए भी एक प्रोसेस बताते हैं जो अपने परमिशन वाले खदान एरिया में पाए जाने वाले नैचुरली इग्नियस रॉक को बेचना चाहते हैं।
ऐसे मटीरियल को डिस्पोज करने के इच्छुक लीजहोल्डर को पहले संबंधित अधिकारियों को एक रिपोर्ट देनी होगी। फिर उसमें मौजूद मिनरल का पता लगाने के लिए चट्टान के सैंपल को जियोलॉजी और माइनिंग डायरेक्टरेट की लैब में टेस्ट किया जाएगा। अगर लैब एनालिसिस से ज्यादा कीमत वाले मिनरल की मौजूदगी का पता चलता है, तो उनका डिस्पोजल और बिक्री कानून और नियमों के संबंधित प्रोविजन के अनुसार की जानी चाहिए।
सरकार ने उन चट्टानों से निपटने के लिए भी एक प्रोविजन शुरू किया है, जिनमें ऐसे मिनरल होते हैं जिनके लिए ज्यादा रेट या कीमत तय की गई है। अगर चट्टान में ऐसे मिनरल पाए जाते हैं, तो भी लीजहोल्डर की ओर से अधिकारियों द्वारा तय की गई एक्स्ट्रा फीस का पेमेंट करने के बाद मटीरियल को प्राकृतिक काले पत्थर की कैटेगरी में बेचने की इजाजत दी जा सकती है।
--आईएएनएस
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