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केरल: हादसे के बाद सीमित रूप में होगा त्रिशूर पूरम, नहीं होगी आतिशबाजी

त्रिशूर, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। त्रिशूर पूरम को इस वर्ष सीमित रूप में आयोजित करने का फैसला लिया गया है। मुण्डाथिक्कोडे में हुए भीषण आतिशबाजी विस्फोट के बाद प्रशासन ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह बड़ा निर्णय लिया है। इस बार उत्सव में आतिशबाजी पूरी तरह से रद्द कर दी गई है।
 
केरल: हादसे के बाद सीमित रूप में होगा त्रिशूर पूरम, नहीं होगी आतिशबाजी

त्रिशूर, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। त्रिशूर पूरम को इस वर्ष सीमित रूप में आयोजित करने का फैसला लिया गया है। मुण्डाथिक्कोडे में हुए भीषण आतिशबाजी विस्फोट के बाद प्रशासन ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह बड़ा निर्णय लिया है। इस बार उत्सव में आतिशबाजी पूरी तरह से रद्द कर दी गई है।

यह फैसला गुरुवार को त्रिशूर कलेक्टरेट में हुई उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता देवस्वम मंत्री वी.एन. वासवन ने की। बैठक में केंद्रीय पर्यटन मंत्री और स्थानीय सांसद सुरेश गोपी समेत अन्य जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

गौरतलब है कि मंगलवार शाम हुए विस्फोट में कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए। हादसा इतना भीषण था कि कुछ शवों की पहचान के लिए डीएनए जांच करानी पड़ रही है।

संशोधित कार्यक्रम के तहत, प्रसिद्ध “कुडामट्टम” (छतरियों के आदान-प्रदान की रस्म) को घटाकर सिर्फ 15 मिनट का कर दिया गया है, जो आमतौर पर करीब एक घंटे तक चलता है। वहीं, आतिशबाजी, जो इस उत्सव का मुख्य आकर्षण मानी जाती है, इस बार पूरी तरह से नहीं होगी।

हालांकि, पारंपरिक रस्में जारी रहेंगी। प्रसिद्ध “इलंजीथरा मेलम” (पारंपरिक वाद्य यंत्रों का समूह प्रदर्शन) पूरे भव्य रूप में आयोजित किया जाएगा, जबकि कुडामट्टम को प्रतीकात्मक रूप से किया जाएगा।

हादसे में घायल चार लोग, जिनमें आतिशबाजी ठेकेदार सतीश भी शामिल हैं, की हालत गंभीर बनी हुई है। 11 लोगों का इलाज चल रहा है, जबकि चार लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

त्रिशूर पूरम, जिसे “सभी पूरमों की जननी” कहा जाता है, हर साल वडक्कुनाथन मंदिर में आयोजित होता है और देशभर से हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है। हाथियों की भव्य शोभायात्रा, रंग-बिरंगी छतरियों का प्रदर्शन और तालबद्ध वाद्य प्रस्तुतियां इसकी खास पहचान हैं।

इस बार का सीमित आयोजन परंपरा को बनाए रखते हुए लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि राज्य अभी भी मुण्डाथिक्कोडे हादसे के सदमे से उबरने की कोशिश कर रहा है।

--आईएएनएस

डीएससी