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राघव चड्ढा ने पीएम मोदी के 'हम यह करेंगे' नारे की तारीफ की, 25 साल के सेवा काल को बताया प्रेरणा

नई दिल्ली, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नए नारे और आह्वान, 'हम यह करेंगे', की तारीफ की। यह नारा देश में विकास की नई संभावनाओं को खोलने और 2047 तक 'विकसित भारत' का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में एक अहम कदम है।
 

नई दिल्ली, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नए नारे और आह्वान, 'हम यह करेंगे', की तारीफ की। यह नारा देश में विकास की नई संभावनाओं को खोलने और 2047 तक 'विकसित भारत' का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में एक अहम कदम है।

हाल ही में आम आदमी पार्टी (आप) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए राघव चड्ढा ने कहा कि प्रधानमंत्री का 'हम करके रहेंगे' का संकल्प उनकी 25 साल की 'सेवा' के कमिटमेंट और जोश को दिखाता है। साथ ही, यह भी बताता है कि उनका विजन आज भी उतना ही मजबूत और पक्का है, जितना 25 साल पहले था।

बुधवार को राजधानी के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में 'विकसित भारत संकल्प सभा' ​​को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने देश के लिए पांच बड़े लक्ष्य तय किए। उन्होंने 'हम करके रहेंगे' नारे के साथ लोगों में नई ऊर्जा भरी, जिसे दर्शकों ने भी जोरदार तरीके से दोहराया।

प्रधानमंत्री ने कहा, "अपनी यात्रा के इस पड़ाव पर मैं हर वॉलंटियर और हर साथी कार्यकर्ता को सम्मानपूर्वक सलाम करता हूं। आज का दिन सिर्फ यादों का दिन नहीं है। यह हमारे संकल्प में नई ऊर्जा भरने का दिन है। यह उस वादे को दोहराने और उस इरादे को जाहिर करने का दिन है, जो कहता है कि 'हम करके रहेंगे। हम करके रहेंगे'।"

राज्यसभा सांसद चड्ढा ने 25 साल के इस पड़ाव पर प्रधानमंत्री को बधाई देते हुए कहा कि पीएम मोदी अब विकास के अगले चरण की बात कर रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा, "भारत को दुनिया की टॉप तीन अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनाना। एक ज्यादा आत्मनिर्भर भारत बनाना। ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग बेस तैयार करना। सेमीकंडक्टर, एआई, स्पेस और नई टेक्नोलॉजी में निवेश करना। एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूत करना। युवाओं के लिए ज्यादा मौके बनाना। और आखिरकार 2047 तक विकसित भारत की नींव रखना। आज उन्होंने उस संकल्प को तीन आसान शब्दों में समेटा- 'हम करके रहेंगे'।"

राघव चड्ढा ने यह भी कहा कि राज्य के प्रमुख के तौर पर प्रधानमंत्री के लगातार 25 सालों ने हर पड़ाव पर जनता का भरोसा फिर से जीता है। इन सालों में जिम्मेदारी का दायरा भी बहुत बढ़ा है, फिर भी उनके कामकाज के तरीके में एक निरंतरता रही है।

उन्होंने कहा, "पहला जनादेश उम्मीद और अपेक्षा से मिल सकता है, लेकिन जब लोग कई सालों तक उस जनादेश को बार-बार देते हैं, तो उम्मीदें भी बढ़ती हैं और काम का स्तर भी। मेरे लिए, यही बात इन 25 सालों को खास बनाती है।"

--आईएएनएस

एससीएच/डीकेपी