तमिलनाडु: ग्रेनाइट कारोबारी वीरमणि के खिलाफ पॉक्सो केस को बंद करने के मामले में तीन अधिकारियों को समन
चेन्नई, 24 सितंबर (आईएएनएस)। ग्रेनाइट कारोबारी वीरमणि के पॉक्सो केस को बंद करने के मामले में सेंट्रल क्राइम ब्रांच (सीसीबी) की ओर से तीन पुलिस अधिकारियों को समन भेजा गया है। इन अधिकारियों ने ग्रेनाइट्स के बिजनेसमैन आर. वीरमणि के खिलाफ बच्चों के यौन शोषण के मामले की शुरुआती जांच की थी।
सीसीबी की ओर से इन तीन पुलिस अधिकारियों से उस फैसले के बारे में सफाई मांगी गई है, जिसके तहत पिछले वर्ष अक्टूबर में शिकायत दर्ज होने के बाद मामले को बंद कर दिया गया था। एंटी-वाइस यूनिट में काम करने वाली असिस्टेंट कमिश्नर यास्मीन और इंस्पेक्टर महेश कुमार और राजलक्ष्मी को पूछताछ के लिए बुलाया गया है।
जांच करने वाले अधिकारी यह देखेंगे कि शिकायत का आकलन कैसे किया गया, क्या सबूत इकट्ठा किए गए और पिछली टीम ने केस बंद करने की रिपोर्ट क्यों सौंपी? वीरमणि को नाबालिगों के यौन शोषण के आरोपों में 'बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण' (पॉक्सो) एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया और पुझल जेल में रखा गया था।
पुलिस ने शांति और उनके पति महेंद्र सिम्हन को भी इस आरोप में गिरफ्तार किया कि उसने इस शोषण में मदद की थी। वीरमणि के पूर्व सहयोगी गणेशन को गिरफ्तार किया गया है। यह समन उस जांच का अगला चरण है जिसे पुलिस की शुरुआती जांच की न्यायिक समीक्षा के बाद फिर से शुरू किया गया था।
वीरमणि के खिलाफ अक्टूबर 2025 में शिकायत दर्ज की गई थी, लेकिन बाद में पुलिस ने मामले को बंद करने की कोशिश की। अदालत ने उस निष्कर्ष को मानने से इनकार कर दिया और नए सिरे से जांच के निर्देश दिए। दोबारा हुई जांच के बाद गिरफ्तारियां हुईं और अब जांच का रुख उन अधिकारियों के कामकाज की ओर मुड़ गया है, जिन्होंने मूल शिकायत पर कार्रवाई की थी।
जांच अधिकारी वीरमणि के लंबे समय के व्यवहार से जुड़े आरोपों की भी जांच कर रहे हैं। यह दावा कि शोषण 2003 में शुरू हुआ और लगभग 23 वर्षों तक चला, अभी भी जांच के दायरे में है; अदालत ने इसकी अवधि और विवरण की पुष्टि नहीं की है। पुलिस ने सार्वजनिक रूप से यह नहीं बताया है कि इन दावों में कितने कथित पीड़ित या घटनाएं शामिल हैं।
अधिकारियों से पूछताछ से यह स्पष्ट हो सकता है कि क्या जांचकर्ताओं ने अहम सबूतों को नजरअंदाज किया, जरूरी सुरागों पर कार्रवाई नहीं की या केस बंद करने की सिफारिश करने के पीछे कोई ठोस आधार था।
पूछताछ के लिए बुलाए जाने का मतलब यह नहीं है कि तीनों अधिकारियों में से किसी ने गलत काम किया है। उन अधिकारियों के खिलाफ कोई निष्कर्ष घोषित नहीं किया गया है। इस मामले ने इसलिए ध्यान खींचा है, क्योंकि केस बंद करने की रिपोर्ट को अदालत की ओर से स्वीकार न करने से जांच की दिशा बदल गई।
सीसीबी को वीरमणि के खिलाफ आरोपों के पीछे के तथ्यों और पिछली जांच के उस तरह से खत्म होने के कारणों का पता लगाना होगा। गिरफ्तार किए गए लोगों पर इस चरण में आरोप हैं, और मामला अभी भी जांच और अदालती कार्यवाही के अधीन है।
--आईएएनएस
एसडी/पीएम
