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कर्नाटक: प्रज्वल रेवन्ना मामले की जांच करने वाले एसआईटी के तीन अधिकारियों को गृह मंत्रालय से मिला मेडल

बेंगलुरु, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। कर्नाटक की विशेष जांच टीम (एसआईटी) और अपराध जांच विभाग (सीआईडी) के तीन अधिकारियों को पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना से जुड़े यौन उत्पीड़न मामलों की जांच में उत्कृष्ट कार्य के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय का मेडल फॉर एक्सीलेंस इन इन्वेस्टिगेशन प्रदान किया गया है।
 

बेंगलुरु, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। कर्नाटक की विशेष जांच टीम (एसआईटी) और अपराध जांच विभाग (सीआईडी) के तीन अधिकारियों को पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना से जुड़े यौन उत्पीड़न मामलों की जांच में उत्कृष्ट कार्य के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय का मेडल फॉर एक्सीलेंस इन इन्वेस्टिगेशन प्रदान किया गया है।

मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, सम्मानित अधिकारियों में इंस्पेक्टर शोभा, सहायक उपनिरीक्षक रत्नम्मा और सीएचसी बालकृष्ण शामिल हैं। ये तीनों अधिकारी उस एसआईटी टीम का हिस्सा थे, जिसने प्रज्वल रेवन्ना के खिलाफ दर्ज यौन उत्पीड़न मामलों की जांच की थी। जांच के आधार पर अदालत में मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत किए गए, जिसके बाद रेवन्ना को दोषी ठहराया गया।

यह पदक आपराधिक मामलों की जांच में उत्कृष्ट प्रदर्शन और प्रभावी व पेशेवर जांच के माध्यम से न्याय सुनिश्चित करने में योगदान देने वाले अधिकारियों को दिया जाता है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने तीनों अधिकारियों को इस उपलब्धि पर बधाई दी है।

पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के पोते और पूर्व जनता दल (सेक्युलर) सांसद प्रज्वल रेवन्ना को एक चर्चित दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। बेंगलुरु की सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों की विशेष अदालत ने 1 अगस्त 2025 को उन्हें दोषी करार दिया था और 2 अगस्त 2025 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

यह मामला एक 47 वर्षीय घरेलू महिला कर्मचारी के साथ वर्ष 2021 में कथित यौन उत्पीड़न और बार-बार दुष्कर्म से जुड़ा था। आरोपों के अनुसार, यह घटनाएं परिवार के फार्महाउस और आवास पर हुई थीं। मामले में आपत्तिजनक वीडियो बनाने और उन्हें प्रसारित करने के आरोप भी शामिल थे।

जांच के दौरान एसआईटी को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लीक और बरामद किए गए कई वीडियो में आरोपी का चेहरा स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रहा था। ऐसे में जांचकर्ताओं ने शरीर पर मौजूद जन्मचिह्न, तिल और टैटू जैसी विशेष पहचान के आधार पर मेडिकल परीक्षण की तस्वीरों और फोरेंसिक तकनीकों का उपयोग करते हुए पहचान सुनिश्चित की।

एसआईटी ने सैकड़ों वीडियो और हजारों डिजिटल स्क्रीनशॉट की जांच की। अलग-अलग पीड़िताओं से जुड़े रिकॉर्ड तैयार किए गए और फार्महाउस तथा निजी आवासों सहित विभिन्न स्थानों पर हुई घटनाओं का विश्लेषण किया गया।

अदालत ने प्रज्वल रेवन्ना को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(के) और 376(2)(एन) के तहत शेष प्राकृतिक जीवन तक कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा यौन उत्पीड़न, महिला की मर्यादा भंग करने के प्रयास, झांकने (वॉयूरिज्म), आपराधिक धमकी, साक्ष्य नष्ट करने और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में भी सजा सुनाई गई।

अदालत ने उन पर 11.50 लाख रुपए से अधिक का जुर्माना भी लगाया, जिसमें से लगभग 11.25 लाख रुपए पीड़िता को मुआवजे के रूप में देने का आदेश दिया गया।

रेवन्ना ने अपनी सजा और दोषसिद्धि को कर्नाटक हाई कोर्ट में चुनौती दी है। हालांकि, दिसंबर 2025 में हाई कोर्ट की खंडपीठ ने सजा पर रोक लगाने और जमानत देने की उनकी याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने अपराध की गंभीरता और लंबित मामलों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला सुनाया था।

जांच और सुनवाई के दौरान पीड़ितों और गवाहों को कथित तौर पर धमकियां भी मिलीं, जिसके चलते अदालत को पुलिस सुरक्षा के निर्देश देने पड़े। वहीं, रेवन्ना की हाई-सिक्योरिटी जेल सेल से मोबाइल फोन और पेन ड्राइव जैसी प्रतिबंधित वस्तुओं की बरामदगी ने भी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे।

इस हाई-प्रोफाइल मामले की सफल जांच के लिए अब एसआईटी के तीन अधिकारियों को केंद्र सरकार की ओर से सम्मानित किया गया है।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी