नए आपराधिक कानून पारदर्शी और तकनीक आधारित हैं: गृह मंत्री अमित शाह
कोलकाता, 21 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि तीन नए आपराधिक कानून, भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, पुराने "औपनिवेशिक" आपराधिक न्याय प्रणाली की तुलना में अधिक पारदर्शी, तकनीक आधारित और समयबद्ध हैं।
बीएनएस, बीएनएसएस और बीएसए के प्रावधानों को प्रदर्शित करने वाली एक प्रदर्शनी को संबोधित करते हुए शाह ने कहा, "इन तीन नए कानूनों का उद्देश्य नागरिकों, संपत्ति और पीड़ितों की सुरक्षा को मजबूत करना है, साथ ही आपराधिक न्याय प्रक्रिया को तेज करना भी है। इसके अलावा, ये कानून पहले की व्यवस्था की तरह केवल सजा पर केंद्रित न होकर पीड़ित-केंद्रित हैं।"
उन्होंने कहा कि जीरो एफआईआर, ई-एफआईआर, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, फोरेंसिक साक्ष्य और ऑनलाइन न्यायिक कार्यवाही जैसे प्रावधान नए कानूनों को अधिक पीड़ित-केंद्रित बनाते हैं।
इस अवसर पर गृह मंत्री अमित शाह ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पूर्व तृणमूल कांग्रेस सरकार की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में इन तीन नए कानूनों को लागू करने की अधिसूचना जानबूझकर देर से जारी की गई।
उन्होंने कहा, "यह अधिसूचना जानबूझकर इसलिए जारी नहीं की गई क्योंकि डर था कि नए कानून लागू होते ही पिछली सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा खड़े किए गए भ्रष्टाचार के किले कुछ ही मिनटों में ढह जाएंगे। बंगाल चुनाव में हमने लोगों से डर नहीं, बल्कि विश्वास की सरकार देने का वादा किया था। मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद सुवेंदु अधिकारी ने जिस पहली फाइल पर हस्ताक्षर किए, वह हमारे तीन नए न्याय संहिताओं को लागू करने और ब्रिटिश काल के पुराने कानूनों को हटाने से संबंधित थी। वहीं से डर की जगह विश्वास कायम करने का काम शुरू हुआ।"
शाह ने यह भी दावा किया कि पिछली तृणमूल सरकार के दौरान आरजी कर रेप एवं हत्या मामला, कसबा लॉ कॉलेज मामला, संदेशखाली में महिलाओं के साथ मारपीट और दुर्गापुर मेडिकल कॉलेज रेप मामले जैसे महत्वपूर्ण मामलों में उचित जांच नहीं की गई थी।
उन्होंने कहा, "हम नई न्याय संहिता में तकनीक के बढ़ते उपयोग पर जोर दे रहे हैं, ताकि पुलिस अपनी जांच में अधिक तकनीक आधारित साक्ष्य जुटा सके। इससे मुकदमों की सुनवाई की प्रक्रिया तेज होगी।"
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