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तेलंगाना पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी के पीड़ितों को 139 करोड़ रुपए वापस दिलाने में मदद की

हैदराबाद, 13 सितंबर (आईएएनएस)। तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो (टीजीसीएसबी) की डायरेक्टर शिखा गोयल ने रविवार को बताया कि तेलंगाना पुलिस ने अब तक 24,189 साइबर धोखाधड़ी पीड़ितों को 139.68 करोड़ रुपए वापस दिलाने में मदद की है।
 

हैदराबाद, 13 सितंबर (आईएएनएस)। तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो (टीजीसीएसबी) की डायरेक्टर शिखा गोयल ने रविवार को बताया कि तेलंगाना पुलिस ने अब तक 24,189 साइबर धोखाधड़ी पीड़ितों को 139.68 करोड़ रुपए वापस दिलाने में मदद की है।

हाल ही में हैदराबाद में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में टीजीसीएसबी ने तेलंगाना राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण (टीएसएलएसए), बैंकों, डिजिटल पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स, सभी पुलिस कमिश्नरेट और राज्य भर की जिला पुलिस इकाइयों के साथ मिलकर 3,896 पीड़ितों को 42.28 करोड़ रुपए वापस दिलाने में सफलता हासिल की।

लोक अदालत के जरिए रिफंड दिलाने में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली इकाई साइबराबाद रही, जिसने 942 पीड़ितों को 14.19 करोड़ रुपए वापस दिलाए। टीजीसीएसबी दूसरे स्थान पर रहा, जिसने 41 पीड़ितों को 10.55 करोड़ रुपए वापस दिलाए, जबकि मल्कजगिरी तीसरे स्थान पर रहा, जहां 1,024 पीड़ितों को 5.27 करोड़ रुपए वापस मिले।

हैदराबाद पुलिस ने 530 पीड़ितों को 5.02 करोड़ रुपए वापस दिलाए, जबकि सूर्यपेट पुलिस ने 34 पीड़ितों को धोखाधड़ी में गंवाए गए 0.76 करोड़ रुपए वापस दिलाए।

लोक अदालत के अलावा, टीजीजीएसबी साइबर अपराध के पीड़ितों के पैसे वापस दिलाने के लिए एमएचए द्वारा मई 2026 में शुरू किए गए एमआरएम (मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल) का भी सक्रिय रूप से इस्तेमाल कर रहा है।

यह मॉड्यूल जून से तेलंगाना में काम कर रहा है और बिना कोर्ट के आदेश के पीड़ितों को रिफंड दिलाने में मदद करता है। 12 सितंबर तक, एमआरएम के जरिए 9,355 पीड़ितों को 27.23 करोड़ रुपए वापस किए जा चुके हैं। गोयल ने कहा कि इन दो पहलों के जरिए इस साल राज्य भर में कुल 13,251 पीड़ितों को आर्थिक राहत मिली है।

जीसीएसबी ने साइबर अपराध के पीड़ितों से एमआरएम के जरिए रिफंड के लिए आवेदन करने का आग्रह किया है।

ब्यूरो ने अपनी शुरुआत से लेकर अब तक 73,204 पीड़ितों को 514.93 करोड़ रुपए वापस दिलाने में मदद की है।

तेलंगाना साइबर अपराध के पीड़ितों को आर्थिक न्याय दिलाने में सबसे आगे बना हुआ है। निदेशक ने कहा कि ये नतीजे पीड़ितों की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई, बैंकों के साथ बेहतर तालमेल, न्यायिक सहयोग और सभी पुलिस स्टेशनों द्वारा लोक अदालत और एमआरएम सिस्टम के कुशल इस्तेमाल से संभव हो पाए हैं।

उन्होंने कहा, "जीसीएसबी साइबर अपराध के पीड़ितों को तेजी से आर्थिक राहत और न्याय दिलाने के लिए लोक अदालत और एमआरएम-आधारित रिकवरी सिस्टम को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।"

जीसीएसबी ने नागरिकों को सलाह दी कि वे किसी भी स्थिति में अनजान लोगों को ओटीपी, पिन, पासवर्ड या बैंकिंग जानकारी न बताएं। कस्टमर केयर नंबरों की पुष्टि केवल आधिकारिक वेबसाइटों से करें। एसएमएस, ईमेल, वाट्सअप या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मिले संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें और अपनी निजी या बैंकिंग जानकारी कभी भी किसी के साथ साझा न करें।

साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करें या 'गोल्डन आवर' के भीतर डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यूडॉटसाइबरक्राइमडॉटगॉवडॉटइन पर शिकायत दर्ज करें। उन्होंने कहा कि तुरंत रिपोर्ट करने से धोखाधड़ी की गई रकम को फ्रीज करने और उसे वापस पाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

--आईएएनएस

एससीएच/डीकेपी