तेलंगाना का सरप्लस बजट पूर्व सीएम रोजैया की दूरदर्शिता का परिणाम: रेवंत रेड्डी
हैदराबाद, 13 सितंबर (आईएएनएस)। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने रविवार को कहा कि राज्य के गठन के समय तेलंगाना के पास 16,000 करोड़ रुपये का सरप्लस बजट होना अविभाजित आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री के. रोजैया की दूरदर्शिता का परिणाम था।
हैदराबाद के उप्पल भागायत में आर्य वैश्य आत्म गौरव भवन (सामुदायिक एवं सांस्कृतिक केंद्र) के भूमि पूजन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2 जून 2014 को जब तेलंगाना का गठन हुआ, तब राज्य 16,000 करोड़ रुपये के सरप्लस बजट के साथ अस्तित्व में आया था। इसका श्रेय रोजैया को जाता है।
उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्रियों चेन्ना रेड्डी, विजया भास्कर रेड्डी और वाई.एस. राजशेखर रेड्डी ने राज्य की वित्तीय व्यवस्था और खजाने के प्रबंधन की जिम्मेदारी आर्य वैश्य समुदाय के लोगों को सौंपी थी।
आर्य वैश्य समुदाय से आने वाले रोजैया अविभाजित आंध्र प्रदेश के सबसे लंबे समय तक वित्त मंत्री रहे। उन्होंने राज्य का बजट 16 बार पेश किया, जिसमें लगातार सात बार बजट पेश करना भी शामिल है।
रेवंत रेड्डी ने कहा कि कांग्रेस ने ही रोजैया को वह अवसर और सम्मान दिया, जिसके वे हकदार थे। उन्होंने बताया कि रोजैया ने उनके राजनीतिक जीवन में उनकी क्षमता को काफी पहले पहचान लिया था।
मुख्यमंत्री ने कहा, "जब मैं विधान परिषद में आक्रामक तरीके से बोलता था, तो रोजैया मुझे अलग बुलाकर समझाते थे कि अपने गुस्से पर नियंत्रण रखें और अनुभव के साथ आगे बढ़ें, ताकि जीवन में बड़ी ऊंचाइयां हासिल कर सकूं।"
उन्होंने कहा कि रोजैया कठोर आलोचना या अपशब्दों का इस्तेमाल करने वाले नेता नहीं थे, बल्कि अपनी तीखी और चुटीली टिप्पणियों के लिए जाने जाते थे।
रेवंत रेड्डी ने कहा कि उनकी सरकार ने रोजैया के सम्मान और गरिमा को कायम रखने के लिए हैदराबाद के बीचोंबीच उनकी प्रतिमा स्थापित की है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने प्रतिमा लगाए जाने की आलोचना की थी, लेकिन रोजैया चार दशक पहले हैदराबाद आए थे और सुख-दुख में इसे अपना घर बताया था। उनके इसी कथन का सम्मान करते हुए उनकी प्रतिमा स्थापित की गई।
मुख्यमंत्री ने आर्य वैश्य समुदाय की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह समुदाय स्वभाव से शांत और आत्मसम्मान से भरपूर है। उन्होंने कहा कि आर्य वैश्य दूरदर्शिता और विवेक के लिए जाने जाते हैं और यह उनके डीएनए में है।
उन्होंने कहा कि समुदाय के कई लोग गरीबी का सामना करने के बावजूद खुद को गरीब कहलाना पसंद नहीं करते, क्योंकि उनके लिए सम्मान और गरिमा सबसे ऊपर है। उन्होंने कहा कि गांवों में आर्य वैश्य समुदाय के लोग गरीब से गरीब व्यक्ति को भी कम से कम भोजन के लिए उधार देने में मदद करते हैं।
रेवंत रेड्डी ने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों में आर्य वैश्य समुदाय को विभिन्न नामों से जाना जाता है। उन्होंने महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि वह वास्तव में एक वैश्विक नेता थे और आर्य वैश्य समुदाय से आने वाले ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने भारत से निकलकर पूरी दुनिया में अपनी पहचान बनाई।
उन्होंने कहा कि यह गर्व की बात है कि महात्मा गांधी कांग्रेस से जुड़े थे और आर्य वैश्य समुदाय के कई प्रमुख लोगों ने कांग्रेस में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पोट्टी श्रीरामुलु के संघर्ष के कारण आंध्र प्रदेश राज्य का गठन हुआ। महात्मा गांधी ने देश की एकता और अखंडता के लिए अपना जीवन बलिदान किया, जबकि पोट्टी श्रीरामुलु ने आंध्र प्रदेश राज्य के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।
उन्होंने कहा कि आर्य वैश्य समुदाय को वह पहचान नहीं मिली, जिसका वह हकदार है। उन्होंने उम्मीद जताई कि 'आत्म गौरव भवन' वंचित आर्य वैश्य समुदाय के लोगों की जरूरतों को पूरा करने में पूरी तरह सक्षम होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भवन के निर्माण में आवश्यक सहायता उपलब्ध कराएगी।
--आईएएनएस
