तेलंगाना विधानसभा ने मनरेगा को जारी रखने का प्रस्ताव पारित किया
हैदराबाद, 2 जनवरी (आईएएनएस)। तेलंगाना विधानसभा ने शुक्रवार को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को यथावत जारी रखने की मांग करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया। इसके साथ ही हाल ही में पारित विकसित भारत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम (वीबीजी जी रामजीजी) को गरीबों के अधिकारों के लिए हानिकारक बताया।
मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने प्रस्ताव पेश किया, जिसे ध्वनि मत से सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।
प्रस्ताव के अनुसार, नया कानून गरीबों के अधिकारों, महिला श्रमिकों के अधिकारों के विरुद्ध है और संघवाद की भावना का उल्लंघन करता है।
प्रस्ताव में कहा गया है कि मनरेगा को 2005 में डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार द्वारा ग्रामीण गरीबों को रोजगार प्रदान करने और गरीब परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए लागू किया गया था। गरीबी, बेरोजगारी, पलायन, अकुशल श्रमिकों के शोषण और पुरुषों एवं महिलाओं के बीच वेतन असमानता को कम करने तथा समाज के सभी वर्गों के विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाया गया यह अधिनियम 2 फरवरी, 2006 को लागू हुआ।
इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार को प्रति वर्ष कम से कम 100 दिनों का रोजगार सुनिश्चित करना और न्यूनतम मजदूरी प्रदान करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 20 वर्षों में राज्य में इस योजना के लगभग 90 प्रतिशत लाभार्थी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग से हैं। इनमें से 62 प्रतिशत महिलाएं हैं। दलित, आदिवासी, दिव्यांगजन और सबसे पिछड़े समुदायों, जैसे आदिवासी तथा अन्य गरीब समुदायों को सबसे अधिक लाभ मिला है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नया कानून ग्रामीण महिलाओं और समाज के कमजोर वर्गों के लिए रोजगार गारंटी को खतरे में डालता है, जो मुख्य रूप से इस योजना पर निर्भर हैं। पुराने रोजगार गारंटी योजना की भावना को कमजोर करने वाले प्रावधान गरीबों के लिए अभिशाप बन जाएंगे।
प्रस्ताव में कहा गया है कि नया कानून गरीबों के अधिकारों के खिलाफ है क्योंकि यह रोजगार गारंटी अधिनियम के मूल उद्देश्य को कमजोर करता है। इसने मांग के अनुसार कार्य योजना तैयार करने की प्रणाली को समाप्त कर दिया है।
प्रस्ताव के अनुसार, नया कानून महिला श्रमिकों के खिलाफ है। वर्तमान में लागू मनरेगा में लगभग 62 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं हैं। नए कानून में शामिल सीमित आवंटन प्रणाली से कार्यदिवसों की संख्या कम हो जाएगी।
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