Aapka Rajasthan

तेजस्वी यादव का आरोप- 'सीएम सम्राट ने जमुई पीड़िता की पहचान उजागर कर किया पॉक्सो एक्ट का उल्लंघन'

पटना, 25 सितंबर (आईएएनएस)। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर जमुई यौन उत्पीड़न मामले की नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पॉक्सो एक्ट के तहत पीड़ित बच्चे या नाबालिग की पहचान को सार्वजनिक करना गंभीर अपराध है। मुख्यमंत्री को इस जुर्म के लिए कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
 

पटना, 25 सितंबर (आईएएनएस)। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर जमुई यौन उत्पीड़न मामले की नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पॉक्सो एक्ट के तहत पीड़ित बच्चे या नाबालिग की पहचान को सार्वजनिक करना गंभीर अपराध है। मुख्यमंत्री को इस जुर्म के लिए कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पिछले दिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पोस्ट का एक स्क्रीनशॉट शेयर किया। इसमें सीएम सम्राट पीड़िता और उसके परिवार के सदस्यों के साथ खड़े थे।

हालांकि, मुख्यमंत्री की ओर से शेयर तस्वीर में सभी सदस्यों के चेहरे ब्लर थे। बाद में पोस्ट हटा दिया गया, लेकिन उसका स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पोस्ट पर यह विवाद जमुई में एक नाबालिग लड़की और एक किशोर लड़के के साथ कथित उत्पीड़न और मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के कुछ दिनों बाद हुआ।

तेजस्वी यादव के अनुसार, नाबालिग लड़की और उसका परिवार मुख्यमंत्री से उनके सरकारी आवास पर मिला था। हटाए गए पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने खुद तस्वीर सार्वजनिक करके पोक्सो एक्ट का उल्लंघन किया है।

उन्होंने यौन अपराधों के पीड़ितों को दिए गए कानूनी सुरक्षा उपायों के गंभीर उल्लंघन के लिए कड़ी कार्रवाई की मांग की। तेजस्वी ने लिखा, "पॉक्सो अधिनियम-2012 की धारा 23 के अनुसार, किसी भी मीडिया (प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक या सोशल मीडिया) या अन्य माध्यम से पीड़ित बच्चे की पहचान उजागर नहीं की जा सकती। इसमें बच्चे का नाम, पता, फोटो, स्कूल या परिवार से जुड़ी कोई भी जानकारी शामिल है जिससे उसकी पहचान का खुलासा हो सके। पहचान उजागर करने पर 6 महीने से 1 साल तक की जेल या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।"

उन्होंने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री को इस जुर्म के लिए कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए अन्यथा फिर पॉक्सो एक्ट को मानेगा कौन?

--आईएएनएस

डीसीएच/