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टेक्नोलॉजी बदल रही ट्रेडिंग, निवेश और सलाह के तरीके: सेबी चेयरमैन

मुंबई, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। सेबी यानी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (एसईबीआई) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने शनिवार को कहा कि टेक्नोलॉजी तेजी से ट्रेडिंग, निवेश वितरण और सलाह देने के तरीके को बदल रही है, क्योंकि बाजार में नई पीढ़ी के निवेशक आ रहे हैं।
 
टेक्नोलॉजी बदल रही ट्रेडिंग, निवेश और सलाह के तरीके: सेबी चेयरमैन

मुंबई, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। सेबी यानी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (एसईबीआई) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने शनिवार को कहा कि टेक्नोलॉजी तेजी से ट्रेडिंग, निवेश वितरण और सलाह देने के तरीके को बदल रही है, क्योंकि बाजार में नई पीढ़ी के निवेशक आ रहे हैं।

देश की आर्थिक राजधानी में सेबी के 38वें स्थापना दिवस समारोह में बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज के निवेशक डिजिटल रूप से जुड़े हुए, जागरूक और महत्वाकांक्षी हैं।

उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी के कारण ट्रेडिंग, निवेश सेवाएं और सलाह देने के तरीके बदल रहे हैं, साथ ही पूंजी का प्रवाह अब वैश्विक हो गया है और जोखिम भी आपस में जुड़े हुए हैं।

पांडे ने भारतीय शेयर बाजार में आए बदलाव को रेखांकित करते हुए कहा कि यह सिर्फ आकार या आंकड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि यह निवेशकों के भरोसे का प्रतीक है।

उन्होंने कहा, "आज भारतीय शेयर बाजार क्या दर्शाता है? यह केवल आंकड़े या आकार नहीं, बल्कि विश्वास का प्रतिबिंब है।"

मौजूदा स्थिति पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि भारत में आज 5,900 से ज्यादा सूचीबद्ध कंपनियां हैं और 14 करोड़ से अधिक यूनिक निवेशक मौजूद हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में बाजार पूंजीकरण लगभग 15 प्रतिशत की सालाना दर (सीएजीआर) से बढ़ा है, जबकि म्यूचुअल फंड की संपत्ति हर साल 20 प्रतिशत से ज्यादा की दर से बढ़ी है।

इसके अलावा, कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार भी लगातार बढ़ रहा है और हर साल प्राथमिक बाजार के जरिए करीब 10 लाख करोड़ रुपए की पूंजी जुटाई जाती है।

पांडे ने आगे यह भी कहा कि भारतीय बाजार अब वैश्विक पूंजी प्रवाह से ज्यादा जुड़ते जा रहे हैं, जिससे वे अधिक गतिशील तो बन रहे हैं, लेकिन साथ ही जोखिम भी बढ़ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसे बदलते माहौल में नियमों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

उन्होंने जोर देकर कहा, "बाजार की तेजी के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ती है। इसलिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि नवाचार सुरक्षा से आगे न निकल जाए, पहुंच बढ़ने से जागरूकता कम न हो और विकास टिकाऊ बना रहे। ऐसे समय में संतुलित और सोच-समझकर बनाए गए नियम बहुत जरूरी हैं।"

--आईएएनएस

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